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त्रिपुरा विश्वविद्यालय का 14वां दीक्षांत समारोह 8 मार्च को, मुख्य अतिथि होंगे उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन

त्रिपुरा यूनिवर्सिटी में 8 मार्च को होने वाले 14वें दीक्षांत समारोह में उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे

त्रिपुरा विश्वविद्यालय का 14वां दीक्षांत समारोह 8 मार्च को, मुख्य अतिथि होंगे उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन
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अगरतला। त्रिपुरा यूनिवर्सिटी में 8 मार्च को होने वाले 14वें दीक्षांत समारोह में उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे। विश्वविद्यालय के एक अधिकारी ने बताया कि केंद्रीय विश्वविद्यालय का दीक्षांत समारोह पिछले दो वर्षों 2024 और 2025 में आयोजित नहीं हो सका था। समारोह के दौरान पात्र छात्रों को प्रमाणपत्र, डिग्रियां, स्वर्ण पदक और पीएचडी की उपाधियां प्रदान की जाएंगी।

अधिकारी ने बताया कि उपराष्ट्रपति राज्य की राजधानी अगरतला के बाहरी इलाके सूर्यमणिनगर में विश्वविद्यालय परिसर में दीक्षांत समारोह का उद्घाटन करेंगे। दीक्षांत समारोह में अलग-अलग डिपार्टमेंट के 283 छात्रों को गोल्ड मेडल द‍िए जाएंगे, जबकि 149 रिसर्च स्कॉलर को पीएचडी डिग्री दी जाएंगी।

त्रिपुरा के राज्यपाल इंद्र सेना रेड्डी नल्लू, मुख्यमंत्री माणिक साहा और विश्वविद्यालय के कुलाधिपति अहमद जावेद भी समारोह को संबोध‍ित करेंगे।

इससे पहले, विश्वविद्यालय के कार्यवाहक कुलपति श्यामल दास और कार्यवाहक कुलसचिव समीर कुमार शील ने यहां लोक भवन में राज्‍यपाल के साथ बैठक कर समारोह की तैयार‍ियों को लेकर चर्चा की।

त्रिपुरा विश्वविद्यालय की स्थापना अक्टूबर 1987 में हुई थी, और संसद द्वारा पारित त्रिपुरा विश्वविद्यालय अधिनियम, 2006 के तहत 2 जुलाई 2007 को इसे केंद्रीय विश्वविद्यालय में परिवर्तित किया गया।

विश्वविद्यालय के अधिकारी ने बताया कि बड़ी संख्या में कॉलेज त्रिपुरा विश्वविद्यालय से संबद्ध हैं और वर्तमान में संबद्ध कॉलेजों की संख्या 64 है।

इस बीच, शिक्षा मंत्रालय पूरे चयन प्रक्रिया को शीघ्र पूरा कर नए कुलपति की नियुक्ति करने का लक्ष्य रख रहा है।

हालांकि, चयन प्रक्र‍िया के बीच, त्रिपुरा विश्वविद्यालय पर‍िसर में एक ज़ोरदार मांग उठी है, जिसमें टीचर, नॉन-टीचिंग स्टाफ, स्टूडेंट्स और एकेडमिक सर्कल के सदस्यों ने मिनिस्ट्री से अगले वाइस-चांसलर के तौर पर एक असली, अनुभवी और इंडिपेंडेंट एडमिनिस्ट्रेटर को अपॉइंट करने का न‍िवेदन क‍िया।

बढ़ती उम्मीदों के बीच अब सभी की नजर शिक्षा मंत्रालय के अंतिम निर्णय पर टिकी है, जिसे विश्वविद्यालय में शैक्षणिक उत्कृष्टता की बहाली और प्रशासनिक स्थिरता सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मोड़ के रूप में देखा जा रहा है।


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