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त्रिपुरा: अगरतला एयरपोर्ट पर सीआईएसएफ जवानों को ड्रोन सुरक्षा का प्रशिक्षण

त्रिपुरा की राजधानी अगरतला स्थित महाराजा बीर बिक्रम (एमबीबी) हवाई अड्डे पर असम राइफल्स ने केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) के जवानों के लिए ड्रोन संचालन और उभरते हवाई खतरों से निपटने को लेकर विशेष जागरूकता एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया

त्रिपुरा: अगरतला एयरपोर्ट पर सीआईएसएफ जवानों को ड्रोन सुरक्षा का प्रशिक्षण
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अगरतला। त्रिपुरा की राजधानी अगरतला स्थित महाराजा बीर बिक्रम (एमबीबी) हवाई अड्डे पर असम राइफल्स ने केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) के जवानों के लिए ड्रोन संचालन और उभरते हवाई खतरों से निपटने को लेकर विशेष जागरूकता एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया। इस दौरान जवानों को ड्रोन की पहचान, निगरानी और संभावित खतरों से निपटने के आधुनिक तरीकों की जानकारी दी गई।

रक्षा प्रवक्ता के अनुसार, इस प्रशिक्षण का उद्देश्य सीआईएसएफ कर्मियों को वर्तमान सुरक्षा चुनौतियों से अवगत कराना और समय रहते ड्रोन संबंधी खतरों का पता लगाने, त्वरित प्रतिक्रिया देने तथा समन्वित कार्रवाई करने के लिए तैयार करना था।

कार्यक्रम के दौरान ड्रोन की पहचान, उनकी निगरानी, निष्क्रिय करने की तकनीक, सुरक्षित इंटरसेप्शन प्रक्रिया, ड्रोन संचालन से जुड़े कानूनी प्रावधान और हवाई अड्डों जैसे महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों की सुरक्षा के उपायों पर विस्तार से चर्चा की गई।

प्रशिक्षण में असम राइफल्स, सीआईएसएफ, एयरपोर्ट प्राधिकरण और अन्य संबंधित एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया। अधिकारियों ने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सभी एजेंसियों के बीच तालमेल और सतर्कता बेहद जरूरी है।

रक्षा प्रवक्ता ने बताया कि वरिष्ठ अधिकारियों और सीआईएसएफ जवानों ने इस पहल की सराहना करते हुए इसे सुरक्षा तैयारियों को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।

इससे पहले भी असम राइफल्स ने सीआईएसएफ के साथ मिलकर एमबीबी एयरपोर्ट पर बहु-एजेंसी सुरक्षा अभ्यास आयोजित किया था। इस संयुक्त अभ्यास का उद्देश्य विभिन्न सुरक्षा एजेंसियों के बीच समन्वय बढ़ाना और महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों की सुरक्षा के लिए उनकी परिचालन क्षमता को मजबूत करना था।

अभ्यास के दौरान असम राइफल्स के विशेषज्ञों ने सुरक्षा ड्रिल, आपातकालीन प्रतिक्रिया प्रणाली और संयुक्त कार्रवाई की रणनीतियों का प्रदर्शन किया। साथ ही विभिन्न एजेंसियों के कर्मियों ने संयुक्त अभ्यास के जरिए संभावित सुरक्षा चुनौतियों से निपटने की तैयारियों को और बेहतर बनाया।

रक्षा अधिकारियों के अनुसार, नागरिक और सुरक्षा क्षेत्रों में ड्रोन के बढ़ते उपयोग को देखते हुए ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम समय की जरूरत हैं। इनमें सीआईएसएफ कर्मियों को विभिन्न प्रकार के ड्रोन, उनकी क्षमताओं, दुरुपयोग से जुड़े सुरक्षा जोखिमों तथा ड्रोन संबंधी घटनाओं से निपटने के लिए मानक संचालन प्रक्रियाओं (एसओपी) की जानकारी दी गई।

असम राइफल्स ने हाल ही में नागालैंड के पेरेन जिले के जालुकी स्थित ड्रोन ट्रेनिंग नोड पर भारतीय सेना की स्पीयर कोर के तहत दो दिवसीय ड्रोन अभ्यास भी आयोजित किया था। इसका उद्देश्य निगरानी क्षमता बढ़ाना, तकनीकी दक्षता विकसित करना और विभिन्न सुरक्षा एजेंसियों के बीच समन्वय को मजबूत करना था।

अधिकारियों का कहना है कि इस तरह के संयुक्त प्रशिक्षण कार्यक्रम सुरक्षा बलों की परिचालन दक्षता बढ़ाने और महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों की सुरक्षा को और मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभा रहे हैं।


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