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मणिपुर संकट पर पूर्वोत्तर छात्र संगठन ने मांगा त्वरित हस्तक्षेप, संवाद से समाधान पर जोर

पूर्वोत्तर के प्रमुख छात्र संगठनों के शीर्ष निकाय नॉर्थ ईस्ट स्टूडेंट्स ऑर्गेनाइजेशन (एनईएसओ) ने मणिपुर में लंबे समय से जारी जातीय हिंसा और संकट को लेकर राज्य तथा केंद्र सरकार की भूमिका पर सवाल उठाए हैं

मणिपुर संकट पर पूर्वोत्तर छात्र संगठन ने मांगा त्वरित हस्तक्षेप, संवाद से समाधान पर जोर
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अगरतला। पूर्वोत्तर के प्रमुख छात्र संगठनों के शीर्ष निकाय नॉर्थ ईस्ट स्टूडेंट्स ऑर्गेनाइजेशन (एनईएसओ) ने मणिपुर में लंबे समय से जारी जातीय हिंसा और संकट को लेकर राज्य तथा केंद्र सरकार की भूमिका पर सवाल उठाए हैं। संगठन ने कहा है कि वर्षों से जारी इस संकट को समाप्त करने और शांति बहाल करने में सरकारें प्रभावी हस्तक्षेप करने में विफल रही हैं।

एनईएसओ के अध्यक्ष सैमुअल बी. जिरवा ने सोमवार को कहा कि मणिपुर में शांति और सामान्य स्थिति बहाल करने में लगातार विफलता शासन व्यवस्था और जिम्मेदारी में गंभीर कमी को दर्शाती है। उन्होंने कहा कि संगठन बिना किसी शर्त के तत्काल, निष्पक्ष और पारदर्शी हस्तक्षेप की मांग करता है, ताकि हिंसा को और बढ़ने से रोका जा सके।

जिरवा ने कहा कि न्याय में देरी नहीं होनी चाहिए और इस तरह के जघन्य कृत्यों के जिम्मेदार लोगों की पहचान कर उन्हें कानून के तहत जवाबदेह बनाया जाए तथा उनके खिलाफ कार्रवाई की जाए। इससे जनता का विश्वास बहाल होगा और कानून का राज कायम रहेगा।

एनईएसओ ने सभी समुदायों और हितधारकों से संयम बरतने, मानवता के मूल्यों को बनाए रखने और शांति के रास्ते पर चलने की अपील की है। संगठन ने एक बयान में कहा कि निहत्थे नागरिकों के खिलाफ बार-बार होने वाली हिंसा गंभीर मानवीय चिंता का विषय है, जो मानव गरिमा, सुरक्षा और शांति से जीने के मूल अधिकार पर सीधा हमला है।

संगठन ने कहा कि लगातार जारी अशांति के कारण अनगिनत परिवारों और समुदायों को अपार पीड़ा झेलनी पड़ी है। इससे शोक, भय और अनिश्चितता का माहौल पैदा हुआ है।

एनईएसओ अध्यक्ष ने कहा कि संगठन इस लंबे संघर्ष में अपने प्रियजनों को खोने वाले परिवारों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करता है और हर पीड़ित के साथ मजबूती से खड़ा है। उन्होंने कहा कि मणिपुर के लोगों का दर्द पूरे पूर्वोत्तर क्षेत्र का साझा दर्द है।

एनईएसओ ने जोर देकर कहा कि हिंसा कभी समाधान नहीं हो सकती। केवल संवाद, आपसी सम्मान और मूल समस्याओं के समाधान के प्रयास ही स्थायी शांति का रास्ता खोल सकते हैं।

जिरवा ने बताया कि एनईएसओ और उसके घटक संगठनों ने पहले भी शांति मिशन चलाकर विभिन्न पक्षों के बीच समझ बढ़ाने और सौहार्दपूर्ण समाधान खोजने का प्रयास किया है। संगठन ने क्षेत्र में शांति, सद्भाव और स्थिरता के हित में ऐसे प्रयास आगे भी जारी रखने की प्रतिबद्धता दोहराई।

उन्होंने कहा कि मणिपुर में शांति की बहाली केवल क्षेत्रीय आवश्यकता नहीं, बल्कि नैतिक जिम्मेदारी भी है। अब समय आ गया है कि संबंधित सभी प्राधिकरण तात्कालिकता, ईमानदारी और जवाबदेही के साथ कार्रवाई करें।

इस बीच, अगरतला में टिपरा मोथा पार्टी (टीएमपी) के प्रमुख प्रद्योत बिक्रम माणिक्य देबबर्मा ने कहा कि मणिपुर में जातीय हिंसा के लिए कुछ राजनेता जिम्मेदार हैं।

पूर्व शाही परिवार से जुड़े देबबर्मा ने कहा कि मैतेई, नागा और कुकी-जो समुदायों के लोगों को एक साथ आकर बातचीत करनी चाहिए, ताकि मतभेद दूर हों और स्थायी शांति व सद्भाव स्थापित हो सके।

उन्होंने कहा कि एक-दूसरे के खिलाफ शत्रुता रखने से समस्या का समाधान नहीं होगा और लगातार हिंसा राज्य के भविष्य को ही बर्बाद करेगी। उन्होंने यह भी बताया कि वह पहले मणिपुर का दौरा कर चुके हैं और विभिन्न समुदायों के प्रतिनिधियों से मुलाकात कर चुके हैं।


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