एमएनएफ का आरोप- जेडपीएम सरकार लेंगपुई भूमि घोटाले को दबाने में जुटी
मिजो नेशनल फ्रंट (एमएनएफ) ने सत्ताधारी जोरम पीपुल्स मूवमेंट (जेडपीएम) सरकार पर आरोप लगाया कि वह लेंगपुई में हुये कथित भूमि घोटाले को केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) को सौंपने की अपनी ही घोषणा पर कार्रवाई करने में विफल रही है

187 करोड़ का मामला, सीबीआई जांच में देरी पर विपक्ष का हमला
- ‘सरकार जानबूझकर निष्क्रिय’, एमएनएफ ने कहा- सीबीआई को पत्र भेजे बिना प्रक्रिया अधूरी
- आरटीआई दस्तावेजों से मंत्री के बयान का खंडन, विपक्ष ने उठाए सवाल
- सूचना छिपाने का आरोप, एमएनएफ बोला- पारदर्शिता और जवाबदेही पर संकट
आइजोल। मिजो नेशनल फ्रंट (एमएनएफ) ने शुक्रवार को सत्ताधारी जोरम पीपुल्स मूवमेंट (जेडपीएम) सरकार पर आरोप लगाया कि वह लेंगपुई में हुये कथित भूमि घोटाले को केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) को सौंपने की अपनी ही घोषणा पर कार्रवाई करने में विफल रही है।
एमएनएफ ने यह भी आरोप लगाया कि 187.90 करोड़ रुपये से अधिक के इस मामले को "रफा-दफा" करने का प्रयास कर रही है।
एमएनएफ कानूनी बोर्ड के उपाध्यक्ष लालपियानफेला च्वंगथु ने मीडिया को संबोधित करते हुए कहा कि राज्य सतर्कता विभाग ने 23 फरवरी को सीबीआई जांच के लिये सहमति देते हुये एक अधिसूचना जारी की थी, लेकिन सरकार ने औपचारिक रूप से जांच का अनुरोध करने के लिये अगला महत्वपूर्ण कदम नहीं उठाया है।
श्री च्वंगथु ने सरकार पर जानबूझकर निष्क्रियता का आरोप लगाते हुये कहा, "राज्य सरकार को सीबीआई निदेशक को आधिकारिक पत्र के साथ अधिसूचना भेजनी चाहिये और एजेंसी से जांच शुरू करने का अनुरोध करना चाहिये। इसके बिना यह प्रक्रिया अधूरी रहती है।"
यह विवाद आइजोल जिले के लेंगपुई में निजी भूमि के अधिग्रहण पर केंद्रित है, जिसे विपक्ष ने बार-बार सार्वजनिक धन से जुड़ी एक बड़ी अनियमितता बताया है। श्री च्वंगथु ने भू-राजस्व और बंदोबस्त मंत्री बी. लालछनज़ोवा पर राज्य विधानसभा में भ्रामक जानकारी देने का भी आरोप लगाया। बताया जाता है कि मंत्री ने कहा था कि पहलगाम और सिंदूर से संबंधित मुद्दों के कारण भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया में तेजी लायी गयी थी।
हालाँकि, श्री च्वंगथु ने दावा किया कि सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत प्राप्त दस्तावेज इस दावे का समर्थन नहीं करते हैं। उन्होंने कहा, "आरटीआई के माध्यम से प्राप्त आधिकारिक फाइल की नोट शीट में पहलगाम या सिंदूर का कोई संदर्भ नहीं है। यह स्पष्ट रूप से विधानसभा में मंत्री के बयान का खंडन करता है।"
एमएनएफ नेता ने आगे कहा कि विपक्ष इस मामले को जारी रखेगा और उन्होंने इस ओर इशारा किया कि कथित भूमि घोटाले पर एक निजी सदस्य प्रस्ताव पहले ही राज्य विधानमंडल द्वारा अपनाया जा चुका है। उन्होंने कहा, "हम इस मुद्दे को इसके तार्किक निष्कर्ष तक ले जायेंगे।"
इसके अतिरिक्त एमएनएफ ने जेडपीएम सरकार पर सूचना का अधिकार अधिनियम की भावना को कमजोर करने का आरोप लगाया। श्री च्वंगथु ने आरोप लगाया कि आरटीआई के सवालों के जवाबों में देरी की जा रही है और अक्सर पूरी या सटीक जानकारी छिपाई जाती है।
श्री च्वंगथु ने कहा, "यह एक बढ़ते हुये पैटर्न को दर्शाता है जहां पारदर्शिता के साथ समझौता किया जा रहा है और सत्ता में बैठे लोगों के इशारे पर सूचनाओं को नियंत्रित किया जा रहा है।" उन्होंने आगे कहा कि ऐसी प्रथाएं शासन में जवाबदेही को कमजोर करती हैं। राज्य सरकार ने अभी तक इन ताज़ा आरोपों पर कोई विस्तृत प्रतिक्रिया जारी नहीं की है।


