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मणिपुर के जिरीबाम में एकजुटता का संदेश, सीएम खेमचंद बोले-भरोसा बहाल करना प्राथमिकता

मणिपुर के मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह ने कहा कि जिरीबाम ने मणिपुर का पहला ऐसा जिला बनकर इतिहास रच दिया है, जहां तीन साल की अशांति के बाद शांति बहाल करने के लिए सभी समुदाय एक साथ बैठे हैं

मणिपुर के जिरीबाम में एकजुटता का संदेश, सीएम खेमचंद बोले-भरोसा बहाल करना प्राथमिकता
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इंफाल। मणिपुर के मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह ने शनिवार को कहा कि जिरीबाम ने मणिपुर का पहला ऐसा जिला बनकर इतिहास रच दिया है, जहां तीन साल की अशांति के बाद शांति बहाल करने के लिए सभी समुदाय एक साथ बैठे हैं।

यहां जिरीबाम के विद्यानगर में स्थित न्यू अलीपुर रोंगमेई नागा गांव में आयोजित एक 'सामुदायिक संवाद कार्यक्रम' के दौरान लोगों को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार के सत्ता में दो महीने पूरे होने पर उन्होंने दूसरी बार जिरीबाम का दौरा करने का फैसला किया क्योंकि अलग-अलग समुदायों के लोग एक मंच पर एक साथ बैठने के लिए सहमत हो गए हैं। उन्होंने कहा कि जिरीबाम के लोग राज्य में सबसे ज्‍यादा खुले विचारों वाले हैं।

कार्यक्रम के दौरान खेमचंद ने मैतेई समुदाय, कुकी, पाइते और हमार जनजातियों से संबंधित आंतरिक रूप से विस्थापित व्यक्तियों (आईडीपी) के साथ बातचीत की। वे भीड़ में घुलमिल गए और उनकी शिकायतें सुनीं। एक मैतेई महिला आईडीपी ने उन्हें घर लौटने के डर के बारे में बताया जबकि एक युवा हमार आदिवासी लड़की ने पिछड़े इलाकों के लोगों के लिए सरकारी नौकरी पाने में आने वाली कठिनाइयों के बारे में बताया।

खेमचंद ने आईडीपी से कहा कि इस कार्यक्रम का उद्देश्य भरोसे की कमी को दूर करना है और उन्होंने एक कहानी सुनाई जब वे मंत्री थे और उन्होंने ग्रामीण विकास विभाग में सबसे पारदर्शी भर्ती परीक्षा के माध्यम से 74 कर्मचारियों की भर्ती की थी।

कुकी गांव के नेता ने मुख्यमंत्री से कहा कि वह घर वापसी के लिए तैयार है, क्योंकि उसे अपनी सरकार पर भरोसा है और उसने जिरीबाम में बहुसंख्यक मैतेई समुदाय को खुले विचारों वाला बताया। एक पाइते गांव के निवासी ने उनसे शांति स्थापित करने के उपायों को जारी रखने का आग्रह किया और कहा कि जिरीबाम के स्थानीय मैतेई नेता शांति प्रक्रिया में मदद कर रहे हैं।

खेमचंद ने कहा कि उनकी सरकार आईडीपी हरसंभव मदद करने की पूरी कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा, “हो सकता है कि मैं आपकी सभी इच्छाएं पूरी न कर पाऊं लेकिन मैं जिस भी तरह से हो सकेगा, आप सभी की मदद करता रहूंगा। हर कोई हमेशा घर वापसी चाहता था, और हमारी सरकार आईडीपी के लिए नए घर बनाने में मदद करने के लिए हर संभव प्रयास कर रही है।”

सीएम शनिवार को सड़क मार्ग से राष्ट्रीय राजमार्ग 37 होते हुए दक्षिण असम की सीमा से सटे जिरीबाम जिले की यात्रा पर निकले। उन्होंने छह घंटे में 220 किलोमीटर से ज्‍यादा की दूरी तय की।

मुख्यमंत्री ने निंगशिंगखुल स्थित जिरीबाम जिला अस्पताल का भी दौरा किया और अस्पताल में उपलब्ध सुविधाओं का जायजा लिया। अस्पताल में उन्होंने कहा कि कई विशेषज्ञ डॉक्टर जिरीबाम में तैनात होने से कतराते हैं। स्वास्थ्य क्षेत्र को सुव्यवस्थित और बेहतर बनाने की जरूरत पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य पेशेवरों के लिए एक तबादला नीति को पारदर्शी तरीके से अपनाया जाना चाहिए। उन्होंने जिरीबाम जिला अस्पताल को हरसंभव मदद का आश्वासन दिया।


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