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मेघालय की मातृसत्तात्मक व्यवस्था टिकाऊ खेती के लिए दुनिया को सबक दे सकती है : सीएम संगमा

मेघालय के मुख्यमंत्री कॉनराड के. संगमा ने कहा कि राज्य की अनोखी मातृसत्तात्मक व्यवस्था, जिसमें महिलाएं जमीन और खेती की देखरेख करती हैं

मेघालय की मातृसत्तात्मक व्यवस्था टिकाऊ खेती के लिए दुनिया को सबक दे सकती है : सीएम संगमा
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शिलांग। मेघालय के मुख्यमंत्री कॉनराड के. संगमा ने शुक्रवार को कहा कि राज्य की अनोखी मातृसत्तात्मक व्यवस्था, जिसमें महिलाएं जमीन और खेती की देखरेख करती हैं, टिकाऊ खेती को बढ़ावा देने और खाद्य सुरक्षा को मजबूत करने के मामले में दुनिया के लिए अहम सबक देती है।

यहां स्टेट कन्वेंशन हॉल में महिला किसानों और टिकाऊ जैविक खेती पर आयोजित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन को संबोधित करते हुए संगमा ने कहा कि मेघालय की खेती-बाड़ी में महिलाओं की अहम भूमिका है और जमीन पर उनके मालिकाना हक ने खेती के तरीकों में जिम्मेदारी, प्रतिबद्धता और टिकाऊपन की मजबूत भावना को बढ़ावा दिया है।

उन्होंने कहा कि राज्य के गवर्नेंस मॉडल ने पिछले आठ वर्षों में किसानों, खासकर महिलाओं को अपने विकास एजेंडे के केंद्र में रखा है। सरकार ने एक मजबूत और टिकाऊ कृषि इकोसिस्टम बनाने के मकसद से किसान-केंद्रित नीतियां लागू की हैं।

संगमा ने कहा कि मेघालय ने दूसरी जगहों के मॉडल की नकल करने के बजाय अपनी भौगोलिक, सांस्कृतिक और पारिस्थितिक खूबियों के अनुकूल विकास रणनीतियां अपनाई हैं।

उनके मुताबिक, सामुदायिक संस्थाओं को मजबूत करना मुख्य प्राथमिकता रही है। स्वयं-सहायता समूहों और किसान उत्पादक संगठनों में हुई उल्लेखनीय वृद्धि ने सामूहिक प्रयासों, बाजार तक पहुंच और ग्रामीण आजीविका को बेहतर बनाने में मदद की है।

मुख्यमंत्री ने जोर दिया कि आधुनिक वैज्ञानिक नवाचारों के साथ-साथ पूर्वोत्तर के पारंपरिक कृषि ज्ञान और खेती के तरीकों को भी संरक्षित और प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। इस क्षेत्र के पास एक समृद्ध प्राकृतिक विरासत है जिसने पीढ़ियों से समुदायों को बनाए रखा है। उन्होंने पारिस्थितिक संतुलन से समझौता किए बिना उत्पादकता बढ़ाने के लिए पारंपरिक ज्ञान को तकनीक के साथ जोड़ने का आह्वान किया।

संगमा ने कहा कि पूर्वोत्तर को ऐसे एकीकृत क्षेत्र के रूप में देखा जाना चाहिए, जिसकी पारिस्थितिक और सांस्कृतिक विशेषताएं साझा हैं। इस तरह के दृष्टिकोण से सरकारों और हितधारकों को सफल पहलों को बड़े पैमाने पर लागू करने, अधिक निवेश आकर्षित करने और टिकाऊ जैविक खेती में मजबूत वैश्विक प्रभाव पैदा करने में मदद मिलेगी।

उन्होंने संसाधनों को जुटाने, नवाचार को प्रोत्साहित करने और जैविक खेती की पहलों की पहुंच बढ़ाने के लिए संस्थानों, विकास एजेंसियों और निजी क्षेत्र के साथ साझेदारी बनाने के महत्व पर भी जोर दिया, साथ ही यह सुनिश्चित किया कि किसानों के हितों की रक्षा हो।

कृषि और किसान कल्याण विभाग द्वारा आईएफओएएम, ऑर्गेनिक्स एशिया के सहयोग से आयोजित इस सम्मेलन में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधि, नीति-निर्माता, विशेषज्ञ और हितधारक एक साथ आए। उन्होंने महिलाओं के नेतृत्व वाली खेती को मजबूत करने, प्राकृतिक विरासत को संरक्षित करने और बेहतर सहयोग व ज्ञान साझा करने के माध्यम से टिकाऊ जैविक खेती के तरीकों को आगे बढ़ाने पर विचार-विमर्श किया।


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