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मणिपुर: तमेंगलोंग में शहद उत्पादन बढ़ाने की पहल, 100 से अधिक किसानों को प्रशिक्षण

मणिपुर के तमेंगलोंग जिला को राज्य का प्रमुख शहद उत्पादक बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया जा रहा है

मणिपुर: तमेंगलोंग में शहद उत्पादन बढ़ाने की पहल, 100 से अधिक किसानों को प्रशिक्षण
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इम्फाल। मणिपुर के तमेंगलोंग जिला को राज्य का प्रमुख शहद उत्पादक बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया जा रहा है। प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना (पीएमडीडीकेवाई) के तहत यहां 100 से अधिक किसानों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है और आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराए जा रहे हैं।

तमेंगलोंग देश के उन 100 जिलों में शामिल है, जिन्हें इस योजना के तहत चुना गया है। इसे आकांक्षी कृषि जिलों (आकांक्षी कृषि ज़िले) के मॉडल पर विकसित किया जा रहा है।

पहले चरण में वैज्ञानिक मधुमक्खी पालन और प्रजनन तकनीकों को अपनाया गया है। इसके तहत 100 से अधिक किसानों को प्रशिक्षित कर उनकी मधुमक्खी कॉलोनियों (बीहाइव्स) की संख्या बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है। इस पहल का उद्देश्य मधुमक्खियों के स्वास्थ्य, उत्पादकता और स्थिरता को बेहतर बनाना है।

जिला प्रशासन ने इस कार्यक्रम को बज़वर्दी वेंचर प्राइवेट लिमिटेड (अंबरनाथ) के सहयोग से शुरू किया है। इस दौरान नोडल अधिकारी नियमित रूप से क्षेत्रीय दौरे कर प्रगति की समीक्षा भी कर रहे हैं।

तमेंगलोंग को आकांक्षी जिला घोषित किया गया है और सीएसआर पहल के तहत 100 किसानों को मधुमक्खी पालन के लिए पर्याप्त वित्तीय सहायता दी जा रही है। अब तक लगभग 500 बॉक्स (बीहाइव्स) जिले में पहुंच चुके हैं और प्रशिक्षण शुरू हो चुका है। हर महीने 1000 लीटर शहद उत्पादन का लक्ष्य तय किया गया है।

पहले चरण में चयनित किसानों को 8000 रुपये तक के मधुमक्खी पालन उपकरण, जिसमें बीहाइव्स भी शामिल हैं, उपलब्ध कराए जाएंगे।

कंपनी के मुख्य परिचालन अधिकारी वैभव त्रिमुखे के अनुसार, वैज्ञानिक मधुमक्खी पालन पारंपरिक तरीकों से आधुनिक तकनीकों की ओर बदलाव लाएगा, जिससे किसानों की उत्पादन क्षमता और आय दोनों में वृद्धि होगी।

गौरतलब है कि मणिपुर का तमेंगलोंग जिला ही पीएमडीडीकेवाई के तहत 100 आकांक्षी कृषि जिलों की सूची में शामिल किया गया है। इस योजना को जुलाई 2025 में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने मंजूरी दी थी और यह 2025-26 से छह वर्षों तक लागू रहेगी।

योजना के तहत जिलों का चयन कम उत्पादकता, कम फसल तीव्रता और कम ऋण वितरण जैसे मानकों के आधार पर किया गया है। इस पहल का उद्देश्य देश में शहद उत्पादन को बढ़ावा देना है। पिछले एक दशक में भारत में शहद उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है और निर्यात 1500 करोड़ रुपये से अधिक हो चुका है।

यह योजना नीति आयोग के आकांक्षी जिला कार्यक्रम से प्रेरित है और कृषि एवं संबद्ध क्षेत्रों पर केंद्रित अपनी तरह की पहली पहल मानी जा रही है।


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