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मणिपुर में हिंसा के बीच कूकी-जो संगठन ने पीएम मोदी से की हस्तक्षेप की मांग

मणिपुर में जारी जातीय हिंसा और तनाव के बीच कुकी-जो समुदाय के सबसे बड़े संगठन 'कुकी-जो काउंसिल' ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से हस्तक्षेप की मांग की

मणिपुर में हिंसा के बीच कूकी-जो संगठन ने पीएम मोदी से की हस्तक्षेप की मांग
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इंफाल। मणिपुर में जारी जातीय हिंसा और तनाव के बीच कुकी-जो समुदाय के सबसे बड़े संगठन 'कुकी-जो काउंसिल' ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से हस्तक्षेप की मांग की। संगठन ने कहा कि राज्य में हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं और समुदाय के लोगों की सुरक्षा, अस्तित्व और सम्मान खतरे में है। ऐसे में केंद्र सरकार को जल्द ठोस कदम उठाने चाहिए।

कुकी-जो काउंसिल के अध्यक्ष हेनलियनथांग थांगलेट और महासचिव थांगजामांग ने संयुक्त रूप से प्रधानमंत्री को ज्ञापन सौंपा। इस ज्ञापन में आठ प्रमुख मांगें रखी गई हैं। इनमें सबसे बड़ी मांग मणिपुर के मौजूदा प्रशासनिक ढांचे से अलग एक स्वतंत्र प्रशासनिक व्यवस्था या फिर कुकी-जो समुदाय के लिए अलग केंद्र शासित प्रदेश बनाने की है।

ज्ञापन में कहा गया कि मणिपुर में जारी हिंसा ने मैतेई, नागा और कुकी-जो समुदायों के बीच रिश्तों को गहरी चोट पहुंचाई है। लंबे समय से चल रही हिंसा, हत्याएं, विस्थापन और संपत्तियों के नुकसान ने हालात इतने खराब कर दिए हैं कि मौजूदा व्यवस्था के तहत शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व अब बेहद मुश्किल होता जा रहा है।

काउंसिल ने कहा कि मणिपुर संकट का स्थायी और शांतिपूर्ण समाधान तभी संभव है, जब तीनों प्रमुख समुदायों (मैतेई, नागा और कुकी-जो) के लिए अलग-अलग प्रशासनिक व्यवस्था बनाई जाए। संगठन का दावा है कि कुकी-जो समुदाय कई तरफ से अस्तित्व के संकट का सामना कर रहा है और अपनी सुरक्षा व संरक्षण के लिए मौजूदा प्रशासनिक ढांचे से अलग होना अब मजबूरी बन चुका है।

ज्ञापन में यह भी बताया गया कि कुकी-जो समुदाय पहले ही विधानसभा वाले अलग केंद्र शासित प्रदेश की मांग कर चुका है। इस मुद्दे पर 'सस्पेंशन ऑफ ऑपरेशन' समझौते के तहत शामिल संगठनों और गृह मंत्रालय के बीच बातचीत भी जारी है।

काउंसिल ने अन्य मांगों में कुकी-जो इलाकों में हेलीकॉप्टर सेवा शुरू करने, जरूरी सामानों की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने, संवेदनशील जिलों की सीमाओं पर पर्याप्त सुरक्षा बल तैनात करने और छात्रों के परीक्षा केंद्र सुरक्षित जगहों पर स्थानांतरित करने की मांग भी की है। यही ज्ञापन केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को भी सौंपा गया है।

इधर, कुकी स्टूडेंट्स ऑर्गेनाइजेशन ने भी प्रधानमंत्री को अलग ज्ञापन भेजकर 14 अपहृत कुकी-जो ग्रामीणों की तत्काल रिहाई की मांग की है। संगठन ने एनएससीएन-आईएम के साथ हुए युद्धविराम समझौते को खत्म करने की भी मांग उठाई है।

संगठन ने 13 मई को कांगपोकपी जिले में तीन चर्च नेताओं की हत्या की जांच एनआईए या सीबीआई से कराने की मांग की है। साथ ही हिंसा प्रभावित लोगों के पुनर्वास, मुआवजे और लंबी अवधि की सुरक्षा गारंटी देने की भी अपील की गई है।

वहीं, वर्ल्ड बैपटिस्ट अलायंस, एशिया पैसिफिक बैपटिस्ट फेडरेशन, काउंसिल फॉर बैपटिस्ट चर्चेज इन नॉर्थ ईस्ट इंडिया और मणिपुर बैपटिस्ट कन्वेंशन ने भी यूनाइटेड नगा काउंसिल और कुकी इनपी मणिपुर से अपील की है कि विभिन्न समूहों द्वारा बंधक बनाए गए लोगों को सुरक्षित रिहा कराया जाए।

पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, 13 मई को चर्च नेताओं की हत्या और चार अन्य लोगों के घायल होने के बाद कांगपोकपी और सेनापति जिलों में कुकी और नागा समुदाय के 40 से ज्यादा लोगों को अलग-अलग समूहों ने बंधक बना लिया था। हालांकि प्रशासन, सामुदायिक नेताओं और सामाजिक संगठनों की लगातार कोशिशों के बाद 14 और 15 मई को दोनों समुदायों के 30 लोगों को सुरक्षित रिहा करा लिया गया।


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