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आफस्पा को मणिपुर, नागालैंड और अरुणाचल प्रदेश के कई इलाकों में छह महीने के लिए बढ़ाया गया

केंद्र सरकार ने मणिपुर, नागालैंड और अरुणाचल प्रदेश के कई क्षेत्रों में सशस्त्र बल (विशेष अधिकार) अधिनियम (आफस्पा) को अगले छह महीने के लिए बढ़ा दिया है। गृह मंत्रालय (एमएचए) की ओर से जारी तीन अलग-अलग अधिसूचनाओं के अनुसार यह फैसला 1 अक्टूबर 2026 से लागू होगा।

आफस्पा को मणिपुर, नागालैंड और अरुणाचल प्रदेश के कई इलाकों में छह महीने के लिए बढ़ाया गया
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इंफाल। केंद्र सरकार ने मणिपुर, नागालैंड और अरुणाचल प्रदेश के कई क्षेत्रों में सशस्त्र बल (विशेष अधिकार) अधिनियम (आफस्पा) को अगले छह महीने के लिए बढ़ा दिया है। गृह मंत्रालय (एमएचए) की ओर से जारी तीन अलग-अलग अधिसूचनाओं के अनुसार यह फैसला 1 अक्टूबर 2026 से लागू होगा।

गृह मंत्रालय ने मणिपुर में इम्फाल घाटी के पांच जिलों के 13 पुलिस थाना क्षेत्रों को छोड़कर पूरे राज्य को अगले छह महीने के लिए ‘अशांत क्षेत्र’ घोषित किया है। जिन जिलों के कुछ थाना क्षेत्रों को आफस्पा से बाहर रखा गया है, उनमें इम्फाल पश्चिम, इम्फाल पूर्व, थौबल, बिष्णुपुर और काकचिंग शामिल हैं।

मंत्रालय ने बताया कि राज्य की कानून-व्यवस्था की समीक्षा के बाद आफस्पा की अवधि बढ़ाने का फैसला लिया गया। मणिपुर में 3 मई 2023 से मैतेई और कुकी-जो-ह्मार समुदायों के बीच जातीय हिंसा में 260 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है। फरवरी 2025 में राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू किया गया था, जिसे इस वर्ष मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह के पदभार संभालने के बाद हटा लिया गया।

नागालैंड में आफस्पा को नौ जिलों—दीमापुर, निउलैंड, चुमौकेडिमा, मोन, किफिरे, नोकलाक, फेक, पेरेन और मेलुरी—में छह महीने के लिए बढ़ाया गया है। इसके अलावा कोहिमा, मोकोकचुंग, लोंगलेंग, वोखा और जुन्हेबोटो जिलों के 21 पुलिस थाना क्षेत्रों को भी ‘अशांत क्षेत्र’ घोषित किया गया है।

अरुणाचल प्रदेश में तिरप, चांगलांग और लोंगडिंग जिलों के साथ-साथ नामसाई जिले के नामसाई, महादेवपुर और चौखाम थाना क्षेत्रों में भी आफस्पा की अवधि 1 अक्टूबर से अगले छह महीने तक बढ़ा दी गई है।

आफस्पा के तहत अधिसूचित अशांत क्षेत्रों में तैनात सुरक्षा बलों को तलाशी लेने, बिना वारंट गिरफ्तारी करने और सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक समझे जाने पर बल प्रयोग करने का विशेष अधिकार मिलता है।

पूर्वोत्तर के कई संगठनों, जिनमें मणिपुर स्टूडेंट्स फेडरेशन (एमएसएफ), नुपी खुनाई-यैरिपोक और मेइरा पाइबिस शामिल हैं, लंबे समय से आफस्पा हटाने की मांग करते रहे हैं।

वहीं, असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा पहले ही बता चुके हैं कि राज्य के कई हिस्सों से आफस्पा हटाया जा चुका है। बेहतर सुरक्षा स्थिति के चलते त्रिपुरा से 2015, मेघालय से 2018 और मिजोरम से 1980 के दशक में आफस्पा हटा लिया गया था।


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