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अधूरे निर्माण के साथ रहने को मजबूर निवेशक

नोएडा ! निवेशकों को एस्योर रिटर्न देने से बचने के लिए बिल्डर निवेशक व उनके परिवार की जान से खेल रहे हैं।

अधूरे निर्माण के साथ रहने को मजबूर निवेशक
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नोएडा ! निवेशकों को एस्योर रिटर्न देने से बचने के लिए बिल्डर निवेशक व उनके परिवार की जान से खेल रहे हैं। भारी असुविधाएं व असुरक्षित माहौल में रहने के लिए निवेशकों को फ्लैट उपलब्ध कराया जा रहा है। ईएमएआई के साथ किराए का भुगतान कर रहे निवेशकों के सामने समस्या है कि वे मजबूरी में ऐसे फ्लैटों में रह रहे हैं, जिन टावर में अभी भी निर्माण कार्य चल रहा है।
निर्माण कार्य चलने के कारण यहां निवेशकों उन सुविधाओं का दस प्रतिशत भी नहीं मिल पा रहा, जिनका वादा बिल्डर की तरफ से किया गया है। एक तरफ बिल्डर जहां निवेशकों की जान से खेल रहे हैं, वहीं नियमों का भी खुलेआम उल्लंघन कर रहे हैं। नियम यह है कि जब तक टावर का कंप्लीशन प्राधिकरण की तरफ से जारी न किया जाए, तब तक वहां लोगों को रहने के लिए फ्लैट पर कब्जा नहीं दिया जाना चाहिए। लेकिन बिल्डर फिट आउट पजेशन के नाम पर निवेशकों को पजेशन दे रहे हैं। जिससे निवेशक भारी परेशानी का सामना कर रहे हैं। निवेशकों को ऐसे प्रोजेक्ट में पजेशन दिए जा रहे हैं, इसमें कई टावर हैं और यहां निर्माण कार्य अभी भी चल रहा है। जिन टावरों में बने फ्लैटों में लोग रह रहे हैं, वहां अभी भी निर्माण कार्य और फिनिशिग का कार्य चल रहा है। ऐसे में नियमत: यहां बिल्डरों को निवेशकों के फ्लैट पर कब्जा नहीं देना चाहिए।
कब्जा अगर दिया भी जाता है, तो वह सिर्फ कागजों में दिया जाए, निवेशक को वहां रहने की चाबी न दी जाए। निवेशक व बिल्डर के बीच में होने वाले एग्रीमेंट की शर्तो के मुताबिक निर्धारित समय में पजेशन न देने पर बिल्डर की तरफ से एस्योर रिटर्न दी जाती है। उससे बचने के लिए कंप्लीशन लिए बिना ही फिट आउट पजेशन के नाम पर निवेशकों को रहने के लिए फ्लैट दिए जा रहे हैं।
निवेशकों की मजबूरी है कि वे ईएमआई के साथ किराए का भुगतान करने के बजाय आधे अधूरे फ्लैट में रहने को तैयार हो रहे हैं, क्योंकि वह भी अपना पैसा बचाना चाहते हैं।


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