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जिला अस्पताल में बर्न यूनिट नहीं, दम तोड़ रहे मरीज

जांजगीर ! एक ओर जहां प्रदेश को देश के अग्रणी राज्यों में तुलना की जाती है। वहीं जिला बने 18 साल पूरा होने के बाद भी स्वास्थ्य सुविधा के नाम पर जिले में कुछ खास हासिल नहीं हो सका है।

जिला अस्पताल में बर्न यूनिट नहीं, दम तोड़ रहे मरीज
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आग से झुलसे गंभीर मरीजों को भी रिफर करना मजबूरी
जांजगीर ! एक ओर जहां प्रदेश को देश के अग्रणी राज्यों में तुलना की जाती है। वहीं जिला बने 18 साल पूरा होने के बाद भी स्वास्थ्य सुविधा के नाम पर जिले में कुछ खास हासिल नहीं हो सका है। आपात कालीन चिकित्सा कक्ष से लेकर ट्रामा सेन्टर, सीटी स्केन, बर्न यूनिट जैसी जरूरी सुविधा जिला अस्पताल को नसीब नहीं हो सका है। विभाग बार-बार पत्राचार कर हार मान चुका है। मगर प्रदेश मुख्यालय में बैठे स्वास्थ्य विभाग के आला अफसरो की नींद नहीं टूट रही है। जिले में जहर खुरानी के बाद सर्वाधिक पीडि़त अग्नि दग्धा के मरीज आते है, मगर इस आपात मरीजों के लिए चिकित्सा सुविधा नहीं होने के चलते इन्हे घण्टो का सफर तय कर अन्य जिले को जाना पड़ता है। इस बीच ज्यादातर मरीज रास्ते में ही दम तोड़ देते है। जबकि समय पर चिकित्सकीय लाभ मिलने से इनके जान बचायी जा सकती है।
स्वास्थ्य विभाग द्वारा संचालित शासकीय अस्पतालों में जिला गठन के 18 साल के बाद भी बर्न यूनिट की व्यवस्था नहीं की गई है। जिले में एक भी अस्पताल में बर्न यूनिट की व्यवस्था अब तक नहीं गई है। यहां आने वाले मरीजों को अन्यत्र रिफर कर दिया जाता है। जिले में हर साल बड़ी संख्या में लोग आगजनी के शिकार होते हैं। औद्योगिक घटनाओं में भी कई लोग बॉयलर आदि में झुलस चुके हैं। जिन्हे बिलासपुर रिफर किये जाने के चलते रास्ते में ही दम तोड़ देने की घटना भी सामने आ चुकी है। ऐसे लोगों का समय पर ईलाज होने से उनकी जान बचाई जा सकती है। जिला अस्पताल होने के कारण ग्रामीण क्षेत्रों के लोग बेहतर ईलाज के लिए पीडि़त मरीज को परिजन यहां ले आते हैं, लेकिन जिला अस्पताल में बर्न यूनिट नहीं होने का हवाला देते हुए उन्हें बिलासपुर सिम्स रिफर कर दिया जाता है। पीडि़त मरीज का समय पर ईलाज न होने के कारण कई मरीजों की मृत्यु अस्पताल में ही हो जाती है। वहीं बिलासपुर व जांजगीर की दूरी अधिक होने के कारण मरीज की मौत रास्ते पर ही हो जाती है। जिले में स्वास्थ्य विभाग द्वारा हर साल विकास कार्य के लिए प्रस्ताव तैयार कर करोड़ो रूपए खर्च कर दिया जाता है, लेकिन जिले में स्वास्थ्य संबंधी सुविधाओं के लिए जनप्रतिनिधि सहित प्रशासन द्वारा ध्यान नहीं दिया जाता। स्वास्थ्य विभाग द्वारा अब तक शासकीय अस्पतालों में बर्न यूनिट की व्यवस्था नहीं की गई। हालांकि पैसे वाले लोग अपने परिजनों का ईलाज बिलासपुर, रायपुर जैसे अन्य शहरों के बड़े अस्पतालों में करा लेते हैं, लेकिन गरीब तबके के लोगों को उपचार के अभाव में जान से हाथ धोना पड़ता है। जिला अस्पताल में अब तक आग में झुलसे कई मरीजों की मौत बर्न यूनिट नहीं होने के अभाव में हो चुकी है। जिला अस्पताल में इस साल अब तक दर्जनभर से अधिक मौतें हो गई है। इस संबंध स्वास्थ्य महकमा का ध्यान आकृष्ट कराये जाने पर जो जानकारी मिलती है, उसके अनुसार अब तक 4 से 5 बार प्रस्ताव बनाकर स्वास्थ्य विभाग को भेजा जा चुका है। ऐसे में राज्य सरकार किस समस्या के चलते इसे स्वीकृति देने से परहेज कर रही है यह समझ से परे है।
चाम्पा में महज नाम का ही बर्न यूनिट
बिसाहू दास महंत शासकीय अस्पताल चांपा में बर्न यूनिट की स्थापना तो की गई है लेकिन वह भी नाम मात्र का है। यहां न तो अलग से कक्ष की व्यवस्था की गई है और ही आवश्यक संसाधन। इसके अलावा बर्न यूनिट स्टाफ की पदस्थापना भी नहीं की गई है। ऐसे में चांपा में ही जले ही मरीजों को जिला अस्पताल रिफर कर दिया जाता है जबकि जिला हॉस्पिटल में भी बर्न यूनिट नहीं है। ऐसे में जले हुए मरीजों को उपचार के लिए अन्य जिलों पर निर्भर रहना पड़ रहा है।


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