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विधानसभा में वीबी-जी राम जी योजना पेश करेगी छत्तीसगढ़ सरकार

छत्तीसगढ़ विधानसभा का पांच दिन का महत्वपूर्ण मॉनसून सत्र सोमवार से शुरू होकर 17 जुलाई को समाप्त होगा।

विधानसभा में वीबी-जी राम जी योजना पेश करेगी छत्तीसगढ़ सरकार
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रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा का पांच दिन का महत्वपूर्ण मॉनसून सत्र सोमवार से शुरू होकर 17 जुलाई को समाप्त होगा।

इन दिनों में कुल पांच बैठकें होनी हैं। उम्मीद है कि इस सत्र में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार के कामकाज पर विपक्ष (कांग्रेस) की ओर से तीखी बहस और कड़ी समीक्षा देखने को मिलेगी।

शुरुआती चार दिन मुख्य रूप से 'प्रश्न काल' और सरकार के जरूरी वित्तीय कामकाज पर केंद्रित होंगे। इससे विधायकों को अलग-अलग प्रशासनिक मामलों पर मंत्रियों से विस्तृत जवाब मांगने का मौका मिलेगा।

उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा सोमवार को राज्य विधानसभा में एक बड़ी ग्रामीण रोजगार योजना पेश करेंगे।

इस योजना का नाम 'विकसित भारत-गारंटी मिशन फॉर एम्प्लॉयमेंट एंड लाइवलीहुड (रूरल) वीबी-जी राम जी स्कीम, छत्तीसगढ़' है।

यह योजना वीबी-जी राम जी एक्ट, 2025 के तहत 25 जून, 2026 को अधिसूचित की गई थी।

विधानसभा सचिवालय को सदस्यों की ओर से 1,033 सवाल पहले ही मिल चुके हैं। ये सवाल कई विभागों से जुड़े हैं और दिखाते हैं कि कार्यवाही के दौरान सदस्यों की भागीदारी का स्तर काफी ऊंचा रहने की उम्मीद है।

सत्र का समापन 17 जुलाई को होगा। आखिरी ढाई घंटे निजी सदस्यों के प्रस्तावों और बिलों के लिए रखे गए हैं, जिससे गैर-सरकारी विधायकों को अहम मुद्दे उठाने और विधायी उपाय सुझाने का मंच मिलेगा।

कांग्रेस ने संकेत दिया है कि वह कई अहम मुद्दों पर सत्ताधारी भाजपा सरकार को जोरदार तरीके से घेरेगी।

शुरुआती चर्चाओं में खेती-किसानी से जुड़ी दिक्कतों का मुद्दा हावी रहने की संभावना है, जिसमें किसानों के लिए बीज और खाद की उपलब्धता पर खास जोर होगा।

अन्य अहम मुद्दों पर भी तीखी बहस होने की उम्मीद है, जिनमें कानून-व्यवस्था, अवैध रेत खनन, बार-बार बिजली कटौती, स्मार्ट बिजली मीटर लागू करना और नकटी गांव में बुलडोजर वाली विवादास्पद कार्रवाई शामिल हैं।

राजनीतिक जानकारों को तीखी बहस की उम्मीद है, क्योंकि कांग्रेस प्रशासन की कमियों को उजागर करने की कोशिश करेगी, जबकि भाजपा सरकार अपनी उपलब्धियों को दिखाने और अपनी नीतियों का बचाव करने पर ध्यान देगी।

यह सत्र ऐसे अहम समय पर हो रहा है जब ग्रामीण आजीविका और शहरी बुनियादी ढांचे से जुड़े मुद्दे जनता के एजेंडे में सबसे ऊपर हैं।


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