सौरव दास और आशुतोष रांका की जमानत पर शायना एनसी का तंज, कहा-'जमानत कोई जीत नहीं, कोर्ट की सख्त शर्त है'
शिवसेना प्रवक्ता शायना एनसी ने सीजेपी प्रवक्ता सौरव दास और आशुतोष रांका को मिली जमानत को जीत नहीं बल्कि कोर्ट की शर्त बताया। उन्होंने राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कि उन्हें पहले आरएसएस की एबीसी जनाने की जरूरत है।

मुंबई। शिवसेना प्रवक्ता शायना एनसी ने सीजेपी प्रवक्ता सौरव दास और आशुतोष रांका को मिली जमानत को जीत नहीं बल्कि कोर्ट की शर्त बताया। उन्होंने राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कि उन्हें पहले आरएसएस की एबीसी जनाने की जरूरत है।
सीजेपी के प्रवक्ता सौरव दास और आशुतोष रांका को मिली जमानत पर शिवसेना की प्रवक्ता शायना एनसी ने कहा कि कानून सबके लिए बराबर है। कोर्ट ने एक साल तक शांति बनाए रखने को कहा है। यह दूसरी बार है जब इन्होंने बॉन्ड की शर्तों को तोड़ा है। ये लोग प्रदर्शनकारी नहीं हैं बल्कि आदतन कानून तोड़ने वाले हैं। यहां जमानत मिलना कोई जीत नहीं है, यह एक ऐसी स्थिति है जहां आप 50,000 रुपए जमा करते हैं और शांति बनाए रखने का वादा करते हैं। इसका मतलब यह है कि कोर्ट को भी लगा कि ये लोग अशांति फैला सकते हैं और यही सच है।
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए शिवसेना की प्रवक्ता शायना एनसी ने कहा कि राहुल गांधी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के बारे में एबीसी भी नहीं जानते। आरएसएस की महिला शाखा, 'राष्ट्र सेविका समिति' की स्थापना 1936 में हुई और यह पिछले 87 सालों से काम करते चली आ रही है। आज 87 सालों में इससे 10 लाख महिलाएं जुड़ी हैं और 4,000 शाखाएं चल रही हैं, जो पार्टी खुद 130 सालों में महिला अध्यक्ष नहीं बना पाई। वो क्या बात कर रहे हैं? आरएसएस के बारे में क्या बोल रहे हैं।
उन्होंने कहा कि राहुल गांधी आरएसएस से जुड़ी महिलाएं अपने देश के साथ हैं। आपके पार्टी की महिला आपके साथ हैं कि नहीं, ये तो नहीं पता है। आप पहले इस बारे में पता कीजिए। राहुल गांधी अमेठी छोड़कर वायनाड भागे और उसके बाद वायनाड छोड़कर रायबरेली भागे।
शायना एनसी ने कहा कि कांग्रेस समेत अन्य विपक्षी दल वोट चोरी का रोना रो रहे हैं, ये वही लोग हैं जो खुद वोट हासिल नहीं कर पाए। महाराष्ट्र का ही उदाहरण ले लीजिए, वे बस एक के बाद एक आरोप लगाते रहते हैं। मैं कांग्रेस अध्यक्ष खड़गे से बस इतना पूछना चाहती हूं कि जब आप 'इंडी' गठबंधन की बैठक बुलाते हैं और फिर सीईसी, चुनाव आयोग और प्रधानमंत्री पर हमला करते हैं, तो इसका क्या मतलब है? क्या इसका मतलब यह है कि आपके पास कहने के लिए कोई सकारात्मक बात नहीं है, कोई ब्लूप्रिंट नहीं है और आप बस लोगों के बीच ऐसा माहौल बना रहे हैं कि 'देखो, भारत में भी बांग्लादेश या नेपाल जैसे हालात हो जाएंगे'? यह सब फेक है, इसलिए इस तरह का झूठा नैरेटिव न फैलाएं।"


