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सहारनपुर में भाजपा के चार विधायकों का कट सकता है टिकट

फिलहाल अभी समय और समर दोनों शेष है। हां इतना जरूर है कि बीजेपी के आंतरिक सर्वे में भाजपा के पांच में से चार विधायकों का रिपोर्ट कार्ड खराब पाया गया है। बहुत संभव है कि भाजपा चार सीटों पर नए चेहरों पर दांव लगाए। ऐसे में चुनावी संग्राम दिलचस्प होगा।

सहारनपुर में भाजपा के चार विधायकों का कट सकता है टिकट
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सहारनपुर। उत्तराखंड से लगे उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जनपद में सियासी सरगर्मियां बढ़ने लग गईं हैं। कुछ रोज पहले कांग्रेस सांसद इमरान मसूद की रहनुमाई में गागलहेड़ी में हुए सदस्यता ग्रहण सम्मेलन के बाद अन्य दलों में भी कुछ- कुछ होने लगा है। सियासी पंडितों का कहना है कि कांग्रेस सहरनपुर में सभी सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारेगी। वह भी बिना किसी गठबंधन के।

अगर ऐसा होता है तो भाजपा को नफा भी हो सकता है और नुकसान भी। फिलहाल अभी समय और समर दोनों शेष है। हां इतना जरूर है कि बीजेपी के आंतरिक सर्वे में भाजपा के पांच में से चार विधायकों का रिपोर्ट कार्ड खराब पाया गया है। बहुत संभव है कि भाजपा चार सीटों पर नए चेहरों पर दांव लगाए। ऐसे में चुनावी संग्राम दिलचस्प होगा।

बताने की जरूरत नहीं कि हाल ही में जिन नेताओं ने कांग्रेस की सदस्यता ली, उनमें पूर्व विधायक मसूद अख्तर, जेल में सजा काट रहे पूर्व कैबिनेट मंत्री और सपा नेता आजम खान के लंगोटिया यार सरफराज खान (पूर्व राज्य मंत्री), इरशाद चौधरी पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष, रईस मलिक पूर्व प्रत्याशी बसपा , इमरान मलिक पूर्व ब्लाक प्रमुख बसपा , अफजल जिला पंचायत सदस्य बसपा , राजपाल सिंह करनवाल पूर्व जिला पंचायत मेंबर बसपा, इसरार पूर्व प्रमुख सपा, मंसूर पार्षद बसपा समेत कुछ और पार्षद हैं। इनमें से ज्यादा कर वही लोग हैं जो पहले भी इमरान मसूद के साथ रहे हैं। इनके लिए पार्टी नहीं इमरान मसूद पहले हैं। बताया जाता है कि निकट भविष्य में हर विधानसभा क्षेत्र से कई कद्दावर इमरान के साथ कांग्रेस का दामन पकड़ सकते हैं। देखना यह होगा कि इमरान सहारनपुर की किस सीट पर किसको चुनाव लड़ाते हैं। यहां यह भी देखना होगा कि उनके पास कोई हिंदू नेता ऐसा नहीं, जिसे बड़ा चेहरा कहा जा सके। अगर वह ज्यादातर सीटों पर मुस्लिम चेहरा उतारेंगे तो इसका फायदा भाजपा को ही मिलेगा। बेहट और देहात सीट पर सपा का कब्जा है तो बाकी अन्य पर भारतीय जनता पार्टी का।

जाहिर है जहां दो मुस्लिम प्रत्याशी टकराएंगे वहां भाजपा की दाल गल जाएगी। सदर सीट पर इस बार सीनियर जर्नलिस्ट और वरिष्ठ कांग्रेस नेता जावेद साबरी नेतृत्व से टिकट मांग रहे हैं। अन्य सीटों पर भी कांग्रेस के टिकट पर दावेदारों की कमी नहीं है। अब इमरान मसूद जैसे चतुर नेता किस तरह सामाजिक और राजनीतिक समीकरण साधते हैं, यह तो वक्त ही बताएगा। रही बात भाजपा की तो इसके चार विधायकों के टिकट कटने की प्रबल संभावना है।

वरिष्ठ पत्रकार अवनींद्र कमल के अनुसार, सदर सीट पर परिवर्तन तय है। यह भी कहा जा रहा है कि गंगोह सीट पर राज्य मंत्री जसवंत सिंह सैनी चुनाव लड़ सकते हैं। पूर्व मंत्री डॉ धर्म सिंह सैनी को भी चुनाव लड़ाया जाना लगभग तय है। धर्म सिंह नकुड़ में पूरी तरह सक्रिय हैं। हारी हुई सीट बेहट और देहात पर भी बीजेपी नया चेहरा उतार सकती है। सूत्रों का कहना है कि सदर सीट पर राघव लखन पाल शर्मा अगर उतारे जाते हैं तो भाजपा की नैया पार हो सकती है। लेकिन वर्तमान विधायक राजीव गुंबर भी पूरी ताकत लगाएंगे। लेकिन भाजपा सत्ता विरोधी लहर का सामना नहीं करना चाहती।

वहीं अवैध वसूली, खनन कारोबारियों से साठगांठ, सरकारी अमलों से धन उगाही, जमीनों के धंधे में लिप्त रहने की शिकायत लखनऊ तक पहुंचती रही है। बहरहाल अभी पक्के तौर पर तो कुछ नहीं कहा जा सकता, लेकिन इतना तय है कि भाजपा अगर पुराने सूरमाओं पर ही दांव लगाएगी तो उसके लिए इस बार मुश्किल खड़ी होगी। कांग्रेस सांसद इमरान मसूद की वजह से ऐन वक्त पर भाजपा के भी कुछ नेता पाला बदल सकते हैं।


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