एआई तकनीक सीखने वालों के लिए सर्वाधिक अवसर बनेंगे: प्रोफेसर आशुतोष कुमार सिंह
एमसीयू भोपाल में आयोजित 10 दिवसीय एआई फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम के समापन पर प्रो. आशुतोष कुमार सिंह ने कहा कि एआई सीखने वालों के लिए भविष्य में सबसे अधिक अवसर होंगे। विशेषज्ञों ने मीडिया, शिक्षा और रोजगार में एआई की भूमिका पर चर्चा की।

भोपाल। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय (एमसीयू) में आयोजित 10 दिवसीय आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम (FDP) का समापन विशेषज्ञों के महत्वपूर्ण विचारों और तकनीकी सत्रों के साथ हुआ।
समापन समारोह में मुख्य अतिथि एवं भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान (IIIT) के निदेशक प्रो. आशुतोष कुमार सिंह ने कहा कि आने वाले समय में एआई तकनीक सीखने वाले युवाओं के लिए रोजगार और नवाचार के सबसे अधिक अवसर उपलब्ध होंगे। उन्होंने कहा कि तकनीक बदलती रहती है, लेकिन ज्ञान हमेशा स्थायी रहता है और यही ज्ञान आधुनिक तकनीकों की नींव है।
प्रो. सिंह ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस मानवीय चेतना और बुद्धि का विकल्प नहीं बन सकता, बल्कि यह मानव की क्षमता को और अधिक प्रभावी बनाने वाला उपकरण है। उन्होंने कहा कि समाज में एआई को लेकर फैली भ्रांतियों को दूर करने और लोगों को इसके प्रति जागरूक बनाने में मीडिया की महत्वपूर्ण भूमिका है।
न्यूजरूम तेजी से बदल रहे, एआई बन रहा प्रमुख आधार
एमसीयू के कुलगुरु विजय मनोहर तिवारी ने कहा कि मीडिया संस्थानों के न्यूजरूम में तकनीकी बदलाव बेहद तेज गति से हो रहे हैं। आज जिस तकनीक और टूल का उपयोग हो रहा है, वह कुछ ही दिनों में बदल जाता है और इस परिवर्तन का सबसे बड़ा कारण आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस है।
उन्होंने बताया कि इसी बदलाव को ध्यान में रखते हुए विश्वविद्यालय ने अपने पत्रकारिता पाठ्यक्रम में एआई को शामिल किया है। 10 दिवसीय फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम के माध्यम से शिक्षकों को प्रशिक्षित किया गया है, ताकि वे विद्यार्थियों को आधुनिक तकनीकों के अनुरूप शिक्षा प्रदान कर सकें। विश्वविद्यालय भविष्य में भी एआई के क्षेत्र में होने वाले नए बदलावों के अनुसार अपने पाठ्यक्रम और प्रशिक्षण प्रणाली को लगातार अपडेट करता रहेगा।
भारत बन सकता है एआई की वैश्विक महाशक्ति
तकनीक एवं भाषा प्रौद्योगिकी विशेषज्ञ बालेंदु शर्मा दाधीच ने कहा कि भारत के पास विशाल डिजिटल डेटा, प्रतिभाशाली युवाओं और मजबूत डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर के कारण एआई क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व करने की क्षमता है। उन्होंने कहा कि दुनिया का लगभग 20 प्रतिशत डेटा भारत में तैयार होता है और अंतरराष्ट्रीय तकनीकी कंपनियां भी यहां बड़े पैमाने पर निवेश कर रही हैं।
उन्होंने एआई स्टार्टअप्स, भारतीय एआई इकोसिस्टम और अमेरिका, चीन तथा भारत के तकनीकी विकास की तुलना करते हुए बताया कि एल्गोरिद्म आधारित यह तकनीक आने वाले वर्षों में अनेक नए अवसर पैदा करेगी।
डीपफेक पहचानने और एआई टूल्स का दिया प्रशिक्षण
वरिष्ठ पत्रकार एवं एआई प्रशिक्षक देविका छिब्बर ने तकनीकी सत्र में प्रतिभागियों को गूगल आधारित आधुनिक एआई टूल्स, वेबसाइट डिजाइनिंग, डीपफेक की पहचान, फैक्ट-चेकिंग प्लेटफॉर्म, एआई पॉलिसी और एजेंटिक एआई के व्यावहारिक उपयोग की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि मीडिया उद्योग में एआई का प्रयोग तेजी से बढ़ रहा है, इसलिए पत्रकारिता के विद्यार्थियों के लिए इन तकनीकों का ज्ञान आवश्यक हो गया है।
कार्यक्रम के दौरान जनसंचार विभाग के सहायक प्राध्यापक डॉ. प्रदीप डहेरिया की पुस्तक "जनमाध्यम, युवा और मीडिया साक्षरता" का भी विमोचन किया गया। एफडीपी की विस्तृत रिपोर्ट प्रो. सी.पी. अग्रवाल ने प्रस्तुत की, जबकि कार्यक्रम का संचालन डॉ. पवित्र श्रीवास्तव ने किया। अंत में कुलसचिव डॉ. पी. शशिकला ने सभी अतिथियों और प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया।


