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कश्मीर घाटी में 5.3 तीव्रता के भूकंप के झटके: अफगानिस्तान का बदाखशान था केंद्र

कश्मीर घाटी में शनिवार को रिक्टर पैमाने पर 5.3 तीव्रता वाले भूकंप के झटके महसूस किए गए, जिसका केंद्र अफगानिस्तान के बदाखशान प्रांत में था। घरों में पंखे सहित अन्य वस्तुएं हिलती हुई देख लोग घरों से बाहर निकल आए। हालांकि अभी तक भूकंप से किसी तरह के नुकसान की खबर नहीं है।

कश्मीर घाटी में 5.3 तीव्रता के भूकंप के झटके: अफगानिस्तान का बदाखशान था केंद्र
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श्रीनगर। कश्मीर घाटी में शनिवार को रिक्टर पैमाने पर 5.3 तीव्रता वाले भूकंप के झटके महसूस किए गए, जिसका केंद्र अफगानिस्तान के बदाखशान प्रांत में था। घरों में पंखे सहित अन्य वस्तुएं हिलती हुई देख लोग घरों से बाहर निकल आए। हालांकि अभी तक भूकंप से किसी तरह के नुकसान की खबर नहीं है।

आपदा प्रबंधन अधिकारियों ने बताया कि शनिवार सुबह 8:24 बजे रिक्टर पैमाने पर 5.3 तीव्रता का भूकंप आया। भूकंप का केंद्र पृथ्वी के 190 किलोमीटर अंदर था। इसके निर्देशांक 36.55 डिग्री उत्तरी अक्षांश और 70.92 डिग्री पूर्वी देशांतर हैं। भूकंप विज्ञान के अनुसार, कश्मीर घाटी भूकंप की आशंका वाले क्षेत्र में स्थित है।

पूर्व में कश्मीर में भूकंपों ने भारी तबाही मचाई है। 8 अक्टूबर, 2005 को जम्मू-कश्मीर में रिक्टर पैमाने पर 7.6 तीव्रता का एक भूकंप आया था, जिसमें 80,000 से अधिक लोगों की जान चली गई थी।

इस भूकंप का केंद्र पाकिस्तान-अधिकृत कश्मीर (पीओके) के मुजफ्फराबाद शहर में था। इस भूकंप के झटकों से वह शहर पूरी तरह से मलबे में तब्दील हो गया था। घाटी के बारामूला जिले में स्थित सीमावर्ती शहर उरी को भी 2005 के भूकंप में भारी नुकसान पहुंचा था।

कश्मीर का इतिहास विनाशकारी भूकंपों से भरा रहा है, क्योंकि यह एक उच्च-भूकंपीय क्षेत्र में स्थित है। इसके इतिहास में 1555 और 1885 के विनाशकारी भूकंप जैसी प्रमुख घटनाएं शामिल हैं, जिन्होंने बड़े पैमाने पर तबाही मचाई थी और हजारों लोगों की जान ले ली थी।

30 मई 1885 को बारामूला में आए भूकंप की तीव्रता 6.8 थी, जिसके कारण श्रीनगर/बारामूला क्षेत्र में 3,000 से अधिक लोगों की मौत हुई और इमारतों को भारी नुकसान पहुंचा था।

स्ट्रक्चरल इंजीनियरों और भूकंप विशेषज्ञों ने कश्मीर में भूकंप-रोधी घरों और अन्य इमारतों के निर्माण की वकालत की है। विशेषज्ञों ने सीमेंट-कंक्रीट से बने घरों और इमारतों का विरोध किया है। भूकंप के झटकों के प्रति ये इमारतें सबसे अधिक संवेदनशील होती हैं, क्योंकि इनमें झटकों को सहने की क्षमता बहुत कम होती है, जिसके कारण ये ढह जाती हैं।



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