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'परवीन बॉबी से रेखा तक को देखा', कृतिका कामरा ने बताए 'मटका किंग' में गुलरुख के खास लुक के राज

भारतीय ओटीटी और फिल्मों की दुनिया में जब भी किसी पुराने दौर को पर्दे पर दोबारा दिखाया जाता है, तो उसके पीछे गहरी रिसर्च होती है। ऐसी ही एक कोशिश हाल ही में वेब सीरीज़ 'मटका किंग' में देखने को मिली, जहां अभिनेत्री कृतिका कामरा ने अपने किरदार गुलरुख के जरिए 1960 और 1970 के दशक के मुंबई का फैशन और माहौल फिर से जीवंत कर दिया।

परवीन बॉबी से रेखा तक को देखा, कृतिका कामरा ने बताए मटका किंग में गुलरुख के खास लुक के राज
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मुंबई। भारतीय ओटीटी और फिल्मों की दुनिया में जब भी किसी पुराने दौर को पर्दे पर दोबारा दिखाया जाता है, तो उसके पीछे गहरी रिसर्च होती है। ऐसी ही एक कोशिश हाल ही में वेब सीरीज़ 'मटका किंग' में देखने को मिली, जहां अभिनेत्री कृतिका कामरा ने अपने किरदार गुलरुख के जरिए 1960 और 1970 के दशक के मुंबई का फैशन और माहौल फिर से जीवंत कर दिया।

इस किरदार की तैयारी में उन्होंने न सिर्फ उस समय की मशहूर फिल्मों और सितारों को देखा, बल्कि उस दौर की असली जिंदगी, स्टाइल और सामाजिक माहौल को भी करीब से समझने की कोशिश की।

कृतिका कामरा ने बताया कि उनके किरदार का लुक बनाने की शुरुआत एक खास तस्वीर से हुई थी, जो निर्देशक नागराज सर ने उन्हें दिखाई थी। यह तस्वीर परवीन बॉबी की थी। उन्होंने कहा, ''इसके बाद टीम ने जीनत अमान, शर्मिला टैगोर और रेखा जैसी दिग्गज अभिनेत्रियों के स्टाइल और पर्सनैलिटी को भी देखा। कॉस्ट्यूम डिजाइनर प्रियंका दुबे ने मेरे साथ कई बार ट्रायल किए, ताकि हर आउटफिट, हर ड्रेस और हर लुक उस समय की असलियत को सही तरह से दिखा सके।''

कृतिका ने कहा, ''टीम ने उस दौर की असली तस्वीरों और दस्तावेजों को भी खंगाला। इसमें जैज क्लब, रेसिंग इवेंट्स और पारसी इवेंट्स के कार्यक्रमों की तस्वीरें शामिल थीं। इन सब चीजों ने मिलकर यह समझने में मदद की कि उस समय लोग कैसे रहते थे, कैसे कपड़े पहनते थे और उनका पूरा माहौल कैसा हुआ करता था। यही वजह है कि गुलरुख का किरदार सिर्फ एक फैशनेबल लुक नहीं बल्कि एक जीवंत समय का एहसास देता है।''

कृतिका कामरा ने कहा, ''मेरे किरदार को गढ़ने में सिर्फ कपड़े या मेकअप ही नहीं, बल्कि हर छोटी चीज का ध्यान रखा गया था। हेयरस्टाइल से लेकर जूते और एक्सेसरीज तक सब कुछ बहुत सोच-समझकर चुना गया। इन्हीं बारीकियों की वजह से मुझे अपने किरदार में ढलने और गुलरुख के आत्मविश्वास को समझने में मदद मिली। जब तक किरदार का पूरा लुक सही नहीं होता, तब तक उसकी असली भावना को पर्दे पर लाना मुश्किल होता है।''



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