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गलगोटिया यूनिवर्सिटी पर गिरी गाज

-चीनी रोबोट दिखाने पर एआई समिट से गलगोटिया को दिखाया बाहर का रास्ता

गलगोटिया यूनिवर्सिटी पर गिरी गाज
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-चीनी रोबोट दिखाने पर एआई समिट से गलगोटिया को दिखाया बाहर का रास्ता

-चीन निर्मित यूनीट्री गो-2 रोबोट को 'ओरियन' नाम देकर किया गया था प्रदर्शित

ग्रेटर नोएडा। दिल्ली में चल रहे इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट में गलगोटिया विवि ने देश को शर्मसार कर दिया है, एक रोबोट डॉग को अपनी इनोवेशन बताकर प्रदर्शित किया। नाम दिया 'ओरियन'। दावा किया कि यह उनके छात्रों और फैकल्टी की मेहनत का नतीजा है। लेकिन सच सामने आते ही हंगामा मच गया। यह रोबोट डॉग असल में चीन की कंपनी यूनिट्री का कॉमर्शियल प्रोडक्ट गो-2 था, जो भारत में आसानी से खरीदा जा सकता है। ग्रेटर नोएडा स्थित गलगोटिया विवि ने ऐसा काम किया है जिसके कारण पूरा भारत दुनिया के सामने शर्मिंदा हो गया है। भारत को दुनिया के सामने शर्मिंदा करने वाली गलगोटिया यूनिवर्सिटी अपने किए हुए पर पश्चाताप करने को भी तैयार नहीं है। गलगोटिया यूनिवर्सिटी के कर्ताधर्ता अपनी सबसे बड़ी गलती पर पर्दा डालने का असफल प्रयास कर रहे हैं।

भारत में चल रहे कृत्रिम बुद्धिमता (एआई) के अंतरराष्ट्रीय शिखर सम्मेलन पर पूरी दुनिया की निगाहें लगी हुई हैं। इसी दौरान ग्रेटर नोएडा में स्थापित गलगोटिया यूनिवर्सिटी ने भारत को पूरी दुनिया के सामने शर्मिंदा करने का काम कर डाला है। आपको बता दें कि ग्रेटर नोएडा की गलगोटिया विवि ने चीन से इम्पोर्ट करके लाए गए एक एआई रोबोट को अपना उत्पाद बताकर शिखर सम्मेलन के एक्सपो में प्रदर्शित कर डाला। गलगोटिया यूनिवर्सिटी के स्टॉल पर प्रदर्शित किए गए चीनी एआई रोबोट को कुछ दर्शकों ने गलगोटिया यूनिवर्सिटी के स्टॉल पर दिखाए जा रहे एआई रोबोट की पोल खोलते हुए सोशल मीडिया पर पोस्ट कर दिया कि भारत के ग्रेटर नोएडा में स्थापित गलगोटिया यूनिवर्सिटी चीनी सामान को अपना बताकर फर्जी तरह से वाहवाही लूट रहा है।

एक्सपो वेन्यू खाली करने का दिया निर्देश

इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट के आयोजकों ने दावों में गड़बड़ी और बढ़ते सोशल मीडिया हंगामे को देखते हुए गलगोटिया यूनिवर्सिटी को एक्सपो वेन्यू खाली करने का निर्देश दिया है। इंडिया एआई इंपैक्ट समिट राष्ट्रीय राजधानी के 'भारत मंडपम' में चल रही है। समिट के दौरान जब गलगोटिया यूनिवर्सिटी के स्टॉल पर चीन निर्मित यूनीट्री गो-2 रोबोट को 'ओरियन' नाम देकर पेश किया गया, तो वहां मौजूद विशेषज्ञों और सोशल मीडिया यूजर्स ने इसकी प्रामाणिकता पर सवाल उठाए। विवाद इतना बढ़ा कि समिट की गरिमा और 'मेक इन इंडियाÓ के विजन को ध्यान में रखते हुए आयोजकों ने सख्त रुख अपनाया। आरोप है कि यूनिवर्सिटी ने एक कामर्शियल चाइनीज प्रोडक्ट को अपने 'इन-हाउस' इनोवेशन के रूप में पेश किया, जो एक्सपो के नियमों का उल्लंघन था। सूत्रों के अनुसार, समिट के आयोजक किसी भी प्रकार के 'बौद्धिक संपदा' विवाद या गलत दावों को बढ़ावा नहीं देना चाहते थे, जिसके चलते यूनिवर्सिटी को अपना प्रदर्शन रोकने और जगह खाली करने को कहा गया। एक प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थान के लिए अंतरराष्ट्रीय मंच से इस तरह बाहर किया जाना एक बड़ा झटका माना जा रहा है।

एआई सम्मेलन को बनाया तमाशा : राहुल गांधी

भारत की प्रतिभा और डेटा का लाभ उठाने के बजाय, एआई शिखर सम्मेलन एक अव्यवस्थित जनसंपर्क तमाशा बन गया है, भारतीय डेटा बिक्री के लिए पेश किया जा रहा है और चीनी उत्पादों का प्रदर्शन किया जा रहा है। एआई शिखर सम्मेलन से भारतीय प्रतिभाओं को लाभ मिलना चाहिए था, लेकिन सरकार पूरे शिखर सम्मेलन को अव्यस्थित कर इसे जनसंपर्क का तमाशा बना दिया है और सम्मेलन में चीन अब इसका लाभ उठा रहा है।

गलगोटिया यूनिवर्सिटी ने दी सफाई

इंडिया एआई इंपेक्ट समिट के दौरान रोबोटिक डॉग को लेकर उठे विवाद के बीच गलगोटिया यूनिवर्सिटी ने सफाई जारी की। यूनिवर्सिटी ने कहा है कि उसने इस रोबोडॉग को नहीं बनाया है न ही ऐसा कोई दावा किया है। यह डिवाइस शैक्षणिक उद्देश्यों के लिए चीन की वैश्विक रोबोटिक्स कंपनी यूनीट्री से खरीदा गया है। नकारात्मकता फैलाने से उन छात्रों का हौसला टूट सकता है जो वैश्विक प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल करके नवाचार करने और कौशल बनाने के लिए कड़ी मेहनत कर रहे हैं।

एआई सम्मेलन का उद्घाटन करेंगे मोदी

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भारत मंडपम में 'इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026' का उद्घाटन करेंगे। प्रधानमंत्री के अलावा उद्घाटन सत्र को फ्रांस के राष्ट्रपति एनैमुअल मैक्रों, संयुक्त राष्ट्र के महासचिव तथा विश्वभर के उद्योग जगत के प्रमुख नेता भी संबोधित करेंगे। उद्घाटन सत्र के बाद प्रधानमंत्री अन्य नेताओं के साथ इंडिया एआई इम्पैक्ट एक्सपो का भ्रमण करेंगे जहां वह विभिन्न देशों के पवेलियन का अवलोकन करेंगे। दोपहर को वह 'लीडर्स प्लेनरी' में भाग लेंगे। इसमें विभिन्न देशों के राष्ट्राध्यक्ष, मंत्री और बहुपक्षीय संस्थानों के वरिष्ठ प्रतिनिधि एआई से जुड़े राष्ट्रीय और वैश्विक प्राथमिकताओं जैसे शासन व्यवस्था, अवसंरचना और अंतरराष्ट्रीय सहयोग पर विचार रखेंगे।


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