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बीकेटीसी पर फंड दुरुपयोग के आरोप, विरोध शांत कराने को तीर्थ पुरोहितों में बांटे गए 11 लाख

बीकेटीसी पर फंड दुरुपयोग के गंभीर आरोप लगे हैं। आरटीआई खुलासे में केदारनाथ के तीर्थ पुरोहितों को विरोध शांत कराने के लिए 11 लाख रुपये बांटने का दावा किया गया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से उच्चस्तरीय जांच की मांग उठी है।

बीकेटीसी पर फंड दुरुपयोग के आरोप, विरोध शांत कराने को तीर्थ पुरोहितों में बांटे गए 11 लाख
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देहरादून। बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) एक बार फिर विवादों में घिर गई है। आरोप है कि धामों में तीर्थ यात्रियों को मूलभूत सुविधाएं देने में नाकाम समिति अब श्रद्धालुओं के दान-चढ़ावे की रकम का मनमाने ढंग से इस्तेमाल कर रही है। सामाजिक कार्यकर्ता व अधिवक्ता विकेश सिंह नेगी ने बीकेटीसी से आरटीआई के तहत मिली जानकारी के आधार पर फंड दुरुपयोग सहित कई गंभीर आरोप लगाये हैं।

देहरादून कचहरी परिसर स्थित अपने कार्यालय में पत्रकारों से बात करते हुए अधिवक्ता विकेश सिंह नेगी ने दावा करते हुए कहा कि कहा सूचना के अधिकार (RTI) के जरिए सामने आए दस्तावेजों के आधार पर वर्ष 2025 में केदारनाथ के तीर्थ-पुरोहितों की संस्था ‘केदार सभा’ को नियमों को दरकिनार कर 11 लाख रुपये का भुगतान किया गया। यह भुगतान ऐसे समय में हुआ जब केदार सभा ने बीकेटीसी अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी के खिलाफ खुलकर विरोध जताया था, जिससे पूरे मामले पर सवाल खड़े हो गए हैं।

ढाई महीने बाद अचानक स्वीकृति, नोटशीट में भी कई खामियां

अधिवक्ता विकेश सिंह नेगी ने कहा कि आरटीआई में सामने आया है कि केदारनाथ धाम में 25 जुलाई से 1 अगस्त 2025 के बीच श्रीमद् भागवत कथा का आयोजन हुआ था। लेकिन आयोजन समाप्त होने के करीब ढाई महीने बाद, 12 अक्टूबर 2025 को बीकेटीसी के स्तर पर आनन-फानन में दो अलग-अलग नोटशीट तैयार कर 11 लाख रुपये की स्वीकृति दे दी गई। इन नोटशीट्स पर तत्कालीन मुख्य कार्याधिकारी विजय थपलियाल, उपाध्यक्ष विजय सिंह कप्रवाण और अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी के हस्ताक्षर मौजूद हैं।


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