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भरत कुमार कुठाती को त्रिनिदाद और टोबैगो गणराज्य का उच्चायुक्त किया गया नियुक्त

विदेश मंत्रालय की ओर से साझा जानकारी के अनुसार, भरत कुमार कुठाती को त्रिनिदाद और टोबैगो गणराज्य में भारत के अगले उच्चायुक्त के तौर पर नियुक्त किया गया है।

भरत कुमार कुठाती को त्रिनिदाद और टोबैगो गणराज्य का उच्चायुक्त किया गया नियुक्त
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नई दिल्ली। विदेश मंत्रालय की ओर से मंगलवार को साझा जानकारी के अनुसार, भरत कुमार कुठाती को त्रिनिदाद और टोबैगो गणराज्य में भारत के अगले उच्चायुक्त के तौर पर नियुक्त किया गया है।

2006 बैच के आईएफएस अधिकारी भरत कुमार कुठाती वर्तमान समय में बोत्सवाना गणराज्य में भारती उच्चायुक्त की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। विदेश मंत्रालय ने भरत कुमार के त्रिनिदाद और टोबैगो गणराज्य में जिम्मेदारी संभालने की उम्मीद जताई है।

उन्हें विदेश मंत्रालय ने मई 2023 में बोत्सवाना का अगला उच्चायुक्त नियुक्त किया था। उन्होंने आईएफएस में आने के बाद विदेश मंत्रालय में अलग-अलग डेस्क और विदेश में भारतीय मिशनों में सेवा दी है।

उच्चायुक्त बनने से पहले वह बेंगलुरु में क्षेत्रीय पासपोर्ट अधिकारी (आरपीओ) के पद पर तैनात थे, जहां उन्होंने पासपोर्ट और कांसुलर सेवाओं के आधुनिकीकरण में भूमिका निभाई।

गाबोरोन में कार्यभार संभालने के बाद से उन्होंने भारत-बोत्सवाना द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने पर फोकस किया है, खासकर आईटीईसी प्रोग्राम, आईसीसीआर स्कॉलरशिप, रक्षा, स्वास्थ्य, शिक्षा, कृषि और डिजिटल स्किल्स के क्षेत्र में।

उनके कार्यकाल में महिला क्रिकेट टीम का भारत में प्रशिक्षण, खेल और युवा मामलों में एमओयू की पहल और स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अवसरों पर चर्चा हुई है। वह अनुभवी राजनयिक माने जाते हैं और अफ्रीका के साथ भारत की विकास साझेदारी को आगे बढ़ाने में सक्रिय हैं।

भारत और बोत्सवाना के बीच कूटनीतिक संबंध दशकों पुराने हैं। साल 1966 में बोत्सवाना की स्वतंत्रता के तुरंत बाद दोनों देशों के बीच राजनयिक संबंध स्थापित किए गए। ये संबंध आपसी मित्रता और सहयोग पर आधारित हैं। इसके बाद भारत ने 1987 में गैबोरोन (राजधानी) में उच्च आयोग खोला, जबकि बोत्सवाना ने 2006 में नई दिल्ली में अपना दूतावास स्थापित किया। ये दोनों देशों के मजबूत होते संबंधों को दर्शाता है।

दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार मुख्य रूप से डायमंड (हीरा) और रत्न क्षेत्र पर केंद्रित रहा है, जिसमें भारतीय कंपनियां कटिंग और पॉलिशिंग में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।


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