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अंजू बॉबी जॉर्ज: विश्व चैंपियनशिप में पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला एथलीट

अंजू बॉबी जॉर्ज भारत की एक सम्मानित एथलीट रही हैं। ऊंची कूद में वह देश का प्रतिनिधित्व करने वाली शीर्ष महिला एथलीट रही हैं, और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पदक जीतकर उन्होंने देश का नाम रोशन किया है।

अंजू बॉबी जॉर्ज: विश्व चैंपियनशिप में पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला एथलीट
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नई दिल्ली। अंजू बॉबी जॉर्ज भारत की एक सम्मानित एथलीट रही हैं। ऊंची कूद में वह देश का प्रतिनिधित्व करने वाली शीर्ष महिला एथलीट रही हैं, और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पदक जीतकर उन्होंने देश का नाम रोशन किया है।

अंजू का जन्म 19 अप्रैल, 1977 दक्षिण मध्य केरल के कोट्टायम जिले के छोटे से कस्बा चीरनचीरा में हुआ। उन्होंने पांच वर्ष की उम्र में एथलेटिक्स स्पर्धाओं में भाग लेना शुरू कर दिया था। एथलेटिक्स में आगे आने के लिए अंजू को अपनी मां और पिता से काफी सहयोग मिला। अंजू स्कूल के समय से ही ऊंची कूद की प्रतिभाशाली एथलीट के रूप में उभरीं।

अंजू बॉबी जॉर्ज का करियर लंबा और सफलताओं से भरपूर रहा है। पी.टी उषा को अपना आदर्श मानने वाली जॉर्ज ने अपनी कड़ी मेहनत और संकल्प की बदौलत एथलेटिक्स के क्षेत्र में बड़ा नाम बनाया और लाखों महिला एथलीटों के प्रेरणा के रुप में उभरीं। अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पदक जीत उन्होंने देश का नाम रोशन किया।

उनकी कुछ प्रमुख उपलब्धियों पर नजर डालें तो वह विश्व चैंपियनशिप में पदक जीतने वाली प्रथम भारतीय महिला एथलीट हैं। उन्होंने वर्ष 2003 में पेरिस में विश्व चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीता था। इसके अलावा, 1999 में अंजू ने दक्षिण एशियाई एथलेटिक्स चैंपियनशिप में रजत पदक जीता। 2001 में अंजू ने लम्बी कूद रिकार्ड कायम किया। उन्होंने 6.74 मीटर लम्बी छलांग लगाई। उनकी दुनिया में 13वीं रैंकिंग रही है। विश्व चैंपियनशिप के लिए सातवीं रैंकिंग भी मिल चुकी है।

मैनचेस्टर में 2002 में खेले गए राष्ट्रमंडल खेलों में उन्होंने कांस्य पदक जीता। 2002 में ही बुसान में आयोजित एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीता। एथेंस ओलंपिक में 2004 में, अंजू को ध्वजवाहक का सम्मान प्राप्त हुआ। उन्होंने 2005 में वर्ल्ड एथलेटिक्स फाइनल में स्वर्ण पदक जीता, जिसे वह अपना सबसे अच्छा प्रदर्शन मानती हैं। 2008 में तीसरी दक्षिण एशियाई एथलेटिक्स चैंपियनशिप में उन्होंने स्वर्ण पदक प्राप्त किया।

एथलेटिक्स में उनके योगदान को देखते हुए भारत सरकार ने 2002 में उन्हें अर्जुन पुरस्कार, 2003 में 'खेल रत्न', और 2004 में पद्मश्री से सम्मानित किया था।



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