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2.10 करोड़ की महाठगी का मामला: साइबर सेल ने एक और शातिर आरोपी को दबोचा, दूसरों के नाम पर 'म्युअल अकाउंट' खुलवाकर खपाते थे ठगी की रकम

गौतमबुद्धनगर की साइबर क्राइम पुलिस ने डिजिटल अरेस्ट के नाम पर हुई 2.10 करोड़ रुपए की बड़ी साइबर ठगी के मामले में एक और आरोपी को गिरफ्तार करने में सफलता हासिल की है। पुलिस ने इस मामले में इस्तेमाल म्यूल अकाउंट धारक अमन कुमार को गिरफ्तार किया है, जिसके बैंक खाते का इस्तेमाल साइबर अपराधियों द्वारा ठगी की रकम के लेन-देन के लिए किया जा रहा था। इससे पहले पुलिस इस मामले में दो अन्य आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है।

2.10 करोड़ की महाठगी का मामला: साइबर सेल ने एक और शातिर आरोपी को दबोचा, दूसरों के नाम पर म्युअल अकाउंट खुलवाकर खपाते थे ठगी की रकम
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नोएडा। गौतमबुद्धनगर की साइबर क्राइम पुलिस ने डिजिटल अरेस्ट के नाम पर हुई 2.10 करोड़ रुपए की बड़ी साइबर ठगी के मामले में एक और आरोपी को गिरफ्तार करने में सफलता हासिल की है। पुलिस ने इस मामले में इस्तेमाल म्यूल अकाउंट धारक अमन कुमार को गिरफ्तार किया है, जिसके बैंक खाते का इस्तेमाल साइबर अपराधियों द्वारा ठगी की रकम के लेन-देन के लिए किया जा रहा था। इससे पहले पुलिस इस मामले में दो अन्य आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है।

पुलिस के अनुसार, 10 अप्रैल को पीड़ित व्यक्ति के पास साइबर अपराधियों ने संपर्क किया और स्वयं को एनआईए पुणे का अधिकारी बताया। आरोपियों ने पीड़ित को डराते हुए कहा कि उसके आधार कार्ड से जुड़े बैंक खातों का इस्तेमाल टेरर फंडिंग में किया गया है और उसके खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।

इसके बाद अपराधियों ने व्हाट्सएप के माध्यम से आरबीआई के नाम से फर्जी पत्र और नकली वारंट भेजकर पीड़ित को मानसिक रूप से भयभीत कर दिया। ठगों ने 'डिजिटल अरेस्ट' का डर दिखाकर पीड़ित से अलग-अलग माध्यमों से कुल 2 करोड़ 10 लाख रुपए अपने खातों में ट्रांसफर करा लिए। पीड़ित को जब अपने साथ हुई ठगी का एहसास हुआ तो उसने थाना साइबर क्राइम में शिकायत दर्ज कराई।

मामले में पुलिस ने संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की। जांच के दौरान पुलिस ने इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों और बैंकिंग ट्रांजेक्शन का विश्लेषण किया। इसके आधार पर 26 मई को पुलिस ने हरियाणा के चरखी दादरी निवासी 26 वर्षीय अमन कुमार पुत्र संजय कुमार को गिरफ्तार किया। जांच में सामने आया कि आरोपी के बैंक खाते में साइबर ठगी से संबंधित करीब 2.20 लाख रुपए ट्रांसफर हुए थे।

पुलिस ने बताया कि आरोपी का बैंक खाता साइबर अपराधियों द्वारा म्यूल अकाउंट के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा था। ऐसे खातों का उपयोग ठगी की रकम को इधर-उधर ट्रांसफर करने और जांच एजेंसियों से बचने के लिए किया जाता है। पुलिस जांच में यह भी पता चला है कि आरोपियों के खातों से जुड़े मामले उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात, राजस्थान, केरल और कर्नाटक समेत कई राज्यों में दर्ज हैं।

साइबर क्राइम पुलिस ने लोगों से अपील की है कि 'डिजिटल अरेस्ट' जैसी किसी भी बात पर विश्वास न करें, क्योंकि कोई भी सरकारी एजेंसी फोन या वीडियो कॉल पर किसी व्यक्ति को गिरफ्तार नहीं करती। पुलिस ने कहा कि यदि कोई व्यक्ति खुद को पुलिस, सीबीआई, ईडी या किसी सरकारी एजेंसी का अधिकारी बताकर डराए या पैसे मांगे, तो तुरंत साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत करें या साइबर पोर्टल पर जानकारी दें। साथ ही अपने बैंक खाते, ओटीपी, एटीएम कार्ड या अन्य गोपनीय जानकारी किसी अनजान व्यक्ति के साथ साझा न करें।



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