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सरकार की बड़ी-बड़ी नीतियों की निकली हवा दावे फुस्स, देश से लगातार विलुप्त हो रहे बाघ

नई दिल्ली ! वन्यजीवों के संरक्षण के लिए बनी सरकार की बड़ी-बड़ी नीतियों और उसके इन दावों के बीच कि दुनिया में सबसे ज्यादा 70 फीसदी बाघ भारत में है,

सरकार की बड़ी-बड़ी नीतियों की निकली हवा दावे फुस्स, देश से लगातार विलुप्त हो रहे बाघ
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नई दिल्ली ! वन्यजीवों के संरक्षण के लिए बनी सरकार की बड़ी-बड़ी नीतियों और उसके इन दावों के बीच कि दुनिया में सबसे ज्यादा 70 फीसदी बाघ भारत में है, पिछले दो महीने में देश के विभिन्न अभयारण्यों में 20 बाघों की मौत हो चुकी है जबकि बीते वर्ष कुल 98 बाघ मृत पाए गए थे। यह आंकड़ा किसी निजी सर्वेक्षण का नहीं बल्कि खुद वन और पर्यावरण मंत्रालय के अंतर्गत काम करने वाले ‘राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण’ का है।
सरकार की ओर से संसद में पेश आंकड़ों के अनुसार भी साल 2015 की तुलना में 2016 में बाघों की मौत की घटनाएं 25 फीसदी बढ़ गई। इस साल महज दो महीने में 20 बाघों की मौत हो चुकी है। अगर इनके मरने की रफ्तार इसी तरह जारी रही तो अगले दो-तीन साल में इस राष्ट्रीय पशु की संख्या में और कमी हो सकती है। हालांकि वन और पर्यावारण मंत्रालय इससे इत्तेफाक नहीं रखता उसके अनुसार देश में इस समय बाघों की संख्या लगभग 2400 है और इसमें लगातार बढ़ोतरी हो रही है।
बाघ संरक्षण प्राधिकरण के आंकड़ों के अनुसार इस साल 13 जनवरी से 27 फरवरी के बीच देश के विभिन्न अभयारण्यों में कुल 20 बाघों की मौत हुई है। इनमें से अधिकतर की मौत के कारणों का पता अभी तक नहीं चल पाया है जबकि कुछ की मौत आपसी संघर्ष, बीमारी और करंट लगने से होने की बात कही गई है। बाघों के मरने के मामले में कर्नाटक का रिकार्ड सबसे खराब रहा है जबकि बाघ अभयारण्यों के मामले में यह राज्य देश में पहले स्थान पर है। यहां बांदीपुर, भद्रा, नागरहोल, डांडेली और बीआरटी जैसे कुल पांच बाघ अभयारण्य हैं। देश में बाघों की कुल आबादी का सबसे बड़ा हिस्सा इन्हीं अभयारण्यों में बसता है।


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