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मजदूरों को नहीं मिल पा रही न्यूनतम मजदूरी

नई दिल्ली ! बवाना में आयोजित किसान-मजदूर सम्मेलन में दिल्ली प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष अजय माकन ने आम आदमी पार्टी की दिल्ली सरकार और भाजपा की केन्द्र सरकार पर निशाना साधते

मजदूरों को नहीं मिल पा रही न्यूनतम मजदूरी
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नई दिल्ली ! बवाना में आयोजित किसान-मजदूर सम्मेलन में दिल्ली प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष अजय माकन ने आम आदमी पार्टी की दिल्ली सरकार और भाजपा की केन्द्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि दोनों ही सरकारों ने मजदूरों और किसानों के साथ धोखा किया है। एक ओर दिल्ली सरकार जहां न्यूनतम मजदूरी बढ़ाने का ढिढोरा पीट रही है वहीं, पहले से तय न्यूनतम मजदूरी राशि भी इन मजदूरों को नही मिल पा रही है।
मजदूरों का शोषण हो रहा है लेकिन श्रम विभाग हाथ पर हाथ धरे बैठा है। दूसरी ओर, केंद्र सरकार की नोटबंदी योजना के चलते दिल्ली में इतना अधिक बुरा असर पड़ा कि लाखों मजदूरों को राष्ट्रीय राजधानी से पलायन करना पड़ा।
श्री माकन ने कहा कि दिल्ली में असंगठित क्षेत्र में काम करने वालों की संख्या तकरीबन 48.63 लाख है जो कुल वर्क फोर्स का 85.33 है। नोटबंदी के दौरान असंगठित वर्क फोर्स के लाखों कर्मचारियों के रोजगार पर तलवार लटक गई थी लेकिन केजरीवाल सरकार ने मजदूरों की रोजगार की समस्या को लेकर उस समय भी उचित कदम नही उठाये। जबकि नोटबंदी के दौरान मजदूरों को प्रतिदिन के लिए रोजगार नही मिल पा रहा था। किसान सम्मेलन में अजय माकन के अलावा सांसद दीपेन्द्र हुडा, पूर्व सांसद सज्जन कुमार, जिला अध्यक्ष सुरेन्द्र कुमार, चरण सिंह कंडेरा और सभी निगम पार्षद व ब्लाक अध्यक्ष भी मौजूद थे। श्री माकन ने इस दौरान किसानों की समस्या उठाते हुए कहा कि कृषि के लिए सब्सिडी पर मिलने वाले खाद्य व बीज भी केजरीवाल सरकार द्वारा किसानों को नही दिए जा रहे है जिस कारण किसानों को अनाप शनाप दरों पर खाद्य व बीज अपनी खेती करने के लिए खरीदने पड़ रहे है और परिणामस्वरुप किसानों को कृषि से लागत भी नही मिल पा रही है। वहीं, पूरी तरह से ट्यूबवेल के पानी पर निर्भर खेतीबाड़ी के लिए किसानों को नये ट्यूबवेल के कनैक्शन नही दिए जा रहे है। साथ ही कृषि कार्यों के लिए किसानों को बिजली के दाम देशभर में सबसे ज्यादा चुकाने पड़ रहे हैं। केजरीवाल सरकार की उदासीनता के चलते किसानों की आर्थिक स्थिति खराब हो गई है। लिहाजा किसानों को कृषि कार्य छोडऩा पड़ रहा है।


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