Top
Begin typing your search above and press return to search.

ठोस कचरे का प्रबंधन सबसे बड़ी चुनौती

नई दिल्ली ! घरों से निकलने वाले ठोस कचरे का प्रबंधन किया जाना देश के लिए सबसे बड़ी चुनौती है। जबतक इस चुनौती से निपटा नहीं जाएगा तबतक स्वच्छ भारत अभियान को सफल नहीं बनाया जा सकता है।

ठोस कचरे का प्रबंधन सबसे बड़ी चुनौती
X

नई दिल्ली ! घरों से निकलने वाले ठोस कचरे का प्रबंधन किया जाना देश के लिए सबसे बड़ी चुनौती है। जबतक इस चुनौती से निपटा नहीं जाएगा तबतक स्वच्छ भारत अभियान को सफल नहीं बनाया जा सकता है। उक्त बातें केंद्रीय शहरी विकास मंत्री एम वेंकैया नायडू ने कचरे से बिजली बनाने वाले संयंत्र का उद्घाटन करने के बाद उत्तरी निगम मुख्यालय स्थित सभागार में आयोजित एक कार्यक्रम में शुक्रवार को कहीं। उन्होंने बताया कि नरेला-बवाना स्थित संयंत्र देश का सबसे ब?ा संयंत्र है जहां रोजाना 2000 मीट्रिक टन कचरे को खपाया जा सकेगा।

पहले इस कचरे से 1300 मीट्रिक टन आरडीएफ (ईंधन) तैयार किया जाएगा और फिर इससे 24 मेगावाट बिजली रोजाना बनाई जा सकेगी। नायडू ने कहा कि देश को साफ-सुथरा बनाने के लिए तीन चीजें बहुत जरुरी हैं। पहली, जनता की भागीदारी, दूसरी, लोगों की मानसिकता में परिवर्तन और तीसरी मूलभूत सुविधाओं की उपलब्धता को सुनिश्चित किया जाना। उन्होंने बताया कि खुले में शौच करने जैसी सामाजिक बुराई पर रोक लगाने के लिए सरकार ने देशभर में महज एक साल के अंदर 4 लाख 17 हजार शौचालय बनाए हैं। उन्होंने कहा कि धार्मिक विद्वानों, शिक्षाविदों और फिल्मी हस्तियों से लेकर खेल के क्षेत्र में सक्रिय लोगों को भी भागीदार बनाकर स्वच्छ भारत मिशन का प्रचार प्रसार किया जा रहा है ताकि आम नागरिकों के मानसिकता में परिर्वतन लाया जा सके और उन्हें मिशन के साथ जोड़ा जा सके। उन्होंने कहा कि अब तक हमारे देश में 88 मेगावाट बिजली का उत्पादन होता है लेकिन उत्तरी दिल्ली नगर निगम द्वारा अकेले ही इस संयंत्र के माध्यम से 24 मेगावाट बिजली का उत्पादन किया जाएगा जो अपने आप में एक मिसाल है। गौरतलब कि नरेला-बवाना लैंडफिल साईट पर कचरे से बिजली बनाने का संयंत्र निजी सार्वजनिक भागीदारी (पीपीपी मॉडल) के तहत लगाया गया है। वहीं, विज्ञान एंव प्रौद्योगिकी मंत्री डॉ हर्षवर्धन ने कहा कि दिल्ली की लैंडफिल साईट पर मौजूद हजारों टन कूड़ा-कचरा हमेशा से ही लोगों की चिंता का कारण रहा है। नरेला-बवाना में कचरे से बिजली बनाने वाले संयंत्र की शुरुआत ने इस चिंता के निराकरण को आसान बना दिया है। साथ ही बिजली के उत्पादन और इसके विक्रय से निगम को राजस्व भी मिलेगा। उन्होंने कहा कि देश में रोजाना लगभग 55 मिलियन टन ठोस कचरा और 38 बिलियन लीटर तरल कचरा उत्पन्न होता है। अगर इस कचरे का निपटान भी वैज्ञानिक तरीके से किया जाए तो रोजाना करीब 2000 मेगावाट बिजली बनाई जा सकती है। इस अवसर पर महापौर डॉ संजीव नैय्यर, प्रवेश वाही, वीपी पांडेय, निगमायुक्त पीके गुप्ता, पार्षद केशरानी, शहरी विकास मंत्रालय के संयुक्त सचिव प्रवीण प्रकाश और रेमकी एन्वायरो इंजीनियर्स लिमिटेड के अध्यक्ष अयोध्या आर रेड्डी भी मौजूद थे। नायडू ने मोडी (एम ओ डी आई) का उल्लेख किया और बताया कि मोडी का मतलब पीएम मोदी नहीं बल्कि मेकिंग ऑफ डेवलप इंडिया है। केंद्र की सरकार भारत को विकसित बनाने के लिए कार्य कर रही है। नायडू ने पीएम मोदी के तीन मन्त्रों रिफॉर्म (सुधार), परफॉर्म (काम करना) और ट्रांसफॉर्म (पूरी तरह से बदलना) के साथ इन्फॉर्म (सूचना देना) को जोड़ते हुए कहा कि सरकार के जनहितकारी कार्यों की जानकारी लोगों तक पहुंचाना बहुत जरूरी है ताकि सभी को सरकार के कार्यों से अवगत कराया जा सके।


Next Story

Related Stories

All Rights Reserved. Copyright @2019
Share it