'लाखों बच्चों से अभी भी दूर है शिक्षा की रोशनी'
नई दिल्ली ! साल 2011 की जनगणना के मुताबिक भारत की कुल जनसंख्या 1.22 अरब है, लेकिन यहां मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा का प्रावधान होने के बाद भी

नई दिल्ली ! साल 2011 की जनगणना के मुताबिक भारत की कुल जनसंख्या 1.22 अरब है, लेकिन यहां मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा का प्रावधान होने के बाद भी व्यस्कों, युवाओं में निरक्षरता और स्कूल न जाने वाले बच्चों का स्तर बहुत ज्यादा है। भारत की कुल जनसंख्या की सिर्फ 74.04 प्रतिशत आबादी ही साक्षर है।
नेशनल कोलिशन फॉर एजुकेशन ने एक बयान जारी कर कहा है कि अंतर्राष्ट्रीय और राष्ट्रीय स्तर पर किए गए प्रयासों के बावजूद जिस तरह के आंकड़े यूनेस्को ई-एटलस ने स्कूल न जाने वाले बच्चों पर जारी किए हैं, वह चिंता का विषय है। दुनिया भर में स्कूल न जाने वाले बच्चों की संख्या 12.4 करोड़ है, जिनमें से 1.77 करोड़ बच्चे भारतीय हैं।
बयान में कहा गया है, "निरक्षरता से निपटने के लिए सभी बच्चों को साक्षर किया जाए। इसे सुनिश्चित करने के लिए भारत सरकार ने समय-समय पर कई प्रयास किए हैं, जिनमें साल 1990 में शुरू किया गया सर्व शिक्षा अभियान शामिल है। यही नहीं भारत सरकार ने साल 2015 में सतत विकास लक्ष्य भी अंगीकृत किया। इसी क्रम में साल 2009 में सभी बच्चों को शिक्षा का अधिकार भी दिया गया।"
सतत विकास का चौथा लक्ष्य खास तौर पर उचित और गुणवत्तापूर्ण प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षा की बात करता है। इसके अलावा लैंगिक भेदभाव को समाप्त करने, तकनीकी और पेशेवर हुनर बढ़ाने की बात भी इसमें की गई है, लेकिन दुर्भाग्यवश सरकार ने एसडीजी-4 को अंगीकृत करने के बाद इसके लिए कोई रोडमैप तैयार नहीं किया। बाद में एसडीजी संकेतक संरचना का मसौदा लेकर आई और लोगों से इसपर सलाह मांगी। लेकिन सलाह देने के लिए तय की गई समायावधि इतनी बड़ी जनसंख्या वाले देश में इनपुट हासिल करने के लिए पर्याप्त साबित नहीं हुई।
बयान के मुताबिक, "एसडीजी-4 के लक्ष्यों पर विचार करते हुए नेशनल कोलिशन फॉर एजुकेशन ने एक सप्ताह की लंबी गतिविधि चलाई गई। इस गतिविधि को ग्लोबल एक्शन वीक फॉर एजुकेशन कहा गया। इसका आयोजन 24 राज्यों में किया गया और इसका समापन एक मई 2017 को नई दिल्ली में हुआ।"
जेएनयू के प्रोफेसर अजय कुमार, प्रोफेसर पूनम बत्रा के अलावा दिल्ली विश्वविद्यालय के विजय वर्मा, संसद सदस्य उदित राज, दद्दन मिश्र, सिविल सोसाइटी संगठन के प्रतिनिधि अजय झा, अंजेला तनेजा, रमाकांत राय और शिक्षक संघ के रामपाल सिंह के अलावा इस परिचर्चा में विद्यार्थियों ने भी हिस्सा लिया।
परिचर्चा के दौरान शिक्षा बजट में हुई कटौती, निजी स्कूलों के बढ़ते रुझान, स्कूलों में गिरता गुणवत्ता का स्तर, सामाजिक और आर्थिक रूप से पिछड़े बच्चों के स्कूली दाखिले में घटती संख्या सहित एसडीजी-4 के लक्ष्यों और भारत में समस्याओं को सुलझाने में इसकी भूमिका पर चर्चा की गई।


