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हड़ताल पर गफलत, परिवहन आयुक्त ने कहा हड़ताल खत्म, उसके बाद भी हड़ताल पर बैठे रहे आरटीओ वी कर्मचारी
जिस समय परिवहन आयुक्त देशबन्धु को हड़ताल खत्म होने की जानकारी दे रहे थे 2 बीजे चुके थे। और उनके कार्यलय के सामने आरटीओ कार्यलय है जहां पर आरटीओ सहित सभी कर्मचारी हड़ताल पर बैठे हुए थे

ग्वालियर: मध्य प्रदेश परिवहन अधिकारी संगठन ने 7 सूत्रीय मांगों को लेकर सोमवार से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने का निर्णय लिया। भोपाल स्थित ११ क्वार्टर मुख्यालय पर प्रदेश के कई आरटीओ धरने पर बैठे रहे। इसी क्रम में ग्वालियर परिवहन विभाग कार्यालय में भी अधिकारी व कर्मचारी हड़ताल पर बैठे नजर आए। देशबन्धु संवाददाता गजेन्द्र इंगले जब मध्यप्रदेश परिवहन आयुक्त मुख्यालय पहुंचे और आयुक्त संजय कुमार झा से पूछा कि प्रदेश में हड़ताल है और इससे जनता को परेशानी हो सकती है। तो उन्होंने बताया कि ज्ञापन मिला है पहली बार यह समस्याएं मेरे सामने आई हैं। आश्वासन के बाद आरटीओ कर्मी संगठन ने हड़ताल स्थगित कर दी है। और उन k तरफ से वॉट्सएप पर मैसेज 12.15 पर ही मिल गया है।
यहां आरटीओ हड़ताल पर गफलत यूं नजर आई कि जिस समय परिवहन आयुक्त देशबन्धु को यह जानकारी दे रहे थे 2 बीजे चुके थे। और उनके कार्यलय के सामने आरटीओ कार्यलय है जहां पर आरटीओ सहित सभी कर्मचारी हड़ताल पर बैठे हुए थे। जो लगभग चार बजे तक वहीं हड़ताल पर बैठे रहे। प्रश्न यह उठता है कि यदि हड़ताल स्थगित हो गई तो फिर यह सभी काम पर क्यूं नहीं लौटे? कार्यालय के बाहर ही क्यूं बैठे रहे? परिवहन आयुक्त को जो वॉट्सएप मैसेज किया गया उस पर आयुक्त ने गम्भीरता से हड़ताल ख़तम क्यूं नहीं कराई?
लगभग दो बजे दिए बयान में आरटीओ एच के सिंह का कहना था कि इससे पहले, संगठन के पदाधिकारी निरंतर मांगों को लेकर परिवहन आयुक्त व शासन स्तर के अधिकारियों को ज्ञापन दे रहे थे। हड़ताल में परिवहन विभाग में कार्यरत तृतीय वर्ग कर्मचारी भी शामिल रहे। परिवहन अधिकारियों का कहना है कि हड़ताल से आरटीओ व डीटीओ संबंधी कार्य प्रभावित होना तय है। जब तक मांगें पूरी नहीं होंगी, तब तक हड़ताल जारी रहेगी।मध्यप्रदेश परिवहन राजपत्रित अधिकारी संघ की प्रमुख मांगों में परिवहन विभाग के अधिकारियों का वेतन विसंगति समस्या दूर करने, कैडर रिव्यू करने, बस हादसा होने पर आरटीओ की जिम्मेदारी नहीं मानी जाने, विभाग में कार्यरत लिपिक को परिवहन उप निरीक्षक के पद पर नियुक्ति दी जाने तथा अन्य कार्यों में आरटीओ कर्मचारियों को संलग्न नहीं किए जाने की मांगें शामिल है।
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