धारा 377 को हटाने के लिए देश में आम राय बनाने की जरूरत: रविशंकर
विशंकर प्रसाद ने आज लोकसभा में समलैंगिकों के सम्बन्ध को अपराध की श्रेणी में रखने वाले भारतीय दंड संहिता की धारा 377 को हटाने के लिए देश में आम राय बनाने की जरूरत बतायी।

नयी दिल्ली। केंद्रीय विधि एवं न्याय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने आज लोकसभा में समलैंगिकों के सम्बन्ध को अपराध की श्रेणी में रखने वाले भारतीय दंड संहिता की धारा 377 को हटाने के लिए देश में आम राय बनाने की जरूरत बतायी।
प्रसाद ने ‘निरसन और संशोधन विधेयक -2017 ’पर सदन में हुई चर्चा का जवाब देते हुए कहा कि इस प्रावधान को लेकर अलग -अलग लोगों के अलग -अलग विचार हैं ।
इसे हटाने के लिए देश में आम राय कायम किये जाने की जरूरत है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह उनके मंत्रालय के नहीं बल्कि गृह मंत्रालय का मामला है। इससे पहले चर्चा में हिस्सा लेते हुए बीजू जनता दल के पिनाकी मिश्रा ने इस धारा को हटाने की पुरजोर वकालत करते हुए कहा कि दो वयस्कों के बीच यौन सम्बन्धों को अपराध करार देने वाले इस प्रावधान से देश के करोड़ों समलैंगिंक प्रभावित हैं ।
मिश्रा ने कहा कि दिल्ली उच्च न्यायालय इसे निरस्त कर चुकी है और उच्चतम न्यायालय ने इस पर कानून बनाने की जिम्मेदारी संसद पर छोड़ी है। उन्होंने कहा कि इस पर कानून बनाने की जिम्मेदारी हमारी है और संसद में इस पर बहस होनी चाहिए।
मिश्रा ने कहा कि हम 21वीं सदी में जी रहे हैं । प्रगतिशील और प्रबुद्ध होने का दावा करने वाली मोदी सरकार को इसके लिए गंभीर शुरूआत करनी चाहिए। उन्होंने उम्मीद जतायी कि रविशंकर प्रसाद के कार्यकाल में यह पुराना प्रावधान समाप्त होगा।


