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विपक्षी एकता की पहल से दूर हैं नवीन, कांग्रेस बोली : उन्हें जांच एजेंसियों का है डर

जब भी तीसरे मोर्चे या गैर-भाजपा या गैर-कांग्रेसी दलों के साझा राजनीतिक मंच के गठन की बात होती है

विपक्षी एकता की पहल से दूर हैं नवीन, कांग्रेस बोली : उन्हें जांच एजेंसियों का है डर
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भुवनेश्वर। जब भी तीसरे मोर्चे या गैर-भाजपा या गैर-कांग्रेसी दलों के साझा राजनीतिक मंच के गठन की बात होती है, तो कई नेता ओडिशा के मुख्यमंत्री और बीजू जनता दल (बीजद) के अध्यक्ष नवीन पटनायक की ओर देखना शुरू कर देते हैं, जिनकी पार्टी का ओडिशा में बहुत मजबूत आधार है और जो साल 2000 से ही राज्य पर शासन कर रही है।

2014 और 2019 के आम चुनावों से पहले तीसरे मोर्चे के गठन की कोशिशें चल रही थीं। हालांकि, बीजद ने बैठकों को छोड़ने का विकल्प चुना।

अब, जब लोकसभा चुनाव नजदीक आ रहे हैं, फिर से कई क्षेत्रीय और गैर-भाजपा और गैर-कांग्रेसी पार्टियां साझा मंच बनाने के लिए कदम उठाए जा रहे हैं। इस बार भी नवीन पटनायक ने इस तरह की पहल से दूर रहकर यथास्थिति बनाए रखने का विकल्प चुना है।

पटनायक ने खुद को राष्ट्रीय राजनीति में शामिल करने में ज्यादा दिलचस्पी नहीं दिखाई है। उनकी क्षेत्रीय पार्टी हमेशा कहती है कि उनका ध्यान ओडिशा और उसके लोगों पर है।

हाल ही में बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी ने पटनायक से चर्चा की थी। हालांकि नेताओं ने कहा है कि उन्होंने किसी भी राजनीतिक या गठबंधन पर चर्चा नहीं की, लेकिन राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि ममता और नीतीश कुमार दोनों यहां तीसरे मोर्चे के गठन के लिए पटनायक का समर्थन लेने आए थे।

हालांकि, नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ अपनी बैठक के तुरंत बाद पटनायक ने घोषणा की कि वह तीसरे मोर्चे में शामिल नहीं होने जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि चूंकि वह भाजपा और कांग्रेस दोनों से समान दूरी के सिद्धांत पर कायम हैं, इसलिए बीजद अगला चुनाव अकेले लड़ेगी।

2009 में बीजद-भाजपा गठबंधन सरकार के टूटने के बाद नवीन पटनायक भाजपा और कांग्रेस, दोनों से समान दूरी बनाए हुए हैं। इसके अलावा, उन्होंने नीतीश कुमार और ममता बनर्जी जैसे विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ भी अच्छे संबंध बनाए रखे हैं।

यूपीए-2 और मोदी सरकार के दौरान बीजद ने कांग्रेस और भाजपा दोनों और तीसरे मोर्चे या अन्य आम राजनीतिक ताकतों से समान दूरी बनाए रखी।

ओडिशा के मुख्यमंत्री के इस चतुर कदम से उन्हें भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व के सामने अच्छी प्रतिष्ठा बनाए रखने में मदद मिली है।

ओडिशा में बीजद अपने राजनीतिक विरोधियों के रूप में भाजपा और कांग्रेस के साथ लड़ती रही है। पहले कांग्रेस प्रमुख विपक्षी दल थी, अब भाजपा है। यह देखा गया है कि पटनायक और उनकी पार्टी बीजद के नेताओं ने हमेशा अपना हमला ओडिशा भाजपा या कांग्रेस नेताओं तक ही सीमित रखा। कभी-कभी वे केंद्रीय मंत्रियों का प्रतिवाद या आलोचना करते हैं।

बीजद के वरिष्ठ उपाध्यक्ष देवी प्रसाद मिश्रा ने कहा कि बीजद ओडिशा के लाभ के लिए भाजपा और कांग्रेस से समान दूरी बनाए हुए है। मिश्रा ने कहा, हम ओडिशा के हितों को ध्यान में रखते हुए केंद्र को मुद्दा आधारित समर्थन दे रहे हैं।

प्रस्तावित तीसरे मोर्चे से बाहर रहने के बीजद के फैसले पर टिप्पणी करते हुए कांग्रेस नेता ताराप्रसाद बाहिनीपति ने कहा कि पटनायक ने यह फैसला इसलिए लिया, ताकि सीबीआई, ईडी और आईटी जैसी केंद्रीय जांच एजेंसियां ओडिशा में सक्रिय न हों। उन्होंने दावा किया, ''नवीन अगर तीसरे मोर्चे में शामिल होते हैं तो सीबीआई और ईडी बीजद नेताओं के यहां छापेमारी शुरू कर देंगे।''

स्थानीय राजनीतिक पर्यवेक्षक प्रसन्ना मोहंती के अनुसार, नवीन पटनायक की समान दूरी की नीति का अर्थ है भाजपा और कांग्रेस के साथ समान मित्रता, ताकि कोई भी उन्हें राजनीतिक दुश्मन न समझे।

अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि बीजद के फैसले का ओडिशा की राजनीति पर क्या प्रभाव पड़ेगा, क्योंकि अगले विधानसभा और लोकसभा चुनाव में कुछ ही महीने बचे हैं।


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