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महाराष्ट्र में 25 से 28 सितंबर तक बारिश के आसार

दक्षिण-पश्चिम मानसून की वापसी शुरू हो गयी है। मौसम विभाग (आईएमडी) ने घोषणा की है कि पश्चिमी राजस्थान के कुछ हिस्सों से मानसून का लौटना शुरू हो गया है

महाराष्ट्र में 25 से 28 सितंबर तक बारिश के आसार
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विदर्भ और मराठवाड़ा में तेज बारिश की चेतावनी

  • पश्चिमी राजस्थान से मानसून की वापसी शुरू
  • बंगाल की खाड़ी में कम दबाव का क्षेत्र बना
  • चक्रवाती तूफान बनने की संभावना से बढ़ी चिंता

पुणे। दक्षिण-पश्चिम मानसून की वापसी शुरू हो गयी है। मौसम विभाग (आईएमडी) ने घोषणा की है कि पश्चिमी राजस्थान के कुछ हिस्सों से मानसून का लौटना शुरू हो गया है।

इसके साथ ही बंगाल की खाड़ी के ऊपर कम दबाव का क्षेत्र बन गया है, जिसके अगले कुछ दिनों में और तीव्र होने की संभावना है। इसके प्रभाव से महाराष्ट्र के कई हिस्सों और अन्य क्षेत्रों में बारिश का एक और दौर देखने को मिल सकता है।

आईएमडी के पूर्वानुमान के अनुसार, 25 से 28 सितंबर के बीच महाराष्ट्र के कई हिस्सों में बारिश के आसार है। विदर्भ और मराठवाड़ा में कुछ स्थानों पर तेज से बहुत तेज बारिश होने की उम्मीद है, जबकि राज्य के अन्य हिस्सों में भी बारिश का दौर फिर से शुरू हो सकता है।

पश्चिमी राजस्थान से मानसून की वापसी शुरू होने की सामान्य तिथि 17 सितंबर है। इस वर्ष हालांकि वापसी में थोड़ी देरी हुई है। यह लगभग दो दिन बाद शुरू हुई है। आईएमडी ने कहा कि पश्चिमी राजस्थान के ऊपर एक विपरीत चक्रवातीय परिसंचरण बन गया है, जबकि इस क्षेत्र में लगातार पांच दिनों से मौसम शुष्क बना हुआ है। उपग्रह से प्राप्त चित्रों ने भी वायुमंडलीय नमी में कमी का संकेत दिया है, जिससे इस बात की पुष्टि होती है कि क्षेत्र से मानसून वापस लौटना शुरू हो गया है।

वापस लौट रहे मानसून की दक्षिणी सीमा वर्तमान में रामगढ़, मोहनगढ़, फलोदी और खाजूवाला से होकर गुजर रही है। मौसम विभाग का अनुमान है कि अगले तीन से चार दिनों के दौरान राजस्थान के बाकी हिस्सों के साथ-साथ सौराष्ट्र, कच्छ और पंजाब के कुछ इलाकों से भी मानसून वापस लौट जायेगा।

एक तरफ जहां मानसून की वापसी शुरू हो गयी है, वहीं दूसरी तरफ बंगाल की खाड़ी के ऊपर एक और महत्वपूर्ण मौसम प्रणाली आकार ले रही है। शनिवार रात उत्तरी अंडमान सागर के ऊपर कम दबाव का क्षेत्र बना है। इस प्रणाली के उत्तर-पश्चिम दिशा में बढ़ने और 21 सितंबर तक दाब क्षेत्र में बदलने के आसार हैं।

प्रचलित वायुमंडलीय परिस्थितियों के आधार पर यह 22 सितंबर तक और मजबूत होकर 'गहरे दाब क्षेत्र' में तब्दील हो सकता है।

इस प्रणाली के दक्षिण ओडिशा और उत्तरी आंध्र प्रदेश के तटीय इलाकों की ओर बढ़ने की उम्मीद है। मौसम विशेषज्ञों ने इसके और तीव्र होने का अनुमान जताया है, जहां 23 सितंबर के आसपास परिस्थितियां चक्रवाती तूफान के निर्माण के अनुकूल हो सकती हैं।

जीएफएस मॉडल के अनुसार, ताकत हासिल करने के बाद यह प्रणाली ओडिशा-आंध्र प्रदेश तट से जमीनी इलाकों की ओर बढ़ते हुए मध्य प्रदेश का रुख कर सकती है। यदि यह प्रणाली अनुमानित मार्ग पर आगे बढ़ती है, तो यह महाराष्ट्र के मौसम को प्रभावित कर सकती है, जिससे 25 से 28 सितंबर के बीच राज्य के कई हिस्सों में बारिश हो सकती है।

इस अवधि में विदर्भ और मराठवाड़ा में कुछ स्थानों पर तेज से बहुत तेज बारिश का दौर देखने को मिल सकता है, जबकि महाराष्ट्र के अन्य क्षेत्रों में भी बारिश में तेजी आ सकती है। इस प्रणाली की आगे की हलचल, तीव्रता और वायुमंडलीय परिस्थितियों के आधार पर पूर्वानुमान में बदलाव हो सकता है।


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