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US Iran War: पश्चिम एशिया में जंग... लेकिन भारत में क्‍यों गिर गए अंडे के दाम? इतने हुए सस्‍ते

खाड़ी देशों में अस्थिर हालात और परिवहन मार्गों में आई बाधाओं के कारण भारत से होने वाला व्यापार बुरी तरह प्रभावित हुआ है। इसका सीधा असर खासतौर पर कृषि उत्पादों और खाद्य वस्तुओं के निर्यात पर पड़ा है।

US Iran War: पश्चिम एशिया में जंग... लेकिन भारत में क्‍यों गिर गए अंडे के दाम? इतने हुए सस्‍ते
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नई दिल्‍ली: Egg Prices Dropped In India: पश्चिम एशिया में बढ़ते सैन्य तनाव का असर अब वैश्विक व्यापार पर भी साफ दिखाई देने लगा है। खाड़ी देशों में अस्थिर हालात और परिवहन मार्गों में आई बाधाओं के कारण भारत से होने वाला व्यापार बुरी तरह प्रभावित हुआ है। इसका सीधा असर खासतौर पर कृषि उत्पादों और खाद्य वस्तुओं के निर्यात पर पड़ा है। इन हालातों के चलते खाड़ी देशों को भेजे जाने वाले भारतीय अंडों के निर्यात में भारी गिरावट आई है, जिसका असर अब घरेलू बाजार में भी देखने को मिल रहा है। निर्यात रुकने से देश में अंडों की आपूर्ति अचानक बढ़ गई है और इसके चलते कीमतों में तेज गिरावट दर्ज की गई है।

थोक और खुदरा कीमतों में बड़ी गिरावट

व्यापारिक सूत्रों के अनुसार, हाल के दिनों में बेंगलुरु के थोक बाजार में अंडों की कीमतें लगभग 7 रुपये प्रति अंडा से गिरकर करीब 5 रुपये प्रति अंडा तक पहुंच गई हैं। थोक खरीदार अब लगभग 500 रुपये में 100 अंडे खरीद पा रहे हैं। वहीं खुदरा बाजार में भी कीमतों में काफी गिरावट आई है। दुकानों पर अंडे आम उपभोक्ताओं को लगभग 5.50 से 6 रुपये प्रति अंडा के हिसाब से मिल रहे हैं, जबकि कुछ समय पहले तक इनकी कीमत 8 से 9 रुपये प्रति अंडा तक पहुंच गई थी। विशेषज्ञों का कहना है कि यह गिरावट मुख्य रूप से निर्यात में आई बाधाओं के कारण हुई है।

खाड़ी देशों के साथ व्यापार प्रभावित

वर्तमान संकट के कारण भारत का संयुक्त अरब अमीरात, ओमान, कतर और बहरीन जैसे खाड़ी देशों के साथ व्यापार प्रभावित हुआ है। सुरक्षा संबंधी चिंताओं और समुद्री परिवहन मार्गों में व्यवधान के कारण कई निर्यातक फिलहाल माल भेजने में हिचकिचा रहे हैं। खाड़ी देश भारतीय अंडों के बड़े आयातक माने जाते हैं। लेकिन हालिया तनाव और लॉजिस्टिक चुनौतियों के कारण इन बाजारों में आपूर्ति लगभग ठप हो गई है। इससे भारतीय बाजार में अंडों की अतिरिक्त उपलब्धता पैदा हो गई है।

रोजाना एक करोड़ अंडों का निर्यात होता था

निर्यात उद्योग से जुड़े अनुमान बताते हैं कि संकट से पहले भारत से खाड़ी देशों को हर दिन करीब एक करोड़ अंडों का निर्यात किया जाता था। लेकिन जब से क्षेत्र में तनाव बढ़ा है और व्यापार मार्गों में बाधा आई है, तब से निर्यात के लिए तैयार किए गए अंडों को घरेलू बाजार में ही भेजना पड़ रहा है। इससे अचानक आपूर्ति बढ़ गई और कीमतों में गिरावट आ गई। उद्योग सूत्रों के मुताबिक भारत में उत्पादित अंडों का एक बड़ा हिस्सा आमतौर पर निर्यात के लिए भेजा जाता है और इनमें खाड़ी देशों की हिस्सेदारी काफी महत्वपूर्ण रहती है।

निर्यात ठप होने से बढ़ी आपूर्ति

निर्यात में आई रुकावट के साथ-साथ रमजान के दौरान खाद्य खपत के पैटर्न में बदलाव ने भी मांग को प्रभावित किया है। इससे खाड़ी देशों में अंडों की मांग और कम हो गई। नतीजतन, निर्यात के लिए तैयार अतिरिक्त स्टॉक भारतीय बाजार में आ गया। इससे थोक और खुदरा दोनों बाजारों में कीमतों पर दबाव बढ़ा और दाम तेजी से गिर गए। मुर्गीपालन उद्योग से जुड़े लोगों का कहना है कि कीमतों में यह गिरावट उपभोक्ताओं के लिए भले ही राहत लेकर आई हो, लेकिन इससे उन किसानों और उत्पादकों को नुकसान हो सकता है जो अपनी आय के लिए निर्यात पर निर्भर रहते हैं।

उपभोक्ताओं के लिए राहत

दूसरी ओर, कीमतों में आई इस गिरावट से आम उपभोक्ताओं को काफी राहत मिली है। कई परिवारों ने पिछले कुछ महीनों में अंडों की ऊंची कीमतों के कारण इसका सेवन कम कर दिया था। अब कम कीमतों के कारण अंडे एक बार फिर आम लोगों के लिए सुलभ प्रोटीन स्रोत बनते जा रहे हैं। बाजार में मांग बढ़ने के संकेत भी मिलने लगे हैं, क्योंकि कम कीमतों पर अधिक लोग अंडे खरीद रहे हैं।

पोषण का सस्ता स्रोत

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार अंडा संतुलित आहार का एक महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। लगभग 100 ग्राम अंडे में करीब 155 कैलोरी और 12.6 ग्राम प्रोटीन पाया जाता है। इसमें विटामिन, मिनरल और अन्य पोषक तत्व भी मौजूद होते हैं, जो शरीर के लिए फायदेमंद होते हैं। इसी कारण अंडों को प्रोटीन का एक सस्ता और प्रभावी स्रोत माना जाता है।

किसानों के लिए चुनौती

हालांकि उपभोक्ताओं के लिए यह स्थिति फायदेमंद हो सकती है, लेकिन मुर्गीपालन उद्योग के लिए यह चिंता का विषय बन सकती है। अगर निर्यात लंबे समय तक प्रभावित रहता है तो किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले समय में यह इस बात पर निर्भर करेगा कि पश्चिम एशिया में हालात कब सामान्य होते हैं और खाड़ी देशों के साथ व्यापार कब दोबारा पटरी पर लौटता है। फिलहाल बाजार में अतिरिक्त आपूर्ति के कारण अंडों की कीमतें नीचे बनी रहने की संभावना जताई जा रही है। 🥚📉


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