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युद्ध के बीच ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन से पीएम मोदी ने की बात, जानें किन मुद्दों पर हुई चर्चा

फोन पर हुई इस बातचीत के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने पश्चिम एशिया में तेजी से बढ़ते तनाव, आम नागरिकों की मौत और सिविल इंफ्रास्ट्रक्चर को हो रहे नुकसान पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि संघर्ष की स्थिति जितनी लंबी चलेगी, उतना ही इसका असर क्षेत्रीय शांति, वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ेगा।

युद्ध के बीच ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन से पीएम मोदी ने की बात, जानें किन मुद्दों पर हुई चर्चा
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नई दिल्‍ली। US Iran War: पश्चिम एशिया में बढ़ते सैन्य तनाव के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ईरान के राष्ट्रपति डॉ. मसूद पेजेशकियन से फोन पर बातचीत की। इस बातचीत में दोनों नेताओं ने क्षेत्र में तेजी से बिगड़ती सुरक्षा स्थिति, बढ़ते संघर्ष और इसके वैश्विक प्रभावों पर विस्तार से चर्चा की। प्रधानमंत्री मोदी ने मौजूदा हालात को लेकर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि क्षेत्र में बढ़ती हिंसा और अस्थिरता पूरी दुनिया के लिए गंभीर चुनौती बन सकती है।

क्षेत्रीय हालात पर गहरी चिंता

फोन पर हुई इस बातचीत के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने पश्चिम एशिया में तेजी से बढ़ते तनाव, आम नागरिकों की मौत और सिविल इंफ्रास्ट्रक्चर को हो रहे नुकसान पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि संघर्ष की स्थिति जितनी लंबी चलेगी, उतना ही इसका असर क्षेत्रीय शांति, वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ेगा। प्रधानमंत्री ने कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में सभी पक्षों को संयम बरतना चाहिए और ऐसे कदम उठाने चाहिए जिससे तनाव कम हो सके। उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी अंतरराष्ट्रीय संकट का स्थायी समाधान केवल संवाद और कूटनीतिक प्रयासों के जरिए ही संभव है।

भारतीय नागरिकों की सुरक्षा प्राथमिकता

बातचीत के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने स्पष्ट किया कि संकट की इस स्थिति में विदेशों में रह रहे भारतीय नागरिकों की सुरक्षा और उनकी सलामती भारत सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि सरकार स्थिति पर लगातार नजर रखे हुए है और जरूरत पड़ने पर भारतीयों की सुरक्षा के लिए हर संभव कदम उठाए जाएंगे। इसके साथ ही प्रधानमंत्री ने ऊर्जा आपूर्ति और आवश्यक वस्तुओं की निर्बाध आवाजाही के महत्व पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि वैश्विक स्तर पर ऊर्जा आपूर्ति में बाधा आने से कई देशों की अर्थव्यवस्था प्रभावित हो सकती है, इसलिए समुद्री व्यापार मार्गों को सुरक्षित और खुला बनाए रखना बेहद जरूरी है।

संवाद और कूटनीति पर भारत का जोर

प्रधानमंत्री मोदी ने बातचीत के दौरान दोहराया कि भारत हमेशा से शांति और स्थिरता का समर्थक रहा है। उन्होंने सभी पक्षों से संयम बरतने और हालात को बिगड़ने से रोकने की अपील की। उन्होंने कहा कि मौजूदा तनाव को कम करने के लिए बातचीत और कूटनीतिक प्रयास ही सबसे प्रभावी रास्ता हैं। भारत का मानना है कि जटिल अंतरराष्ट्रीय विवादों का समाधान सैन्य टकराव के बजाय संवाद के माध्यम से ही निकाला जाना चाहिए।

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर भारत की चिंता

इस बीच स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जहाजों की आवाजाही को लेकर भारत की चिंता भी बढ़ गई है। यह समुद्री मार्ग दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल और गैस परिवहन मार्गों में से एक है, जो फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी से जोड़ता है। भारत समेत कई देशों की ऊर्जा आपूर्ति इसी रास्ते से होकर गुजरती है। सूत्रों के मुताबिक, अमेरिका और इजराइल के साथ बढ़ते संघर्ष के बीच ईरान ने इस मार्ग पर आवाजाही को आंशिक रूप से सीमित कर दिया है। इससे भारतीय ध्वज वाले व्यापारिक जहाजों और तेल टैंकरों की आवाजाही प्रभावित हुई है।

जयशंकर और ईरानी विदेश मंत्री के बीच बातचीत

इस मुद्दे पर भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने भी अपने ईरानी समकक्ष अब्बास अराघची से बातचीत की है। विदेश मंत्रालय के अनुसार, दोनों नेताओं के बीच हुई चर्चा में समुद्री सुरक्षा, ऊर्जा आपूर्ति और क्षेत्रीय स्थिति से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर विचार किया गया। सूत्रों के मुताबिक, भारत ईरान के साथ लगातार संपर्क में है ताकि भारतीय ध्वज वाले व्यापारिक जहाजों को सुरक्षित मार्ग मिल सके। भारत इस रणनीतिक समुद्री रास्ते से गुजरने वाले अपने जहाजों और ऊर्जा टैंकरों की सुरक्षा सुनिश्चित करना चाहता है।

भारतीय टैंकरों की आवाजाही प्रभावित

रिपोर्टों के अनुसार, पिछले चार से पांच दिनों के दौरान ईरान ने किसी भी भारतीय ध्वज वाले वाणिज्यिक टैंकर को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने की अनुमति नहीं दी है। इससे भारत के लिए ऊर्जा आपूर्ति और समुद्री व्यापार को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं। ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के मुताबिक, भारत ईरान के साथ बातचीत कर रहा है ताकि इस अहम समुद्री मार्ग से लगभग 20 तेल और गैस टैंकरों के सुरक्षित गुजरने की अनुमति सुनिश्चित की जा सके। यह मार्ग वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति का एक बड़ा केंद्र माना जाता है और यहां किसी भी तरह की रुकावट का असर अंतरराष्ट्रीय बाजार पर भी पड़ सकता है।

वैश्विक स्तर पर बढ़ सकती है चिंता

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में तनाव बढ़ता है या जहाजों की आवाजाही बाधित होती है तो इसका असर केवल क्षेत्रीय देशों तक सीमित नहीं रहेगा। इससे वैश्विक ऊर्जा बाजार, तेल की कीमतों और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर भी व्यापक प्रभाव पड़ सकता है। ऐसे में भारत कूटनीतिक स्तर पर सक्रिय रहते हुए अपने व्यापारिक हितों और ऊर्जा सुरक्षा को सुरक्षित रखने की कोशिश कर रहा है। आने वाले दिनों में पश्चिम एशिया की स्थिति और इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग की स्थिति पर पूरी दुनिया की नजर बनी रहेगी।


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