मोदी सरकार के मंत्री जॉर्ज कुरियन ने दिया इस्तीफा, राष्ट्रपति ने किया मंजूर
65 वर्षीय जॉर्ज कुरियन अगस्त 2024 से मध्य प्रदेश का प्रतिनिधित्व करते हुए राज्यसभा सदस्य थे। उनका कार्यकाल 21 जून 2026 को समाप्त हो गया। 18 जून को हुए राज्यसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने उन्हें दोबारा उम्मीदवार नहीं बनाया था।

नई दिल्ली: केंद्रीय मंत्रिपरिषद में राज्य मंत्री के रूप में कार्यरत जॉर्ज कुरियन ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। मंगलवार को राष्ट्रपति भवन की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति में बताया गया कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सलाह पर उनका इस्तीफा स्वीकार कर लिया है। कुरियन केंद्र सरकार में अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय तथा मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्रालय में राज्य मंत्री की जिम्मेदारी संभाल रहे थे।
राज्यसभा कार्यकाल समाप्त होने के बाद लिया फैसला
65 वर्षीय जॉर्ज कुरियन अगस्त 2024 से मध्य प्रदेश का प्रतिनिधित्व करते हुए राज्यसभा सदस्य थे। उनका कार्यकाल 21 जून 2026 को समाप्त हो गया। 18 जून को हुए राज्यसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने उन्हें दोबारा उम्मीदवार नहीं बनाया था। माना जा रहा है कि इसी के बाद उन्होंने मंत्री पद से इस्तीफा देने का निर्णय लिया।
रवनीत सिंह बिट्टू का भी खत्म हुआ राज्यसभा कार्यकाल
मोदी सरकार के दो केंद्रीय मंत्रियों, जॉर्ज कुरियन और रवनीत सिंह बिट्टू का राज्यसभा सदस्य के रूप में कार्यकाल हाल ही में समाप्त हुआ है। कुरियन मध्य प्रदेश से जबकि बिट्टू राजस्थान से राज्यसभा सांसद थे। भाजपा ने दोनों नेताओं को नए कार्यकाल के लिए टिकट नहीं दिया। हालांकि, जहां जॉर्ज कुरियन ने मंत्री पद छोड़ दिया है, वहीं रवनीत सिंह बिट्टू फिलहाल मंत्रिमंडल में बने हुए हैं। दोनों नेताओं को दोबारा मौका न मिलने के बाद केंद्रीय मंत्रिमंडल में संभावित फेरबदल की चर्चाएं तेज हो गई हैं।
केरलम भाजपा के प्रमुख चेहरों में शामिल रहे कुरियन
1960 में केरलम के कोट्टायम में जन्मे जॉर्ज कुरियन पेशे से सुप्रीम कोर्ट के वकील हैं। भारतीय जनता पार्टी की स्थापना के शुरुआती दौर से ही वे पार्टी से जुड़े रहे हैं और लंबे समय से संगठन के सक्रिय कार्यकर्ता रहे हैं। मंत्री बनने से पहले वे राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग के उपाध्यक्ष के रूप में भी अपनी सेवाएं दे चुके हैं।
मोदी और अमित शाह के भाषणों का करते थे मलयालम अनुवाद
जॉर्ज कुरियन टीवी बहसों में भाजपा के प्रमुख प्रवक्ताओं में गिने जाते रहे हैं। केरलम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के कार्यक्रमों के दौरान वह अक्सर उनके भाषणों का मलयालम भाषा में अनुवाद करते नजर आते थे। इससे उन्हें राज्य में भाजपा के एक प्रभावशाली चेहरे के रूप में पहचान मिली।
ईसाई समुदाय के बीच पार्टी की पहुंच बढ़ाने की रणनीति
जॉर्ज कुरियन केरलम के प्रमुख ईसाई संप्रदाय सीरो-मालाबार कैथोलिक चर्च से जुड़े हैं। 2024 में मोदी सरकार के तीसरे कार्यकाल में उन्हें मंत्री बनाए जाने को केरलम के ईसाई समुदाय के बीच भाजपा की पैठ मजबूत करने की रणनीति के रूप में देखा गया था। पार्टी को उम्मीद थी कि इससे राज्य में उसका जनाधार बढ़ेगा। हालांकि, 2026 के केरल विधानसभा चुनाव में भाजपा को अपेक्षित सफलता नहीं मिली और 140 सदस्यीय विधानसभा में पार्टी केवल तीन सीटें जीत सकी।
राज्यसभा चुनाव के बाद बढ़ीं अटकलें
18 जून को 12 राज्यों की 26 राज्यसभा सीटों के लिए चुनाव हुए थे। इनमें मध्य प्रदेश, राजस्थान, झारखंड, कर्नाटक, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, ओडिशा, गुजरात और अन्य राज्य शामिल थे। 26 में से 23 सीटों पर उम्मीदवार निर्विरोध निर्वाचित हुए। इनमें एनडीए के खाते में 19 सीटें गईं, जबकि इंडिया ब्लॉक को छह सीटें मिलीं। भाजपा ने 4 जून को उम्मीदवारों की सूची जारी की थी, जिसमें जॉर्ज कुरियन और रवनीत सिंह बिट्टू को दोबारा मौका नहीं दिया गया। इसके बाद से ही राजनीतिक हलकों में केंद्रीय मंत्रिमंडल में बदलाव की संभावनाओं को लेकर चर्चा तेज हो गई थी। जॉर्ज कुरियन का इस्तीफा इन अटकलों को और बल दे रहा है।


