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Cabinet Meeting: केरल का नाम बदलकर होगा केरलम, इंफ्रास्ट्रक्चर और रेलवे परियेाजनाओं के लिए 12,236 करोड़ रुपये मंजूर

केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बैठक के बाद फैसलों की जानकारी देते हुए बताया कि कुल 12,236 करोड़ रुपये के विभिन्न विकास परियोजनाओं को स्वीकृति दी गई है। इन परियोजनाओं का मुख्य फोकस रेलवे नेटवर्क के विस्तार, शहरी परिवहन को सुदृढ़ करने और विमानन अवसंरचना को मजबूत करने पर है।

Cabinet Meeting: केरल का नाम बदलकर होगा केरलम, इंफ्रास्ट्रक्चर और रेलवे परियेाजनाओं के लिए 12,236 करोड़ रुपये मंजूर
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नई दिल्ली। Union Cabinet meeting: केंद्र सरकार ने प्रशासनिक, बुनियादी ढांचे और रणनीतिक क्षेत्रों से जुड़े कई अहम फैसले लेते हुए केरल का नाम आधिकारिक रूप से बदलकर ‘केरलम’ करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। यह निर्णय प्रधानमंत्री कार्यालय के नए परिसर ‘सेवा तीर्थ’ में आयोजित पहली केंद्रीय मंत्रिमंडल बैठक में लिया गया। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बैठक के बाद फैसलों की जानकारी देते हुए बताया कि कुल 12,236 करोड़ रुपये के विभिन्न विकास परियोजनाओं को स्वीकृति दी गई है। इन परियोजनाओं का मुख्य फोकस रेलवे नेटवर्क के विस्तार, शहरी परिवहन को सुदृढ़ करने और विमानन अवसंरचना को मजबूत करने पर है।

‘केरल’ से ‘केरलम’: सांस्कृतिक पहचान को मान्यता

कैबिनेट ने राज्य का नाम ‘केरल’ से बदलकर ‘केरलम’ करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। ‘केरलम’ नाम मलयालम भाषा में राज्य की पारंपरिक और सांस्कृतिक पहचान को दर्शाता है। राज्य सरकार की ओर से पहले ही इस संबंध में प्रस्ताव पारित किया जा चुका था, जिसे अब केंद्र की स्वीकृति मिल गई है। नाम परिवर्तन की प्रक्रिया में अब संवैधानिक औपचारिकताएं पूरी की जाएंगी। संसद में आवश्यक संशोधन और अधिसूचना जारी होने के बाद यह बदलाव आधिकारिक रूप से लागू होगा।

विकास परियोजनाओं को हरी झंडी

कैबिनेट ने देश में बुनियादी ढांचे को मजबूती देने और कनेक्टिविटी बढ़ाने के उद्देश्य से 12,236 करोड़ रुपये के निवेश को मंजूरी दी है। इसमें रेलवे परियोजनाओं को सबसे बड़ा हिस्सा मिला है।

गोंदिया–जबलपुर रेल लाइन का दोहरीकरण

सबसे बड़ी स्वीकृति 5,236 करोड़ रुपये की है, जो गोंदिया-जबलपुर रेल लाइन के दोहरीकरण के लिए आवंटित की गई है। इस परियोजना से माल और यात्री यातायात की क्षमता बढ़ेगी तथा मध्य भारत में रेल संपर्क अधिक सुगम होगा।

पुनरख–किऊल और गम्हरिया–चांडिल लाइन विस्तार

रेलवे नेटवर्क को और सुदृढ़ करने के लिए पुनरख-किऊल रेलखंड की तीसरी और चौथी लाइन के निर्माण हेतु 2,668 करोड़ रुपये मंजूर किए गए हैं। इसके अलावा गम्हरिया-चांडिल खंड की तीसरी और चौथी लाइन के लिए 1,168 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी गई है। इन परियोजनाओं से माल परिवहन की गति बढ़ेगी और भीड़भाड़ वाले रेलमार्गों पर दबाव कम होगा।

श्रीनगर में नया इंटीग्रेटेड एयरपोर्ट टर्मिनल

विमानन क्षेत्र में बड़ा कदम उठाते हुए कैबिनेट ने श्रीनगर में 1,667 करोड़ रुपये की लागत से एक नया इंटीग्रेटेड एयरपोर्ट टर्मिनल बनाने की मंजूरी दी है। इससे पर्यटन और रक्षा दोनों दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण इस क्षेत्र में यात्री सुविधाओं का विस्तार होगा। नया टर्मिनल आधुनिक तकनीक से लैस होगा और बढ़ते यात्री भार को संभालने में सक्षम होगा। इससे कश्मीर घाटी में कनेक्टिविटी और आर्थिक गतिविधियों को बल मिलने की उम्मीद है।

अहमदाबाद मेट्रो फेज-2बी का विस्तार

शहरी परिवहन को मजबूत करने के लिए अहमदाबाद मेट्रो के फेज-2बी विस्तार को 1,067 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी गई है। इससे शहर के नए इलाकों को मेट्रो नेटवर्क से जोड़ा जाएगा, जिससे यातायात जाम में कमी और प्रदूषण नियंत्रण में मदद मिलेगी। सरकार का लक्ष्य प्रमुख शहरों में सार्वजनिक परिवहन को आधुनिक और सुलभ बनाना है।

ऊर्जा क्षेत्र में सुधार और जूट किसानों को राहत

कैबिनेट ने ऊर्जा क्षेत्र में दक्षता और पारदर्शिता बढ़ाने के लिए नए पावर सेक्टर रिफॉर्म्स को भी मंजूरी दी है। इन सुधारों का उद्देश्य वितरण कंपनियों की वित्तीय स्थिति मजबूत करना और उपभोक्ताओं को बेहतर सेवा प्रदान करना है। कृषि क्षेत्र में, कच्चे जूट के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) तय करने के प्रस्ताव को स्वीकृति दी गई है। इसके लिए 430 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इससे जूट उत्पादक किसानों को आय सुरक्षा मिलेगी और जूट उद्योग को स्थिरता मिलेगी।

दुर्लभ खनिज क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय सहयोग


कैबिनेट बैठक में जर्मनी और कनाडा के साथ दुर्लभ खनिज क्षेत्र में सहयोग समझौतों को मंजूरी दिए जाने की संभावना भी जताई गई है। इन समझौतों का उद्देश्य आधुनिक तकनीक और ऊर्जा सुरक्षा के लिए आवश्यक खनिजों की आपूर्ति सुनिश्चित करना है। जर्मनी के साथ प्रस्तावित समझौते के तहत दोनों देश संयुक्त रूप से दुर्लभ खनिजों का अन्वेषण करेंगे और तकनीकी सहयोग को बढ़ावा देंगे। भारत ‘आत्मनिर्भर भारत’ पहल के तहत लीथियम, कोबाल्ट और निकल जैसे खनिजों की आपूर्ति सुनिश्चित करने पर जोर दे रहा है, जो इलेक्ट्रिक वाहनों, बैटरी निर्माण और आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग के लिए आवश्यक हैं।

सेवा तीर्थ में पहली कैबिनेट बैठक

यह बैठक सुबह 11 बजे शुरू हुई और नए पीएम कार्यालय परिसर ‘सेवा तीर्थ’ में आयोजित पहली कैबिनेट बैठक थी। इससे पहले 13 फरवरी को हुई बैठक साउथ ब्लॉक स्थित पुराने पीएम कार्यालय में आयोजित की गई थी। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, पुराने कार्यालय में आयोजित अंतिम बैठक के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ऐतिहासिक संदर्भों को याद किया। उन्होंने बताया कि देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू को प्रारंभिक चार कैबिनेट बैठकें राष्ट्रपति भवन में करनी पड़ी थीं। प्रधानमंत्री ने यह भी उल्लेख किया कि साउथ ब्लॉक के ‘वार रूम’ में देश के पहले चार बड़े युद्धों की रणनीति तैयार की गई थी।

‘अच्छी खबर’ साझा करने की परंपरा

रिपोर्ट्स के मुताबिक, प्रधानमंत्री साप्ताहिक कैबिनेट बैठकों में केवल एजेंडा बिंदुओं तक सीमित नहीं रहते, बल्कि समसामयिक मुद्दों पर भी चर्चा करते हैं। वे मंत्रियों से फीडबैक लेने के साथ-साथ उनसे यह भी अपेक्षा करते हैं कि वे कोई सकारात्मक या प्रेरणादायक समाचार साझा करें। ‘सेवा तीर्थ’ में हुई पहली बैठक में भी मंत्रियों से ऐसी ‘अच्छी खबर’ साझा करने की उम्मीद जताई गई। इस पहल का उद्देश्य कैबिनेट के भीतर सकारात्मक और प्रेरक माहौल बनाना है।

प्रशासनिक ढांचे का पुनर्गठन

कैबिनेट सचिवालय, जो पहले राष्ट्रपति भवन परिसर में स्थित था, अब ‘सेवा तीर्थ’ में स्थानांतरित कर दिया गया है। सेवा तीर्थ के निकट ही नया प्रधानमंत्री आवास भी निर्माणाधीन है। निर्माण कार्य पूरा होने के बाद नया संसद भवन, प्रधानमंत्री कार्यालय और मंत्रियों के कार्यालय एक ही परिसर या आसपास स्थित होंगे। इससे वीवीआईपी मूवमेंट के कारण होने वाले यातायात अवरोध में कमी आने की उम्मीद है।

रणनीतिक और विकासात्मक संतुलन

केंद्रीय मंत्रिमंडल के ये फैसले एक ओर जहां सांस्कृतिक पहचान और प्रशासनिक पुनर्गठन को दर्शाते हैं, वहीं दूसरी ओर बुनियादी ढांचे, ऊर्जा और कृषि क्षेत्र में संतुलित विकास की दिशा में सरकार की प्राथमिकताओं को भी उजागर करते हैं। ‘केरल’ से ‘केरलम’ नाम परिवर्तन का निर्णय जहां सांस्कृतिक संवेदनशीलता को रेखांकित करता है, वहीं 12,236 करोड़ रुपये की परियोजनाएं देश की परिवहन और कनेक्टिविटी क्षमताओं को नई गति देने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही हैं। अब इन निर्णयों के क्रियान्वयन और उनके जमीनी प्रभाव पर सभी की नजरें टिकी रहेंगी।


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