16 सितंबर की बड़ी खबरें
स्वागत है DW हिन्दी के लाइव ब्लॉग में. यहां आपको दिनभर की तमाम जरूरी और बड़ी खबरें एक साथ मिलेंगी. हम इस पेज को लगातार अपडेट कर रहे हैं

अरब सागर में टकराए भारतीय और पाकिस्तानी नौसेना के जहाज
स्वागत है DW हिन्दी के लाइव ब्लॉग में. यहां आपको दिनभर की तमाम जरूरी और बड़ी खबरें एक साथ मिलेंगी. हम इस पेज को लगातार अपडेट कर रहे हैं.
अरब सागर में टकराए भारतीय और पाकिस्तानी नौसेना के जहाज, भारत ने जताया विरोध
जर्मन चांसलर फ्रीडरिष मैर्त्स पर संकट, आपातकालीन पार्टी बैठक के चलते न्यूयॉर्क नहीं जाएंगे
यूपीआई का फ्री युग खत्म, विपक्ष हमलावर पर पेमेंट कंपनियां खुश
चीन ने अमेरिका को दी अंतरिक्ष में हथियार तैनात न करने की चेतावनी
हूथियों ने किया सऊदी अरब का लड़ाकू विमान गिराने का दावा, मक्का पर हमला करने से इनकार
अरब सागर में टकराए भारतीय और पाकिस्तानी नौसेना के जहाज, भारत ने जताया विरोध
भारत के विदेश मंत्रालय ने बुधवार, 16 सितंबर को बताया कि उन्होंने नई दिल्ली स्थित पाकिस्तानी उच्चायोग के चार्ज डी अफेयर्स को तलब किया और अरब सागर में हुई घटना को लेकर कड़ा विरोध दर्ज किया. भारतीय विदेश मंत्रालय ने अपनी प्रेस रिलीज में लिखा, “समुद्र में पाकिस्तानी नौसैनिक इकाइयों के अस्वीकार्य और गैर-पेशेवर आचरण के कारण भारतीय नौसेना की एक इकाई के साथ टक्कर हुई.”
भारतीय विदेश मंत्रालय ने बताया है कि यह टक्कर अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में हुई. न्यूज एजेंसी रॉयटर्स ने भारतीय सूत्रों के हवाले से बताया है कि यह टक्कर मंगलवार को उत्तरी अरब सागर में हुई, जब पाकिस्तानी नौसेना का एक जहाज तेज रफ्तार में, नियमित निगरानी अभियान में जुटे एक भारतीय नौसैनिक जहाज के करीब पहुंच गया और दोनों जहाजों की टक्कर हो गई.
भारतीय विदेश मंत्रालय ने कहा कि इस टक्कर से कोई बड़ा नुकसान नहीं हुआ लेकिन पाकिस्तानी नौसैनिक जहाज का आचरण, पाकिस्तान और भारत के बीच अप्रैल 1991 में हुए समझौते के आर्टिकल 10 का सीधा उल्लंघन था. इस समझौते में कहा गया है कि दोनों देशों के नौसैनिक जहाजों और पनडुब्बियों को एक-दूसरे से कम से कम तीन समुद्री मील का अंतर बनाकर रखना चाहिए ताकि अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में कोई घटना ना हो.
जर्मन चांसलर फ्रीडरिष मैर्त्स पर संकट, आपातकालीन पार्टी बैठक के चलते न्यूयॉर्क नहीं जाएंगे
जर्मनी के चांसलर फ्रीडरिष मैर्त्स ने रविवार को होने वाले दो राज्यों के चुनावों के तुरंत बाद अपनी पार्टी क्रिश्चियन डेमोक्रेटिक यूनियन (सीडीयू) की कार्यकारी समिति की आपात बैठक बुलाई है. हाल ही में एक राज्य चुनाव में धुर-दक्षिणपंथी पार्टी 'अल्टरनेटिव फॉर जर्मनी' (एएफडी) से मिली करारी हार के बाद 70 वर्षीय मैर्त्स पर अपनी ही पार्टी के भीतर से दबाव लगातार बढ़ रहा है. स्थिति की गंभीरता को देखते हुए मैर्त्स ने न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र की बैठक में जाने का अपना तय दौरा भी रद्द कर दिया है.
यह बैठक रविवार को बर्लिन और मैक्लेनबुर्ग वेस्ट पोमेरेनिया में होने वाली वोटिंग के तुरंत बाद आयोजित की जाएगी. हालिया सर्वेक्षणों के अनुसार, बर्लिन में सीडीयू और वामपंथी दल 'डी लिंके' के बीच कड़ा मुकाबला है, वहीं मैक्लेनबुर्ग वेस्ट पोमेरेनिया में सीडीयू को महज सात फीसदी वोट मिलने की आशंका जताई जा रही है. ताजा जनमत सर्वेक्षणों के मुताबिक, केवल 10 प्रतिशत जनता ही चांसलर मैर्त्स के काम से संतुष्ट है.
माना जा रहा है कि पार्टी के वरिष्ठ नेता उन्हें पद से हटाने की योजना बना रहे हैं. चांसलर पद के संभावित दावेदारों में हेंड्रिक वुस्ट और मार्कस सोडर का नाम चर्चा में है. हालांकि, दबाव के बावजूद मैर्त्स ने मंगलवार को दिए अपने भाषण में कहा, “6 सितंबर को सैक्सनी अनहाल्ट में मिला चुनाव नतीजा इस दिशा में कुछ भी नहीं बदलता है.” राजनीतिक विश्लेषक ओलिवर लेम्बके ने कहा, “मैर्त्स समर्थन जुटाने की कोशिश कर रहे हैं. अगर चुनाव के बाद प्रांतीय नेता उन पर भरोसा नहीं जताते हैं, तो वे मुश्किल में पड़ सकते हैं.”
न्यूजीलैंड की संसद ने भारत के साथ हुए व्यापार समझौते को दी मंजूरी
न्यूजीलैंड की संसद ने भारत के साथ हुए मुक्त व्यापार समझौते को लागू करने के लिए कानून पास कर दिया. इस समझौते के तहत, भारत पर न्यूजीलैंड के करीब 95 फीसदी निर्यात पर टैरिफ हट जाएंगे या काफी हद तक कम हो जाएंगे. इसी तरह सभी भारतीय उत्पादों को न्यूजीलैंड में ड्यूटी-फ्री पहुंच मिलेगी. इसके अलावा, न्यूजीलैंड अगले 15 सालों में भारत में 20 अरब डॉलर का निवेश करने पर भी सहमत हुआ है.
बुधवार, 16 सितंबर को विपक्षी लेबर पार्टी का समर्थन मिलने के बाद 93-29 के अंतर से यह कानून पास हुआ. न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, “लोगों ने मुझसे कहा था कि भारत के साथ मुक्त व्यापार समझौता संभव नहीं है लेकिन आज संसद में इस समझौते को अंतिम मतदान में मंजूरी मिल गई.” उन्होंने आगे लिखा कि इस ऐतिहासिक समझौते का मतलब है न्यूजीलैंड के लोगों के लिए अधिक नौकरियां और ऊंची आय.
न्यूजीलैंड ने उम्मीद जताई है कि यह समझौता इस साल के अंत तक लागू हो जाएगा. न्यूज एजेंसी एएनआई के मुताबिक, भारत के वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने पिछले सप्ताह कहा था कि भारत इस समझौते को "जितनी जल्दी हो सके" लागू करने की कोशिश कर रहा है. उन्होंने अक्टूबर में इसके लागू होने की उम्मीद जताई थी. दोनों देशों ने अप्रैल, 2026 में इस समझौते पर हस्ताक्षर किए थे.
दक्षिण कोरियाई अदालत: कार्यालय उड़ाने पर उत्तर कोरिया दे 313 करोड़ रुपये का मुआवजा
दक्षिण कोरिया की एक अदालत ने उत्तर कोरिया को 44.6 अरब वोन (लगभग 313 करोड़ रुपये) का मुआवजा देने का आदेश दिया है. यह फैसला 2020 में उत्तर कोरिया द्वारा दोनों देशों के अंतर-कोरियाई संपर्क कार्यालय की इमारत को धमाके से उड़ाने के मामले में आया है. दक्षिण कोरियाई समाचार एजेंसी योनहाप के अनुसार, यह पहली बार है जब दक्षिण कोरिया सरकार ने उत्तर कोरिया के खिलाफ कोई कानूनी कार्रवाई की है. हालांकि, दक्षिण कोरिया के पास प्योंगयांग से यह रकम वसूलने का कोई जरिया नहीं है.
यह विवाद जून 2020 में गहराया था जब दक्षिण कोरिया के कार्यकर्ताओं ने उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग उन के खिलाफ पर्चे बांटे थे. इससे नाराज होकर उत्तर कोरिया ने अपनी सीमा में बने इस संपर्क कार्यालय को तबाह कर दिया था. यह कार्यालय सितंबर 2018 में शुरू हुआ था ताकि दोनों देशों के बीच बातचीत और सहयोग को बढ़ावा दिया जा सके. केसोंग स्थित यह केंद्र दोनों देशों के बीच रिश्ते सुधारने और प्योंगयांग के परमाणु कार्यक्रम को खत्म करने की दिशा में एक अहम कदम था.
दोनों देश औपचारिक रूप से आज भी युद्ध की स्थिति में हैं क्योंकि 1950 से 1953 तक चला कोरियाई युद्ध किसी शांति समझौते के बजाय केवल एक युद्धविराम के साथ खत्म हुआ था. ऐसे में केसोंग स्थित यह कार्यालय आपसी संबंधों को मजबूत करने के लिए उठाए गए कुछ ठोस कदमों में से एक था. अदालत के इस आदेश के बाद भी प्योंगयांग से जबरन यह भुगतान करवाना सोल के लिए लगभग नामुमकिन माना जा रहा है.
हूथियों ने किया सऊदी अरब का लड़ाकू विमान गिराने का दावा, मक्का पर हमला करने से इनकार
हूथी विद्रोहियों ने बुधवार, 16 सितंबर को सऊदी अरब का एक लड़ाकू विमान गिराने का दावा किया है. हूथी विद्रोहियों के एक प्रवक्ता ने सोशल मीडिया पर लिखा, "अल्लाह की मदद और रहम से, यमनी सशस्त्र बलों ने स्थानीय तौर पर बनी एयर टू एयर मिसाइल का इस्तेमाल करके सऊदी अरब के एफ15 फाइटर जेट को मार गिराया. यह जेट मारिब प्रांत के हवाई क्षेत्र में हमले कर रहा था." प्रवक्ता ने सऊदी अरब पर 450 हमले करने का आरोप भी लगाया.
इसके साथ ही सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने काहिरा में मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल-फतह अल-सीसी से मुलाकात कर लाल सागर में जहाजों की सुरक्षा को लेकर सहयोग मांगा है. यमन के हूथी विद्रोहियों द्वारा सऊदी अरब के जहाजों और तेल ठिकानों पर लगातार किए जा रहे हमलों के कारण वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें बढ़ रही हैं. क्राउन प्रिंस और मिस्र के राष्ट्रपति ने संयुक्त बयान में कहा, “लाल सागर और बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य में नौवहन की स्वतंत्रता और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए दोनों देश पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं.”
हाल ही में इराक स्थित ईरानी समर्थित गुटों द्वारा सऊदी अरब की ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन पर हुए हमले के बाद तेल आपूर्ति बाधित हुई है. इसके साथ ही हूथी लड़ाकों ने मोखा बंदरगाह और बाब अल-मंदेब के रणनीतिक द्वीपों पर कब्जा जमाकर सऊदी अरब के तेल निर्यात के रास्ते को खतरे में डाल दिया है. रियाद इस समय कूटनीतिक और सैन्य विकल्पों के बीच उलझा हुआ है. इस बीच सऊदी अरब की वायुसेना ने मक्का की ओर आ रहे एक ड्रोन को हवा में ही मार गिराया है. हालांकि, हूथी विद्रोहियों ने मक्का पर हमला करने के आरोपों से इनकार किया है.
चीन ने अमेरिका को दी अंतरिक्ष में हथियार तैनात न करने की चेतावनी
चीन ने अमेरिका से कहा है कि वह अंतरिक्ष में अपनी सैन्य ताकत बढ़ाना तुरंत बंद करे. असल में कल ही वॉशिंगटन ने पहली बार यह माना कि उसने ऑर्बिट में हथियार तैनात कर रखे हैं. चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गुओ जियाकुन ने मंगलवार को एक प्रेस ब्रीफिंग में कहा, “हम अमेरिका से आग्रह करते हैं कि वह अंतरिक्ष में सैन्य प्रसार को रोके और ठोस कदमों के साथ वैश्विक रणनीतिक स्थिरता को बनाए रखे.”
15 सितंबर को अमेरिकी वायु सेना के सचिव ट्रॉय मेंक ने कहा कि अमेरिका के पास अंतरिक्ष में ऐसे हथियार हैं जो दुश्मनों से देश की रक्षा कर सकते हैं. पेंटागन के किसी बड़े अधिकारी ने पहली बार इतनी बड़ी बात स्वीकार की है. इसके जवाब में चीन के सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स ने कहा कि इससे अमेरिका की अंतरिक्ष में दादागिरी की नीयत साफ दिखती है और इससे दुनिया भर में हथियारों की दौड़ शुरू हो सकती है.
सैन्य जानकार सोंग झोंगपिंग ने कहा, “अगर अमेरिका इसी रास्ते पर चलता रहा तो बाकी देश भी जवाब देने के लिए मजबूर हो सकते हैं.” वहीं चीनी समाचार एजेंसी शिन्हुआ के मुताबिक अमेरिका के इस कदम से सुरक्षा में बाधा आने का खतरा है. अन्य देश भी अब अपनी अंतरिक्ष रक्षा क्षमताओं को मजबूत करेंगे जिसे अमेरिका बाद में अपने लिए नया खतरा बताएगा.
यूपीआई का फ्री युग खत्म, विपक्ष हमलावर पर पेमेंट कंपनियां खुश
व्यापारियों को किए जाने वाले 2000 रुपए से अधिक के यूपीआई लेन-देन पर फीस लगाए जाने की घोषणा हुई है. इसके बाद बुधवार, 16 सितंबर के शुरुआती कारोबार में पेटीएम, मोबीक्विक और यस बैंक के शेयरों में दो से आठ फीसदी तक की बढ़त दर्ज की गई. मोबीक्विक की सह-संस्थापक उपासना टाकू ने इसे एक "बहुत ही सकारात्मक कदम" बताते हुए कहा कि इससे पेमेंट इकोसिस्टम को अधिक टिकाऊ बनाने में मदद मिलेगी क्योंकि इन्फ्रास्ट्रक्चर की बढ़ती लागतें बैंकों और पेमेंट कंपनियों पर दबाव बना रही थीं.
नेशनल पेमेंट्स कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (एनपीसीआई) की ओर से 15 सितंबर को एलान किया गया कि 2000 रुपये से ऊपर के पर्सन-टू-मर्चेंट लेन-देनों पर 0.4 फीसदी मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) लगेगा. उदाहरण के लिए 3000 रुपये का लेनदेन करने पर 12 रुपये और 5000 रुपये का लेनदेन करने पर 20 रुपये फीस लगेगी. यह नियम 15 अक्टूबर, 2026 से लागू होगा और इसके तहत प्रति लेनदेन अधिकतम 300 रुपये वसूले जा सकेंगे. वहीं, पर्सन-टू-पर्सन यानी लोगों के बीच होने वाले लेनदेनों पर अभी भी कोई शुल्क नहीं लगेगा.
भारत की मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस ने इसे लूट करार दिया है. कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, “2,000 रुपये से अधिक के यूपीआई लेनदेन पर लगने वाले 0.4 फीसदी एमडीआर को मोदी टैक्स कहा जाना चाहिए. उन्होंने यूपीआई को लोकप्रिय बनाया, "कैशलेस अर्थव्यवस्था" बनाने का सारा श्रेय खुद लेना चाहा और अब वे इसका उपयोग करने वाले लोगों पर टैक्स लगा रहे हैं.”


