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कला के क्षेत्र में योगदान के लिए थिरुवरूर भक्तवत्सलम को पद्मश्री, बोले- ये सपने के सच होने जैसा

केंद्र सरकार ने साल 2026 के लिए पद्म विभूषण, पद्म भूषण और पद्मश्री विजेताओं के नामों का ऐलान किया। गृह मंत्रालय द्वारा जारी सूची में 5 पद्म विभूषण, 13 पद्म भूषण और 113 पद्मश्री पुरस्कार शामिल हैं। कला के क्षेत्र में योगदान के लिए तमिलनाडु के चेन्नई के रहने वाले थिरुवरूर भक्तवत्सलम को पद्मश्री पुरस्कार दिए जाने की घोषणा हुई।

कला के क्षेत्र में योगदान के लिए थिरुवरूर भक्तवत्सलम को पद्मश्री, बोले- ये सपने के सच होने जैसा
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चेन्नई। केंद्र सरकार ने साल 2026 के लिए पद्म विभूषण, पद्म भूषण और पद्मश्री विजेताओं के नामों का ऐलान किया। गृह मंत्रालय द्वारा जारी सूची में 5 पद्म विभूषण, 13 पद्म भूषण और 113 पद्मश्री पुरस्कार शामिल हैं। कला के क्षेत्र में योगदान के लिए तमिलनाडु के चेन्नई के रहने वाले थिरुवरूर भक्तवत्सलम को पद्मश्री पुरस्कार दिए जाने की घोषणा हुई।

केंद्र सरकार द्वारा पद्मश्री दिए जाने की घोषणा के बाद थिरुवरूर भक्तवत्सलम ने समाचार एजेंसी आईएएनएस से बातचीत में कहा, "आज का दिन मेरी जिंदगी का कभी न भूलने वाला दिन है। पद्मश्री पुरस्कार की घोषणा से ऐसा लग रहा है जैसे दुनिया के महान लोगों में मेरा नाम लिया गया हो। पिछले 60 वर्षों से मैंने मृदंगम बजाने के अलावा कोई और काम नहीं किया है। यह दूसरी बार है जब भारत सरकार ने मुझे सम्मानित किया है। इससे पहले मुझे संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार मिला था। पद्मश्री के बाद मेरी इच्छा है कि आगे मिलने वाले सभी बड़े पुरस्कार भी मुझे मिलें। अगर मैं इसी तरह पूरी लगन से इस कला में डूबा रहा तो एक दिन भारत रत्न पाने की भी मेरी चाह है।"

उन्होंने आगे कहा कि मैं इस पद्मश्री की घोषणा को अपने सपने के पूरे होने जैसा मानता हूं। सबसे पहले मैं केंद्र सरकार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु और तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन का धन्यवाद करता हूं। मेरे प्रशंसकों और साथी कलाकारों के आशीर्वाद से ही मैं यहां तक पहुंच पाया हूं। इसमें मीडिया की भी बड़ी भूमिका है।

थिरुवरूर भक्तवत्सलम ने कहा कि अपने 60 साल के संगीत सफर में मैंने कई मुश्किलों का सामना किया है। इस क्षेत्र में आगे बढ़ते समय रुकावटें आती रहती हैं। यह एक समुद्र की तरह है, जहां लहरें कभी नहीं रुकतीं। चाहे कितनी भी आलोचना हो, हमें अपना काम करते रहना चाहिए। हर कलाकार को मुश्किलें आती हैं, लेकिन हमें दुखी होकर बैठना नहीं चाहिए। मेहनत करते रहना और आगे बढ़ते रहना चाहिए। यही संदेश मैं आने वाले कलाकारों को देना चाहता हूं।

उन्होंने आगे कहा कि भगवान में विश्वास बहुत जरूरी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इसे खास तरीके से निभा रहे हैं। काशी से अयोध्या तक इसके कई उदाहरण हैं। उन्होंने कई अहम पहल की हैं, इसके लिए मैं प्रधानमंत्री का आभार व्यक्त करता हूं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में कई अच्छे काम हुए हैं और लगातार हो रहे हैं। उन्होंने गांवों से लेकर कारीगरों तक, खिलौना बनाने वालों से लेकर बढ़ई तक, सभी के काम को देखा और उन्हें सम्मान दिया। इससे देश का विकास आगे बढ़ेगा। मेरे जैसे सामान्य कलाकारों को सम्मान मिलने से दूसरे कलाकारों को भी प्रोत्साहन मिलता है।

तिरुवारूर को एक पवित्र भूमि बताते हुए उन्होंने कहा कि मुझे गर्व है कि मेरा जन्म वहां हुआ। अगर दोबारा जन्म मिला तो भी मैं मृदंगम ही बजाना चाहूंगा। यह कला ही ऐसी है। 1970 के दशक में मैं तिरुवारूर से चेन्नई सिर्फ अपनी कला को निखारने के लिए आया था। उस समय ज्यादातर कलाकार चेन्नई की ओर जा रहे थे। उन दिनों आज जैसी तकनीक नहीं थी, न मोबाइल फोन थे। सीखने के समय सिर्फ याद करके अभ्यास करना पड़ता था। टेप रिकॉर्डर भी नहीं थे। मैं रोज कई घंटों तक अभ्यास करता था।

उन्होंने कहा कि जब भी मुझे कोई पुरस्कार मिलता है तो लगता है कि मुझे और ज्यादा सावधान और अनुशासित होना चाहिए। अपने स्वभाव से लेकर अपने पेशे तक मैं सख्त अनुशासन का पालन करता हूं। यह पुरस्कार मुझे और ऊर्जा देगा। पद्मश्री निश्चित रूप से मेरे लिए प्रेरणा है। मेरा सपना है कि भारत रत्न मिलने तक मैं काम करता रहूं। इसके लिए मैं लगातार मेहनत करता रहूंगा।


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