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किन्नर अखाड़े ने महामंडलेश्वर यामाई ममतानंद गिरि को किया निष्कासित, विवादित बयानों पर कार्रवाई
अखाड़े का कहना है कि ममतानंद गिरि ने अखाड़े की अनुमति के बिना सार्वजनिक मंच पर ऐसे बयान दिए, जिनसे धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंची और अनावश्यक विवाद खड़ा हुआ। इसी आधार पर अनुशासनात्मक कार्रवाई करते हुए उन्हें अखाड़े से बाहर का रास्ता दिखाया गया।

प्रयागराज। जगदगुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को लेकर दिए गए विवादित बयान और पूर्व में मुंबई बम ब्लास्ट के आरोपी दाऊद इब्राहिम पर टिप्पणी के चलते महामंडलेश्वर श्री यामाई ममतानंद गिरि (पूर्व अभिनेत्री ममता कुलकर्णी) को किन्नर अखाड़े से निष्कासित कर दिया गया है। अखाड़े ने उनकी सदस्यता भी समाप्त कर दी है। मंगलवार को किन्नर अखाड़े की आचार्य महामंडलेश्वर डॉ. लक्ष्मीनारायण त्रिपाठी ने एक वीडियो संदेश जारी कर इस फैसले की औपचारिक घोषणा की।
अखाड़े का कहना है कि ममतानंद गिरि ने अखाड़े की अनुमति के बिना सार्वजनिक मंच पर ऐसे बयान दिए, जिनसे धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंची और अनावश्यक विवाद खड़ा हुआ। इसी आधार पर अनुशासनात्मक कार्रवाई करते हुए उन्हें अखाड़े से बाहर का रास्ता दिखाया गया।
क्या है पूरा विवाद?
महामंडलेश्वर यामाई ममतानंद गिरि हाल के दिनों में तब सुर्खियों में आईं, जब उन्होंने जगदगुरु स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को लेकर कड़े और विवादास्पद बयान दिए। एक बयान में उन्होंने गोहत्या के मुद्दे पर चल रहे धरनों का जिक्र करते हुए राजनीतिक दलों से सवाल उठाया और कहा कि क्या कोई ठोस आश्वासन दे सकता है कि उनके शासन में गोहत्या नहीं होगी। इसी क्रम में उन्होंने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और उनके बटुकों का उल्लेख करते हुए कहा कि “दस में से नौ महामंडलेश्वर और तथाकथित शंकराचार्य झूठे हैं” और यह भी सवाल उठाया कि उन्हें शंकराचार्य किसने नियुक्त किया। उनके बयान में यह टिप्पणी भी शामिल थी कि यदि स्नान करना ही था तो पालकी से उतरकर पैदल चलना चाहिए था, क्योंकि कानून सभी के लिए समान है—चाहे राजा हो या रंक। साथ ही उन्होंने धर्म को राजनीति से दूर रखने की बात कही। इन बयानों के सामने आते ही संत समाज और धार्मिक संगठनों में तीखी प्रतिक्रिया हुई, जिसके बाद किन्नर अखाड़े पर भी दबाव बढ़ा कि वह इस मुद्दे पर स्पष्ट रुख अपनाए।
दाऊद इब्राहिम पर बयान से भी उठा था बवाल
यह पहली बार नहीं है जब ममतानंद गिरि विवादों में घिरी हों। कुछ माह पहले उन्होंने मुंबई बम ब्लास्ट के आरोपी दाऊद इब्राहिम को लेकर यह टिप्पणी की थी कि वह आतंकी नहीं है। इस बयान का देशभर में कड़ा विरोध हुआ था और संत समाज के एक वर्ग ने इसे अनुचित बताते हुए नाराजगी जताई थी। हालांकि उस समय अखाड़े की ओर से कोई औपचारिक कार्रवाई नहीं की गई थी, लेकिन ताजा विवाद के साथ पुराने बयान भी फिर चर्चा में आ गए।
महाकुंभ-2025 में लिया था संन्यास
ममता कुलकर्णी ने प्रयागराज महाकुंभ-2025 के दौरान 24 जनवरी को संन्यास की दीक्षा ली थी। किन्नर अखाड़े की आचार्य महामंडलेश्वर डॉ. लक्ष्मीनारायण त्रिपाठी ने उनका पट्टाभिषेक कर उन्हें महामंडलेश्वर की उपाधि प्रदान की थी। इस घटना को किन्नर अखाड़े के लिए एक बड़ा और प्रतीकात्मक कदम माना गया था, क्योंकि इससे अखाड़े को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिली थी। संन्यास के बाद ममतानंद गिरि ने कई सामाजिक और धार्मिक विषयों पर खुलकर बयान देने शुरू किए, लेकिन धीरे-धीरे उनके वक्तव्य विवाद का कारण बनने लगे।
अखाड़े का आधिकारिक पक्ष
मंगलवार को जारी वीडियो संदेश में आचार्य महामंडलेश्वर डॉ. लक्ष्मीनारायण त्रिपाठी ने कहा कि अखाड़ा मौनी अमावस्या के दिन पुलिस द्वारा बटुकों के साथ की गई कथित मारपीट से आहत जरूर है, लेकिन वह इस विवाद से खुद को अलग रखता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि ममतानंद गिरि ने अखाड़े की सहमति के बिना इस मामले में बयानबाजी की, जो अखाड़े की मर्यादा और अनुशासन के खिलाफ है। डॉ. त्रिपाठी ने कहा, “अखाड़े की एक परंपरा और अनुशासन होता है। कोई भी महामंडलेश्वर व्यक्तिगत रूप से ऐसा बयान नहीं दे सकता, जिससे पूरे अखाड़े की छवि प्रभावित हो। इसी कारण ममतानंद गिरि को अखाड़े से निष्कासित किया जा रहा है।”
संत समाज में मिली-जुली प्रतिक्रिया
किन्नर अखाड़े के इस फैसले के बाद संत समाज में मिली-जुली प्रतिक्रियाएं देखने को मिली हैं। एक वर्ग का कहना है कि अखाड़े ने समय रहते कार्रवाई कर अपनी मर्यादा और परंपरा की रक्षा की है। वहीं कुछ लोग इसे जल्दबाजी में लिया गया कदम मान रहे हैं और कहते हैं कि बातचीत के जरिए भी मामला सुलझाया जा सकता था। हालांकि अधिकांश संत संगठनों का मत है कि सार्वजनिक मंच पर दिए गए बयान यदि अखाड़े की नीति से मेल नहीं खाते, तो कार्रवाई जरूरी हो जाती है।
अनुशासन और मर्यादा सर्वोपरि
महामंडलेश्वर यामाई ममतानंद गिरि का किन्नर अखाड़े से निष्कासन यह दिखाता है कि संत समाज में अनुशासन और मर्यादा को सर्वोपरि माना जाता है, चाहे व्यक्ति कितना ही चर्चित क्यों न हो। विवादित बयानों ने जहां उन्हें सुर्खियों में ला दिया, वहीं अखाड़े की कार्रवाई ने यह संदेश भी दिया कि धार्मिक संस्थानों में व्यक्तिगत विचारों की भी एक सीमा होती है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि यह विवाद आगे क्या मोड़ लेता है और ममतानंद गिरि अपनी आध्यात्मिक यात्रा को किस दिशा में आगे बढ़ाती हैं।
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