देश के कई राज्यों में बढ़ा स्वाइन फ्लू का प्रकोप, दिल्ली में 17 दिन में 1,268 मामले बढ़े

नई दिल्ली: बरसात के मौसम में स्वाइन फ्लू यानी H1N1 संक्रमण के मामलों में देश के कई हिस्सों में तेजी देखी जा रही है। संक्रमण का असर सिर्फ राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली तक सीमित नहीं है। महाराष्ट्र, कर्नाटक, उत्तर प्रदेश, तमिलनाडु, केरल, गुजरात और राजस्थान समेत कई राज्यों में इन्फ्लुएंजा के मामले बढ़ रहे हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक मानसून और सर्दियों में इन्फ्लुएंजा की गतिविधियां बढ़ना सामान्य है। ऐसे में आने वाले महीनों में सतर्कता और निगरानी बढ़ाने की जरूरत है।
दिल्ली में तेजी से बढ़े मामले
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में स्वाइन फ्लू के मामलों में अगस्त के दौरान तेज वृद्धि दर्ज की गई है। 10 अगस्त तक यहां 1,344 मामले सामने आए थे। 20 अगस्त को यह संख्या बढ़कर 1,777 हो गई, जबकि 26 अगस्त तक 2,446 मामले दर्ज किए गए। 27 अगस्त को कुल मामले बढ़कर 2,612 हो गए। इस तरह 10 से 27 अगस्त के बीच दिल्ली में स्वाइन फ्लू के 1,268 नए मामले जुड़े। इसी अवधि में इन्फ्लुएंजा-ए के कुल मामलों की संख्या 3,300 से अधिक बताई गई है।
महाराष्ट्र और कर्नाटक में भी स्थिति चिंताजनक
महाराष्ट्र में 21 अगस्त तक स्वाइन फ्लू के 1,109 मामले सामने आए। यह संख्या पूरे वर्ष 2025 में दर्ज किए गए 942 मामलों से भी अधिक है। मुंबई में 488 और पुणे में 241 मामले दर्ज किए गए हैं। दोनों शहरों को मिलाकर राज्य के कुल मामलों का करीब 65 प्रतिशत हिस्सा है। कर्नाटक में 22 अगस्त तक 32 जिलों में लैब से पुष्टि किए गए इन्फ्लुएंजा के 4,212 मामले सामने आए। इनमें अकेले बेंगलुरु के दो क्षेत्रों में 3,081 मामले दर्ज किए गए हैं। इससे राज्य में संक्रमण की निगरानी को लेकर चिंता बढ़ी है।
यूपी में 364 मामले, अस्पतालों को अलर्ट
उत्तर प्रदेश में 25 अगस्त तक स्वाइन फ्लू के 364 मामले दर्ज किए गए हैं। इसके बाद सभी 75 जिलों के अस्पतालों को निगरानी बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं। लखनऊ में इस मौसम में स्वाइन फ्लू से 50 वर्षीय महिला की मौत की सूचना भी सामने आई है। राजस्थान में अगस्त के दौरान 55 नए मामले मिलने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने अलर्ट जारी किया है। वहीं तमिलनाडु में करीब एक महीने पहले ही लगभग 3,000 मामले सामने आने की जानकारी दी गई थी। केरल और गुजरात में भी इन्फ्लुएंजा संक्रमण बढ़ने की खबर है।
नया वायरस नहीं, मौसमी H1N1 का असर
भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) के महानिदेशक डॉ. राजीव बहल के अनुसार, देश में जांचे गए इन्फ्लुएंजा-ए के मामलों में करीब 97 से 98 प्रतिशत मामले स्वाइन फ्लू से जुड़े हैं। उनके मुताबिक वर्तमान में फैल रहा वायरस कोई नया स्ट्रेन नहीं है, बल्कि पहले से जाना-पहचाना H1N1 pdm09 है। विशेषज्ञों के अनुसार अधिकांश मामलों में संक्रमण हल्का होता है और मरीज अपने आप ठीक हो जाते हैं। हालांकि कुछ लोगों में फ्लू गंभीर रूप ले सकता है, इसलिए लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
नवंबर से फरवरी में बढ़ सकते हैं मामले
भारत में इन्फ्लुएंजा की गतिविधि आमतौर पर मानसून और सर्दियों दोनों मौसम में बढ़ती है। इसलिए अगस्त में सामने आई मौजूदा तेजी के बाद नवंबर से फरवरी के बीच भी मामलों में वृद्धि की आशंका जताई जा रही है। इसी वजह से फ्लू वैक्सीन की मांग भी बढ़ी है। जानकारी के अनुसार वैक्सीन की मांग पिछले वर्ष की समान अवधि के मुकाबले करीब तीन गुना और जुलाई की तुलना में दोगुने से अधिक हो गई है।
बच्चों और बुजुर्गों का रखें विशेष ध्यान
स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने बच्चों, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता वाले लोगों का विशेष ध्यान रखने की सलाह दी है। फ्लू के सामान्य लक्षणों में तेज बुखार, खांसी, गले में खराश, शरीर में दर्द, सिरदर्द, ठंड लगना, थकान और कमजोरी शामिल हैं। सांस लेने में परेशानी या सीने में दर्द जैसे लक्षण दिखाई देने पर जल्द चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए। डॉक्टर की सलाह के बिना एंटीबायोटिक या एंटीवायरल दवाएं नहीं लेनी चाहिए।
मास्क और हाथों की सफाई से बचाव
भीड़भाड़ वाली जगहों पर मास्क का इस्तेमाल, हाथों को साबुन और पानी से नियमित रूप से धोना तथा खांसते या छींकते समय मुंह-नाक ढकना संक्रमण के जोखिम को कम करने में मदद कर सकता है। फ्लू जैसे लक्षण होने पर घर पर रहना और दूसरों से दूरी बनाए रखना भी जरूरी है।


