शिक्षक भर्ती पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा आदेश, RTE-NCTE-UGC की योग्यता पूरी किए बिना नियुक्ति पर रोक
यह मामला राजेश चौहान की ओर से दायर जनहित याचिका से जुड़ा है। याचिका में ऐसी कानूनी व्यवस्थाओं को चुनौती दी गई है, जिनके जरिए निजी, अस्थायी या वेंचर शिक्षण संस्थानों में कार्यरत शिक्षकों और कर्मचारियों को बिना निष्पक्ष, पारदर्शी और प्रतिस्पर्धी चयन प्रक्रिया के सीधे सरकारी सेवा में शामिल करने की अनुमति दी जाती है।

नई दिल्ली: Teacher recruitment 2026: शिक्षक भर्ती से जुड़े एक अहम मामले में सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम आदेश जारी करते हुए शिक्षकों की नियुक्ति को लेकर महत्वपूर्ण निर्देश दिए हैं। CJI सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा है कि RTE, NCTE और UGC के तहत निर्धारित शैक्षणिक एवं पेशेवर योग्यता पूरी किए बिना स्कूलों और कॉलेजों में शिक्षकों की नियुक्ति नहीं की जा सकती। अदालत ने इस मामले में केंद्र सरकार, राज्य सरकारों और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) को नोटिस भी जारी किया है। सुप्रीम कोर्ट का यह आदेश उन नियुक्तियों को लेकर अहम माना जा रहा है, जहां निर्धारित पात्रता के बिना शिक्षकों को सेवा में शामिल करने की व्यवस्था की जाती है।
राजेश चौहान की याचिका पर हुई सुनवाई
यह मामला राजेश चौहान की ओर से दायर जनहित याचिका से जुड़ा है। याचिका में ऐसी कानूनी व्यवस्थाओं को चुनौती दी गई है, जिनके जरिए निजी, अस्थायी या वेंचर शिक्षण संस्थानों में कार्यरत शिक्षकों और कर्मचारियों को बिना निष्पक्ष, पारदर्शी और प्रतिस्पर्धी चयन प्रक्रिया के सीधे सरकारी सेवा में शामिल करने की अनुमति दी जाती है। याचिकाकर्ता ने ऐसी व्यवस्थाओं को असंवैधानिक घोषित करने की मांग की है। इसी याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने संबंधित पक्षों को नोटिस जारी किया और अंतरिम आदेश पारित किया।
किन शिक्षकों पर पड़ सकता है असर?
अदालत के आदेश का असर उन शिक्षकों की नियुक्तियों पर पड़ सकता है, जो संबंधित नियामक संस्थाओं की ओर से निर्धारित न्यूनतम योग्यता पूरी नहीं करते हैं। RTE और NCTE के तहत स्कूल शिक्षकों की पात्रता तय होती है, जबकि कॉलेज और विश्वविद्यालय स्तर पर शिक्षक पदों के लिए UGC के नियम लागू होते हैं। इसलिए शिक्षक भर्ती की तैयारी कर रहे उम्मीदवारों के लिए यह समझना जरूरी है कि अलग-अलग कक्षाओं और उच्च शिक्षा संस्थानों में नियुक्ति के लिए अलग पात्रता मानदंड निर्धारित हैं।
RTE के तहत क्या है व्यवस्था?
शिक्षा का अधिकार कानून यानी RTE Act, 2009 की धारा 23 के तहत स्कूली शिक्षकों के लिए न्यूनतम योग्यता निर्धारित करने की व्यवस्था है। NCTE की ओर से तय मानकों के मुताबिक प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्तर पर शिक्षकों के लिए निर्धारित शिक्षक प्रशिक्षण योग्यता के साथ शिक्षक पात्रता परीक्षा यानी TET की भूमिका महत्वपूर्ण है। कक्षा 1 से 5 तक के शिक्षकों के लिए सामान्य तौर पर 12वीं के बाद D.El.Ed या समकक्ष शिक्षक प्रशिक्षण पाठ्यक्रम जैसी योग्यता निर्धारित होती है। वहीं, उच्च प्राथमिक स्तर पर संबंधित शैक्षणिक डिग्री और शिक्षक प्रशिक्षण योग्यता की आवश्यकता हो सकती है। भर्ती के नियम संबंधित पद और राज्य के अनुसार भी अलग हो सकते हैं।
NCTE तय करता है शिक्षक पात्रता के मानक
राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद यानी NCTE देश में शिक्षक शिक्षा और शिक्षक पात्रता से जुड़े न्यूनतम मानक तय करने वाली प्रमुख संस्था है। सामान्य तौर पर प्राथमिक शिक्षक पद के लिए 12वीं के साथ निर्धारित प्रतिशत, D.El.Ed/B.El.Ed जैसी पेशेवर योग्यता और TET जैसी पात्रता आवश्यक होती है। मिडिल और माध्यमिक स्तर के पदों के लिए संबंधित विषय में स्नातक डिग्री के साथ B.Ed और आवश्यक शिक्षक पात्रता मानदंड लागू होते हैं। वहीं, वरिष्ठ माध्यमिक स्तर पर संबंधित विषय में पोस्ट ग्रेजुएशन और B.Ed जैसी योग्यता मांगी जाती है। हालांकि अंतिम पात्रता संबंधित भर्ती नियमों पर निर्भर करती है।
कॉलेज और यूनिवर्सिटी शिक्षकों के लिए UGC के नियम
उच्च शिक्षा संस्थानों में असिस्टेंट प्रोफेसर और अन्य शिक्षण पदों की पात्रता UGC के नियमों के अनुसार तय होती है। सामान्य तौर पर असिस्टेंट प्रोफेसर पद के लिए संबंधित विषय में कम से कम 55 प्रतिशत अंकों के साथ मास्टर डिग्री और UGC NET या संबंधित पात्रता परीक्षा की आवश्यकता होती है। कुछ मामलों में PhD धारकों के लिए UGC के नियमों के तहत NET से संबंधित छूट या अलग पात्रता प्रावधान लागू हो सकते हैं।
अब आगे क्या होगा?
सुप्रीम कोर्ट ने मामले में केंद्र, राज्यों और UGC से जवाब मांगा है। अदालत के अंतिम फैसले से यह स्पष्ट होगा कि निजी या अस्थायी संस्थानों के कर्मचारियों को बिना सामान्य प्रतिस्पर्धी भर्ती प्रक्रिया के सरकारी सेवा में शामिल करने वाली व्यवस्थाओं की संवैधानिक वैधता क्या है। फिलहाल अंतरिम आदेश के बाद शिक्षक भर्ती से जुड़े संस्थानों और सरकारों को निर्धारित पात्रता मानकों का पालन करना होगा। मामले की अगली सुनवाई में अदालत इस मुद्दे पर आगे के निर्देश दे सकती है।


