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तरुण तेजपाल को सुप्रीम कोर्ट से झटका, आत्मसमर्पण में छूट की याचिका खारिज

तरुण तेजपाल की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने अदालत के समक्ष आत्मसमर्पण से छूट देने का आग्रह किया। उनका तर्क था कि तेजपाल की अपील पहले ही सुप्रीम कोर्ट में सूचीबद्ध है और उस पर सुनवाई प्रस्तावित है।

तरुण तेजपाल को सुप्रीम कोर्ट से झटका, आत्मसमर्पण में छूट की याचिका खारिज
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नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने तहलका के पूर्व प्रधान संपादक तरुण तेजपाल को 2013 के यौन उत्पीड़न मामले में बड़ा झटका दिया है। शीर्ष अदालत ने उनकी उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने 10 साल की सजा के मामले में आत्मसमर्पण से छूट देने की मांग की थी। अदालत ने तेजपाल को दो सप्ताह के भीतर आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया है। हालांकि, उनकी दोषसिद्धि और सजा को चुनौती देने वाली अपील पर सुनवाई के लिए 22 सितंबर की तारीख तय की गई है।

आत्मसमर्पण से पहले अपील सुनने की मांग

तरुण तेजपाल की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने अदालत के समक्ष आत्मसमर्पण से छूट देने का आग्रह किया। उनका तर्क था कि तेजपाल की अपील पहले ही सुप्रीम कोर्ट में सूचीबद्ध है और उस पर सुनवाई प्रस्तावित है। ऐसे में अपील पर विचार होने तक आत्मसमर्पण की शर्त से राहत दी जानी चाहिए। कपिल सिब्बल ने कहा कि उचित परिस्थितियों में अदालत के पास यह अधिकार है कि वह आरोपी को आत्मसमर्पण की आवश्यकता से छूट दे सकती है और उसके आत्मसमर्पण न करने की स्थिति में भी आपराधिक अपील पर सुनवाई कर सकती है।

गोवा सरकार ने किया विरोध

गोवा सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने तेजपाल की मांग का विरोध किया। उन्होंने अदालत से कहा कि आत्मसमर्पण से छूट के आवेदन पर मामले की गंभीरता और परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए फैसला किया जाना चाहिए। तुषार मेहता ने बॉम्बे हाई कोर्ट के निष्कर्षों का हवाला देते हुए कहा कि मामला गंभीर प्रकृति के अपराध से जुड़ा है और तेजपाल को 10 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई गई है। राज्य की ओर से अदालत में यह भी दलील दी गई कि दोषसिद्धि और सजा के खिलाफ अपील लंबित होने मात्र से आत्मसमर्पण की आवश्यकता स्वतः समाप्त नहीं हो जाती।

हाई कोर्ट ने किन धाराओं में सुनाई सजा?

बॉम्बे हाई कोर्ट ने तरुण तेजपाल को मामले में दोषी ठहराया था। अदालत ने भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत उन्हें सजा सुनाई। इनमें दुष्कर्म और महिला की गरिमा भंग करने से संबंधित प्रावधान शामिल थे। मामले में आईपीसी की धारा 376(2)(f) और 376(2)(k) के तहत दोषसिद्धि हुई। ये प्रावधान ऐसी परिस्थितियों से जुड़े हैं, जहां आरोपी अपने पद, अधिकार, नियंत्रण या प्रभाव की स्थिति का फायदा उठाकर महिला के साथ अपराध करता है। इसके अलावा तेजपाल को धारा 354A के तहत यौन उत्पीड़न और धारा 354B के तहत महिला के कपड़े उतारने या निर्वस्त्र करने के इरादे से हमला अथवा बल प्रयोग करने से जुड़े अपराध में भी दोषी ठहराया गया।

कौन हैं तरुण तेजपाल?

तरुण तेजपाल चर्चित पत्रकार और तहलका पत्रिका के संस्थापक एवं पूर्व प्रधान संपादक रहे हैं। वर्ष 2013 में अपनी ही एक जूनियर महिला सहकर्मी द्वारा लगाए गए यौन उत्पीड़न के आरोपों के बाद वह राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आए थे। आरोप सामने आने के बाद तेजपाल ने कुछ समय के लिए संपादक पद से हटने की घोषणा की थी। उन्होंने उस समय कहा था कि ऐसा कदम मामले की जांच को प्रभावित होने से बचाने के लिए उठाया जा रहा है।

नवंबर 2013 में सामने आया था मामला

यह मामला नवंबर 2013 का है। आरोप के अनुसार, 7 और 8 नवंबर को गोवा के एक होटल में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान तेजपाल ने अपनी जूनियर महिला सहकर्मी के साथ यौन दुर्व्यवहार किया। घटना के कुछ दिनों बाद, 18 नवंबर 2013 को पीड़िता ने तहलका की तत्कालीन प्रबंध संपादक शोमा चौधरी को शिकायत भेजी थी। शिकायत में कथित घटना का विवरण देते हुए कार्रवाई की मांग की गई थी। इसके बाद मामला पुलिस और न्यायिक प्रक्रिया तक पहुंचा।

अब 22 सितंबर को होगी अपील पर सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट के ताजा आदेश के बाद तेजपाल को निर्धारित अवधि में आत्मसमर्पण करना होगा। दूसरी ओर, उनकी दोषसिद्धि और 10 साल की सजा के खिलाफ अपील पर शीर्ष अदालत 22 सितंबर को सुनवाई करेगी। ऐसे में आने वाली सुनवाई इस लंबे समय से चल रहे मामले में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।


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