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देशभर में SIR की घोषणा, अप्रैल से दिल्ली-कर्नाटक समेत 22 राज्यों में शुरू होगी प्रक्रिया
दिल्ली, कर्नाटक समेत शेष 22 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में SIR की प्रक्रिया अप्रैल से शुरू होने की संभावना है। चुनाव आयोग ने पहले ही 24 जून 2025 को देशव्यापी SIR का आदेश जारी कर दिया था, जिसके तहत इसे चरणबद्ध तरीके से लागू किया जा रहा है।

नई दिल्ली। चुनाव आयोग ने गुरुवार को देशभर में मतदाता सूची के व्यापक पुनरीक्षण के लिए स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) की घोषणा कर दी। आयोग के सचिव पवन दीवान ने 22 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों (CEO) को पत्र लिखकर SIR से जुड़ी तैयारियां जल्द से जल्द पूरी करने के निर्देश दिए हैं। आयोग के पत्र के मुताबिक दिल्ली, कर्नाटक समेत शेष 22 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में SIR की प्रक्रिया अप्रैल से शुरू होने की संभावना है। चुनाव आयोग ने पहले ही 24 जून 2025 को देशव्यापी SIR का आदेश जारी कर दिया था, जिसके तहत इसे चरणबद्ध तरीके से लागू किया जा रहा है।
इन राज्यों का किया उल्लेख
मुख्य निर्वाचन अधिकारियों को भेजे गए पत्र में जिन राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों का उल्लेख किया गया है, उनमें आंध्र प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, चंडीगढ़, दिल्ली, ओडिशा, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, झारखंड, कर्नाटक, लद्दाख, महाराष्ट्र, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड, पंजाब, दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव, सिक्किम, त्रिपुरा, तेलंगाना और उत्तराखंड शामिल हैं।
क्या है स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR)?
स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन चुनाव आयोग की वह प्रक्रिया है, जिसके तहत मतदाता सूची का व्यापक और गहन पुनरीक्षण किया जाता है। इस प्रक्रिया में बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) और बूथ लेवल एजेंट (BLA) घर-घर जाकर मतदाताओं का सत्यापन करते हैं। 18 वर्ष या उससे अधिक आयु के नए मतदाताओं के नाम सूची में जोड़े जाते हैं। जिन मतदाताओं की मृत्यु हो चुकी है या जो स्थायी रूप से दूसरे स्थान पर स्थानांतरित हो चुके हैं, उनके नाम हटाए जाते हैं। इसके अलावा, नाम, पते या अन्य विवरण में हुई त्रुटियों को भी ठीक किया जाता है। आयोग का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि मतदाता सूची सटीक, अद्यतन और पारदर्शी हो।
पहले और दूसरे चरण की स्थिति
SIR की शुरुआत पहले चरण में बिहार से की गई थी। बिहार में फाइनल मतदाता सूची में 7.42 करोड़ मतदाताओं के नाम दर्ज किए गए। दूसरे चरण के तहत उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़, गोवा, गुजरात, मध्य प्रदेश, राजस्थान, अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह और लक्षद्वीप सहित कुल 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 28 अक्टूबर 2025 से प्रक्रिया शुरू की गई। नौ राज्यों और तीन केंद्र शासित प्रदेशों में 4 नवंबर 2025 से SIR लागू हुआ। इन राज्यों में कुल 50.99 करोड़ मतदाता शामिल हैं। राज्यों को निर्देश दिया गया था कि 7 फरवरी 2026 तक अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित कर दी जाए। हालांकि, अब तक केवल गुजरात, लक्षद्वीप और पुडुचेरी ने ही अंतिम सूची जारी की है। गुजरात: 4.40 करोड़ मतदाता, पुडुचेरी: 9,44,211 मतदाता, लक्षद्वीप: 57,607 मतदाता। राजस्थान को 14 फरवरी को सूची जारी करनी थी, लेकिन तिथि बढ़ाकर 21 फरवरी कर दी गई। पश्चिम बंगाल की समयसीमा 28 फरवरी और उत्तर प्रदेश की 10 अप्रैल तक बढ़ाई गई है।
असम में अलग प्रक्रिया
असम में SIR के बजाय स्पेशल रिवीजन प्रक्रिया अपनाई गई थी, जो 10 फरवरी को पूरी कर ली गई। आयोग ने वहां स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप अलग मॉडल लागू किया।
SIR की प्रक्रिया: छह प्रमुख सवालों में समझें 1. SIR क्यों जरूरी?चुनाव आयोग के अनुसार 1951 से 2004 तक नियमित गहन पुनरीक्षण होते रहे, लेकिन पिछले दो दशकों में जनसंख्या में भारी बदलाव, माइग्रेशन और शहरीकरण के कारण मतदाता सूची में व्यापक सुधार की जरूरत महसूस की गई।
2. कौन करता है सत्यापन?
ब्लॉक लेवल ऑफिसर (BLO) और बूथ लेवल एजेंट (BLA) घर-घर जाकर मतदाताओं का विवरण सत्यापित करते हैं।
3. मतदाता को क्या करना होगा?
SIR के दौरान BLO या BLA फॉर्म उपलब्ध कराते हैं। मतदाता को अपनी जानकारी की पुष्टि करनी होती है। यदि किसी व्यक्ति का नाम दो जगह दर्ज है, तो एक स्थान से हटवाना होगा। नया नाम जोड़ने या संशोधन के लिए फॉर्म और दस्तावेज जमा करने होंगे।
4. कौन-कौन से दस्तावेज मान्य हैं?
पेंशनर पहचान पत्र, सरकारी विभाग द्वारा जारी पहचान पत्र, जन्म प्रमाणपत्र, पासपोर्ट, 10वीं की मार्कशीट, स्थायी निवास प्रमाणपत्र, वन अधिकार प्रमाणपत्र, जाति प्रमाणपत्र,
NRC में नाम
परिवार रजिस्टर में नाम, जमीन या मकान आवंटन पत्र, आधार कार्ड
5. किन मामलों पर विशेष ध्यान?
मृत्यु के बाद भी सूची में नाम बने रहना
एक से अधिक स्थानों पर नाम दर्ज होना
विदेशी नागरिकों का नाम सूची में आ जाना
पात्र मतदाताओं का नाम छूट जाना
6. अंतिम लक्ष्य क्या है?
आयोग का उद्देश्य है कि कोई भी योग्य मतदाता सूची से वंचित न रहे और कोई अयोग्य व्यक्ति सूची में शामिल न हो।
राजनीतिक और प्रशासनिक महत्व
मतदाता सूची का सटीक और अद्यतन होना चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। SIR जैसे व्यापक पुनरीक्षण से चुनावी पारदर्शिता मजबूत होती है और भविष्य के चुनावों में विवाद की संभावना कम होती है। विशेषज्ञों का मानना है कि बड़े पैमाने पर माइग्रेशन, शहरीकरण और जनसांख्यिकीय बदलावों के चलते मतदाता सूची का नियमित और गहन पुनरीक्षण आवश्यक हो गया है। हालांकि, कुछ राज्यों में समयसीमा बढ़ाए जाने से यह संकेत मिलता है कि प्रक्रिया अपेक्षा से अधिक जटिल और समय लेने वाली है।
तैयारियां तेज
अप्रैल से 22 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में SIR शुरू होने की संभावना है। मुख्य निर्वाचन अधिकारियों को तैयारियां तेज करने के निर्देश दिए गए हैं। आयोग का लक्ष्य है कि चरणबद्ध तरीके से पूरे देश में मतदाता सूची को अद्यतन किया जाए, ताकि आगामी चुनावों में मतदाता सूची त्रुटिरहित और भरोसेमंद हो। स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन को चुनावी सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, जो लोकतांत्रिक प्रक्रिया को और अधिक सशक्त बनाने की दिशा में प्रयास है।
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