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'कुछ लोग तीर्थ स्थलों पर भी एजेंडा चलाते हैं,' शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के साथ हुई घटना पर बोले बाबा रामदेव

उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में चल रहे माघ मेले में योग गुरु बाबा रामदेव गुरुवार को स्नान के लिए संगम पहुंचे। बाबा रामदेव ने संगम घाट पर पवित्र नदियों का जल का सेवन किया और फिर घाट पर होने वाली आरती में भी भाग लिया

कुछ लोग तीर्थ स्थलों पर भी एजेंडा चलाते हैं, शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के साथ हुई घटना पर बोले बाबा रामदेव
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प्रयागराज। उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में चल रहे माघ मेले में योग गुरु बाबा रामदेव गुरुवार को स्नान के लिए संगम पहुंचे। बाबा रामदेव ने संगम घाट पर पवित्र नदियों का जल का सेवन किया और फिर घाट पर होने वाली आरती में भी भाग लिया। इसी बीच, उन्होंने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के साथ माघ मेले में हुई बदसलूकी को गलत बताया और कहा कि ऐसा व्यवहार किसी के साथ भी अस्वीकार्य है।

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के साथ माघ मेले में हुई बदसलूकी पर उन्होंने कहा, "यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है कि हमारे अपने योगियों और पूजनीय संतों को भी अपमानजनक या अपशब्दों का सामना करना पड़ता है। ऐसा व्यवहार अस्वीकार्य है, न केवल शंकराचार्य के लिए, बल्कि किसी भी साधु के लिए। किसी के बारे में भी ऐसी टिप्पणी करना निंदनीय और शर्मनाक है। हर आदमी को अपने गौरव और गरिमा का ध्यान खुद रखना चाहिए।"

उन्होंने आगे कहा कि माघ मेला सिर्फ नाम, जप और तप के लिए है। हमारे यहां कहा गया है कि अहंकार करने वाला शख्स कभी साधु नहीं हो सकता है। तीर्थों में भी कुछ लोग अपना एजेंडा लेकर चलते हैं। मुझे लगता है कि तीर्थ किसी के अहम का, प्रतिष्ठा का एजेंडा नहीं होना चाहिए। ये तीन पवित्र नदियों का स्थान है, मुक्ति का स्थान है।

संगम में स्नान के अनुभव पर उन्होंने कहा, "त्रिवेणी संगम में स्नान और दान का विशेष महत्व है। त्रिवेणी संगम आना ही अपने आप में एक बड़ा आशीर्वाद है। संगम घाट पर दिव्य व्यवस्था, पवित्र दर्शन और आध्यात्मिक वातावरण व्याप्त है। हमारा प्रयागराज तीर्थराज है, और इस तीर्थ स्थान के देवव्रत को अपने संयम से, अपने तप से, अपने योग, अपने अध्यात्म से और अपने राज धर्म से निभाते हुए जिस तरीके से सीएम योगी माघ मेले को व्यवस्थित कर रहे हैं, यह हमारी आत्मा को हर्षित करने वाला है।"

बता दें कि 17 जनवरी को माघ अमावस्या के दिन रथ और पूरे लाव-लश्कर के साथ शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद पवित्र नदी में स्नान करने पहुंचे थे, जहां पुलिस प्रशासन ने उन्हें बिना रथ के आगे बढ़ने को कहा। मामले में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद और उनके शिष्य और पुलिस प्रशासन के बीच झड़प तीखी हुई। शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने प्रशासन पर आरोप लगाया कि उनके साथ यह व्यवहार जानबूझकर किया गया है, जिससे उनके मान-सम्मान को ठेस पहुंची है। घटना के बाद से ही शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद माघ मेले में ही धरने पर बैठे हैं।


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