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रविदासिया समाज के संत निरंजन दास को पद्मश्री सम्मान, विजय सांपला ने केंद्र सरकार का जताया आभार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार द्वारा रविदासिया समाज एवं डेरा बल्ला के प्रमुख संत निरंजन दास को पद्मश्री सम्मान से अलंकृत किए जाने पर पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं भाजपा नेता विजय सांपला ने केंद्र सरकार के प्रति हार्दिक आभार व्यक्त किया है।

रविदासिया समाज के संत निरंजन दास को पद्मश्री सम्मान, विजय सांपला ने केंद्र सरकार का जताया आभार
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नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार द्वारा रविदासिया समाज एवं डेरा बल्ला के प्रमुख संत निरंजन दास को पद्मश्री सम्मान से अलंकृत किए जाने पर पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं भाजपा नेता विजय सांपला ने केंद्र सरकार के प्रति हार्दिक आभार व्यक्त किया है।

विजय सांपला ने कहा कि संत निरंजन दास ने संत गुरु रविदास महाराज के विचारों को देश-विदेश में फैलाने के साथ-साथ सामाजिक समरसता, सेवा और मानवता के मूल्यों को सशक्त करने के लिए अपना संपूर्ण जीवन समर्पित किया है। उन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया जाना न केवल रविदासिया समाज, बल्कि पूरे देश के लिए गर्व का विषय है।

उन्होंने इस ऐतिहासिक निर्णय के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का विशेष धन्यवाद करते हुए कहा कि यह सम्मान समाज के संत-महापुरुषों द्वारा किए गए अमूल्य योगदान को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान देने का सशक्त प्रमाण है।

संत निरंजन दास का जन्म 6 जनवरी 1942 को जालंधर जिले के अलावलपुर के पास रामदासपुर गांव में हुआ था। उनके पिता का नाम साधु राम और माता का नाम रुक्मणी था। उनके पिता और माता श्री 108 संत बाबा पीपल दास जी और श्री 108 संत सरवन दास जी के भक्त थे।

डेरा श्री 108 संत सरवन दास सचखंड बल्ला की स्थापना पंजाब के जालंधर जिले के बल्ला गांव में 1900 के दशक की शुरुआत में पीपल दास महाराज ने की थी। पीपल दास जी महान संत थे। वह अपने पांच साल के बेटे सरवन दास के साथ बठिंडा के गिल पट्टी गांव से जालंधर जिले के बल्ला गांव आए।

पत्नी के निधन के बाद पीपल दास जी महाराज अपने पांच साल के पुत्र के साथ बठिंडा जिले से जालंधर जिले के गांव बल्ला में आ गए। बताया जाता है कि बल्ला गांव में एक सूखा हुआ पीपल का पेड़ था, जिस पर पीपल दास जी नियमित रूप से पानी देने लगे। कुछ समय बाद पेड़ फिर से हरा-भरा हो गया।

पीपल दास महाराज ने गांव के लोगों को आसपास की भूमि दान करने के लिए प्रेरित किया और संगत ने कुछ भूमि दान भी की। इसके बाद संत सरवन दास महाराज ने वहीं तप शुरू किया और आज यह स्थान सतगुरु रविदास महाराज के अनुयायियों के लिए एक प्रमुख तीर्थस्थल बन गया है। देश-विदेश से सतगुरु रविदास महाराज के करोड़ों अनुयायी इस डेरा से जुड़े हैं।

गणतंत्र दिवस की पूर्ण संध्या पर केंद्र सरकार ने रविवार को पद्म विभूषण, पद्म भूषण और पद्म श्री विजेताओं के नामों का ऐलान किया। गृह मंत्रालय द्वारा जारी सूची में 5 पद्म विभूषण, 13 पद्म भूषण और 113 पद्म श्री पुरस्कार शामिल हैं। पुरस्कार पाने वालों में से 19 महिलाएं हैं, और इस सूची में विदेशी, एनआरआई, पीआईओ, और ओसीआई श्रेणी के 6 व्यक्ति और 16 मरणोपरांत पुरस्कार पाने वाले भी शामिल हैं।


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