RSS ने फिर उठाई NRC की मांग, सुनील आंबेकर बोले- तय हो कौन भारतीय नागरिक
RSS नेता ने भारत में जनसंख्या के बदलते स्वरूप का उल्लेख करते हुए इसे ऐतिहासिक घटनाओं से जोड़कर देखा। उन्होंने कहा कि 1947 में धर्म और जनसंख्या के आधार पर देश का विभाजन हुआ था। उनके अनुसार जनसंख्या संतुलन का सवाल देश की सांस्कृतिक पहचान, एकता और सुरक्षा से जुड़ा हुआ है।

नई दिल्ली: देश में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) और आगामी जनगणना को लेकर जारी बहस के बीच राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) ने एक बार फिर पूरे देश में नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजन्स (NRC) की प्रक्रिया शुरू करने की मांग उठाई है। दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम में RSS के प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर ने कहा कि यह स्पष्ट होना चाहिए कि देश का नागरिक कौन है और कौन नहीं। उन्होंने मतदाता सूची में कथित तौर पर गलत तरीके से शामिल गैर-नागरिकों की पहचान करने की जरूरत पर जोर दिया।
मतदाता सूची में गैर नागरिकों की पहचान पर जोर
सुनील आंबेकर ने कहा कि नागरिकता और मतदाता सूची से जुड़े मामलों में स्पष्टता जरूरी है। उनके मुताबिक, यदि कोई गैर-नागरिक गलत तरीके से वोटर लिस्ट में शामिल है तो उसकी पहचान की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि NRC के जरिए नागरिकों की पहचान की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा सकती है। आंबेकर ने यह भी कहा कि नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) के तहत पात्र लोगों को नागरिकता दी जानी चाहिए और उनकी पहचान की प्रक्रिया NRC के माध्यम से की जा सकती है। उनके बयान ऐसे समय में आए हैं, जब देश के कई हिस्सों में मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर राजनीतिक बहस चल रही है।
जनसंख्या में बदलाव को विभाजन से जोड़ा
RSS नेता ने भारत में जनसंख्या के बदलते स्वरूप का उल्लेख करते हुए इसे ऐतिहासिक घटनाओं से जोड़कर देखा। उन्होंने कहा कि 1947 में धर्म और जनसंख्या के आधार पर देश का विभाजन हुआ था। उनके अनुसार जनसंख्या संतुलन का सवाल देश की सांस्कृतिक पहचान, एकता और सुरक्षा से जुड़ा हुआ है। आंबेकर ने यह भी कहा कि संस्कृति और जनसांख्यिकीय संतुलन की चर्चा को केवल सांप्रदायिकता के चश्मे से नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने राजनीतिक दलों से अपील की कि राष्ट्रीय महत्व के संवेदनशील मुद्दों का इस्तेमाल राजनीतिक लाभ के लिए नहीं किया जाए।
कानूनी रास्ता अपनाने की बात
NRC की प्रक्रिया को लेकर आपत्ति जताने वालों के संदर्भ में आंबेकर ने कहा कि कानूनी विकल्प खुले हैं। उन्होंने कहा कि यदि किसी व्यक्ति या संगठन को प्रक्रिया पर आपत्ति है तो वह अदालत का रुख कर सकता है। उनके मुताबिक, राजनीतिक आधार पर किसी गैर-नागरिक को भारतीय नागरिक मानना उचित नहीं होगा।
CAA के पात्र लोगों को नागरिकता देने की मांग
आंबेकर ने पड़ोसी देशों से भारत आए लोगों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि जो लोग CAA के प्रावधानों के तहत नागरिकता के पात्र हैं, उन्हें नागरिकता मिलनी चाहिए। उन्होंने पड़ोसी देशों में रह रहे अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लोगों की स्थिति पर भी ध्यान देने की बात कही।
समान कानून की वकालत
RSS प्रचार प्रमुख ने कानूनों में समानता के मुद्दे को भी उठाया। उन्होंने कहा कि देश में कानून सभी नागरिकों के लिए समान होना चाहिए। इस संदर्भ में उन्होंने विवाह और बहुविवाह से जुड़े अलग-अलग कानूनी प्रावधानों के साथ संविधान के अनुच्छेद 29 और 30 का उल्लेख किया। उन्होंने स्थानीय निकाय चुनावों में जनसंख्या नियंत्रण से जुड़े नियमों का भी जिक्र किया।
अवैध प्रवास पर पुरानी व्यवस्था का जिक्र
आंबेकर ने अवैध प्रवास के मुद्दे पर पिछली नीतियों की आलोचना की। उन्होंने 1983 के Illegal Migrants (Determination by Tribunals) Act का उल्लेख किया, जिसे बाद में सुप्रीम कोर्ट ने रद्द कर दिया था। उन्होंने कहा कि अवैध प्रवास के सवाल को लंबे समय तक गंभीरता से नहीं लिया गया।
RSS पहले भी कर चुका है NRC की पैरवी
NRC को लेकर RSS का यह रुख नया नहीं है। वर्ष 2019 में तत्कालीन RSS महासचिव सुरेश भैयाजी जोशी ने भी कहा था कि भारतीय नागरिक नहीं होने वाले लोगों की पहचान के लिए NRC तैयार करना सरकार की जिम्मेदारी है। 2019-20 में CAA और प्रस्तावित NRC को लेकर देशभर में विरोध प्रदर्शन हुए थे। दिसंबर 2019 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि उनकी सरकार ने सत्ता में आने के बाद NRC पर कोई चर्चा नहीं की है। वहीं, 2024 के लोकसभा चुनाव के लिए BJP के घोषणापत्र में NRC को शामिल नहीं किया गया था।


