Top
Begin typing your search above and press return to search.

राजस्थान: कोर्ट ने नशीले पदार्थ की तस्करी से जुड़े एनसीबी मामले में 6 लोगों को ठहराया दोषी, 15 साल की सुनाई सजा

राजस्थान की भरतपुर कोर्ट ने नशीले पदार्थ की तस्करी से जुड़े एनसीबी (नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो) मामले में 6 लोगों को दोषी ठहराया है। इसके साथ ही, सभी दोषियों को 15 साल की कठोर कैद की सजा सुनाई गई है।

राजस्थान: कोर्ट ने नशीले पदार्थ की तस्करी से जुड़े एनसीबी मामले में 6 लोगों को ठहराया दोषी, 15 साल की सुनाई सजा
X

जयपुर। राजस्थान की भरतपुर कोर्ट ने नशीले पदार्थ की तस्करी से जुड़े एनसीबी (नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो) मामले में 6 लोगों को दोषी ठहराया है। इसके साथ ही, सभी दोषियों को 15 साल की कठोर कैद की सजा सुनाई गई है।

एनसीबी ने शुक्रवार को जारी एक बयान में कहा कि जयपुर इकाई ने ड्रग तस्करी से लड़ने के अपने इरादे को दिखाते हुए गैर-कानूनी डोडा चूरा की अंतर-राज्यीय तस्करी में शामिल छह आरोपियों को दोषी ठहराने में सफलता हासिल की है। डोडा चूरा नारकोटिक ड्रग्स व साइकोट्रोपिक सब्सटेंस (एनडीपीएस) एक्ट, 1985 के तहत प्रतिबंधित है।

भरतपुर जिले में स्थित विशेष एनडीपीएस कोर्ट ने दोषियों को सजा के साथ उन पर 2-2 लाख रुपए का जुर्माना भी लगाया है। दोषी ठहराए गए आरोपियों में नागौर जिले के संग्राम राम बावरी और धीमा राम बिश्नोई, सुनील, ओमा राम और भुट्टा राम बावरी व बीकानेर जिले के कालू राम जाट शामिल हैं।

एनसीबी के अनुसार, एक खास खुफिया जानकारी के आधार पर 3 अक्टूबर 2021 को टीम ने भरतपुर के अमौली टोल प्लाजा के पास एक ट्रक और उसके साथ चल रही स्विफ्ट कार को रोका। तलाशी के दौरान ट्रक से 28 बोरियों में भरा कुल 619.800 किलोग्राम डोडा चूरा जब्त किया गया, जिसके बाद दोषियों को गिरफ्तार किया गया।

इस मामले में एनडीपीएस एक्ट-1985 की अलग-अलग धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया था। जांच के दौरान पता चला कि धीमा राम बिश्नोई, संग्राम राम बावरी, भुट्टा राम बावरी, ओमा राम, सुनील और कालू राम ने झारखंड से राजस्थान तक गैर-कानूनी तरीके से डोडा चूरा ले जाने की आपराधिक साजिश रची थी। भुट्टा राम इस प्रतिबंधित सामान को लेने वाला मुख्य व्यक्ति था, जबकि बाकी दोषी ट्रांसपोर्टेशन, एस्कॉर्टिंग और पेमेंट की व्यवस्था में सक्रिय रूप से शामिल थे।

बयान में कहा गया है कि इस मामले में एनसीबी जयपुर जोनल यूनिट की पैरवी ने यह सुनिश्चित किया कि न्याय मिले और समुदायों को नशीले पदार्थों के खतरे से बचाया जा सके। एनसीबी ड्रग नेटवर्क को खत्म करने और 'ड्रग-फ्री इंडिया' (नशा-मुक्त भारत) के अपने संकल्प को पूरा करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।



Next Story

Related Stories

All Rights Reserved. Copyright @2019
Share it