Top
Begin typing your search above and press return to search.

रेल मंत्री ने की डेढ़ लाख नई भर्तियां की घोषणा, कहा-10 साल में रेलवे ने दीं 5 लाख नौकरियां

वैष्णव ने कहा कि 2014 से 2024 के बीच भारतीय रेलवे में लगभग 5.04 लाख युवाओं को रोजगार दिया गया है। मोदी सरकार के तीसरे कार्यकाल में 1.5 लाख और भर्तियों की प्रक्रिया जारी है। उन्होंने 18,000 असिस्टेंट लोको पायलट पदों की भर्ती प्रक्रिया पूरी होने और नियुक्तियां शुरू होने की जानकारी भी दी।

रेल मंत्री ने की डेढ़ लाख नई भर्तियां की घोषणा, कहा-10 साल में रेलवे ने दीं 5 लाख नौकरियां
X

नई दिल्ली : रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने राज्यसभा में कहा कि पिछले दस वर्षों में भारतीय रेलवे की वित्तीय स्थिति में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। उन्होंने बताया कि 2024-25 वित्त वर्ष में रेलवे ने सभी व्यय पूरे करने के बाद 2,660 करोड़ रुपये का राजस्व अधिशेष दर्ज किया है। मंत्री के अनुसार यह उपलब्धि बेहतर वित्तीय प्रबंधन, माल ढुलाई में वृद्धि, यात्री आय में सुधार और लागत नियंत्रण के संयुक्त प्रयासों का परिणाम है। मंत्री ने सदन को बताया कि 2024-25 में रेलवे का ऑपरेटिंग रेशियो 98.22 प्रतिशत रहा। यह सूचकांक बताता है कि 100 रुपये कमाने पर रेलवे को 98.22 रुपये खर्च करने पड़े। उन्होंने कहा कि पहले यह अनुपात अधिक था, जिससे राजस्व पर दबाव रहता था, लेकिन अब इसमें सुधार आया है। इसी अवधि में रेलवे की सकल ट्रैफिक प्राप्तियां 2,65,114 करोड़ रुपये रहीं।

दशक भर में रोजगार सृजन पर जोर

वैष्णव ने कहा कि 2014 से 2024 के बीच भारतीय रेलवे में लगभग 5.04 लाख युवाओं को रोजगार दिया गया है। मोदी सरकार के तीसरे कार्यकाल में 1.5 लाख और भर्तियों की प्रक्रिया जारी है। उन्होंने 18,000 असिस्टेंट लोको पायलट पदों की भर्ती प्रक्रिया पूरी होने और नियुक्तियां शुरू होने की जानकारी भी दी। परीक्षा केंद्रों से जुड़ी शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए रेलवे ने ‘वार रूम’ स्थापित किया है। मंत्री ने कहा कि भर्ती प्रक्रिया को पारदर्शी और समयबद्ध बनाने के लिए तकनीकी साधनों का अधिक उपयोग किया जा रहा है।

माल ढुलाई और लागत नियंत्रण से मजबूती

रेल मंत्री ने कहा कि पिछले दशक में माल ढुलाई में लगभग 40 करोड़ टन की वृद्धि हुई है, जिससे राजस्व में उल्लेखनीय इजाफा हुआ। यात्री आय बढ़ाने और लागत कम करने के लिए भी लगातार कदम उठाए गए हैं। ऊर्जा क्षेत्र में दक्षता सुधार के कारण करीब 5,500 करोड़ रुपये की बचत हुई है। डीजल और बिजली पर होने वाला खर्च चार वर्ष पहले 37,841 करोड़ रुपये था, जो घटकर लगभग 32,400 करोड़ रुपये रह गया है। मंत्री ने कहा कि विद्युतिकरण, ऊर्जा खरीद के बेहतर अनुबंध और नवीकरणीय ऊर्जा के उपयोग से यह संभव हुआ है।

मेंटेनेंस प्रणाली में सुधार और संसाधनों के कुशल उपयोग से भी परिचालन लागत में कमी आई है। वैष्णव ने कहा कि रेलवे अब वित्तीय अनुशासन के साथ-साथ सेवा गुणवत्ता सुधार पर भी समान रूप से ध्यान दे रहा है।

खर्च का विस्तृत ब्योरा

मंत्री ने सदन में रेलवे के वार्षिक खर्च का विस्तृत विवरण प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि रेलवे का कुल वार्षिक खर्च लगभग 2.74 लाख करोड़ रुपये है। करीब 12 लाख कर्मचारियों के वेतन और संबंधित मदों पर 1.18 लाख करोड़ रुपये खर्च होते हैं। लगभग 18 लाख पेंशनरों पर 65,000 करोड़ रुपये का व्यय होता है। ऊर्जा पर 32,000 करोड़ रुपये खर्च किए जाते हैं। वित्तीय लागत (ब्याज आदि) पर 23,000 करोड़ रुपये का व्यय है। रखरखाव और अनुरक्षण पर 8,000 करोड़ रुपये खर्च होते हैं। उन्होंने कहा कि इतनी बड़ी संरचना और मानव संसाधन वाले संगठन के लिए वित्तीय संतुलन बनाए रखना एक चुनौती है, लेकिन प्रबंधन सुधारों से यह संभव हुआ है।

यात्रियों को 60,000 करोड़ की सब्सिडी

रेल मंत्री ने कहा कि सरकार यात्रियों को प्रतिवर्ष लगभग 60,000 करोड़ रुपये की सब्सिडी दे रही है। यह औसतन टिकट किराए का लगभग 45 प्रतिशत है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सामाजिक दायित्वों के तहत रेलवे को सस्ती यात्रा सुविधा उपलब्ध करानी होती है, जिससे राजस्व पर दबाव पड़ता है, लेकिन सरकार इस दायित्व को निभा रही है। मंत्री के अनुसार, यदि सब्सिडी को समायोजित किया जाए तो रेलवे की आय और भी अधिक हो सकती थी, लेकिन आम जनता की सुविधा सर्वोपरि है।

पूर्वोत्तर, पंजाब और केरल पर विशेष फोकस

वैष्णव ने क्षेत्रीय संतुलन और अधोसंरचना विकास पर जोर देते हुए कहा कि पूर्वोत्तर राज्यों के लिए रेलवे बजट में भारी वृद्धि की गई है। पहले जहां लगभग 2,000 करोड़ रुपये का आवंटन होता था, उसे बढ़ाकर 11,486 करोड़ रुपये कर दिया गया है। पंजाब के लिए 5,673 करोड़ रुपये का रिकॉर्ड बजट आवंटित किया गया है, जिसे मंत्री ने पूर्ववर्ती कांग्रेस शासनकाल की तुलना में 25 गुना अधिक बताया। केरल में रेल परियोजनाओं की प्रगति पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि भूमि अधिग्रहण बड़ी बाधा बना हुआ है। अब तक केवल 14 प्रतिशत भूमि ही अधिग्रहित हो पाई है। केंद्र सरकार ने राज्य के लिए इस वर्ष 3,795 करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया है और राज्य सरकार से सहयोग की अपील की है।

नई रेल लाइनें और लंबित परियोजनाएं

सांसद चौधरी मोहम्मद रमजान के प्रश्न के लिखित उत्तर में मंत्री ने बताया कि काजीगुंड-श्रीनगर-बडगाम रेल लाइन के दोहरीकरण तथा प्रस्तावित बारामूला-उरी नई लाइन की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार कर ली गई है। हालांकि, उन्होंने कहा कि इन परियोजनाओं की पूर्णता की कोई निश्चित समयसीमा तय करना संभव नहीं है, क्योंकि यह कई प्रशासनिक और तकनीकी कारकों पर निर्भर करता है।

तेलंगाना में कलवकुर्थी–माचेरला रेल लाइन के संबंध में भी मंत्री ने कहा कि 316 किलोमीटर लंबी नई लाइन के लिए सर्वेक्षण और डीपीआर तैयार की जा रही है। इसके बाद विभिन्न मंत्रालयों और संबंधित राज्य सरकारों से मंजूरी ली जाएगी। राज्यसभा में जम्मू मेट्रो और अन्य अधोसंरचना परियोजनाओं की प्रगति पर भी चर्चा हुई, जहां मंत्री ने बताया कि कार्य विभिन्न चरणों में आगे बढ़ रहा है।

दिल्ली–पुणे वंदे भारत स्लीपर की मांग

महाराष्ट्र की भाजपा सांसद डॉ. मेधा विश्राम कुलकर्णी ने दिल्ली से पुणे के बीच वंदे भारत स्लीपर ट्रेन चलाने की मांग उठाई। मंत्री ने इस मांग पर सकारात्मक विचार का संकेत दिया, हालांकि कोई औपचारिक घोषणा नहीं की गई।

गिर नेशनल पार्क में एआइ आधारित सुरक्षा प्रणाली

गुजरात के गिर राष्ट्रीय उद्यान और लायन वाइल्डलाइफ सैंक्चुअरी क्षेत्र में शेरों की आवाजाही को ध्यान में रखते हुए रेलवे ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित इंट्रूज़न डिटेक्शन सिस्टम को मंजूरी दी है। यह प्रणाली भावनगर डिवीजन के डामनगर–पीपावाव सेक्शन के 115 किलोमीटर क्षेत्र में लागू की जाएगी। इस तकनीक के माध्यम से ट्रैक के आसपास शेरों या अन्य वन्यजीवों की गतिविधि का पता चल सकेगा और इसकी रीयल-टाइम सूचना लोको पायलट, स्टेशन मास्टर और कंट्रोल रूम तक पहुंचाई जाएगी। मंत्री ने कहा कि इससे वन्यजीवों और ट्रेनों दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित होगी और दुर्घटनाओं की आशंका कम होगी।

वित्तीय अनुशासन और सेवा सुधार का संतुलन

रेल मंत्री ने अपने वक्तव्य में कहा कि भारतीय रेलवे केवल राजस्व अर्जन करने वाला संगठन नहीं है, बल्कि यह देश की जीवनरेखा है। सामाजिक दायित्वों, व्यापक मानव संसाधन और विशाल नेटवर्क के बावजूद रेलवे ने वित्तीय अनुशासन बनाए रखते हुए अधिशेष अर्जित किया है। उन्होंने कहा कि आने वाले वर्षों में बुनियादी ढांचे के आधुनिकीकरण, नई लाइनों के विस्तार, तकनीकी उन्नयन और यात्री सुविधाओं के सुधार पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। साथ ही, वित्तीय स्थिरता और परिचालन दक्षता को भी प्राथमिकता दी जाएगी। राज्यसभा में दिए गए इस विस्तृत विवरण के साथ मंत्री ने यह संकेत दिया कि रेलवे आने वाले वर्षों में विकास और वित्तीय संतुलन दोनों लक्ष्यों को साथ लेकर आगे बढ़ने की रणनीति पर काम कर रहा है।


Next Story

Related Stories

All Rights Reserved. Copyright @2019
Share it