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राहुल गांधी ने बच्चों से स्कूल के दिनों की यादें साझा की, AI से आईटी पर संकट की दी चेतावनी
छात्रों से बातचीत के दौरान राहुल गांधी ने बताया कि उन्हें अपनी केमिस्ट्री टीचर बेहद पसंद थीं। उन्होंने कहा,“मेरी केमिस्ट्री टीचर बहुत अच्छी थीं। वह हमें परीक्षा की तैयारी में काफी मदद करती थीं।

स्कूल के दिनों की यादें साझा कीं
छात्रों से बातचीत के दौरान राहुल गांधी ने बताया कि उन्हें अपनी केमिस्ट्री टीचर बेहद पसंद थीं। उन्होंने कहा,“मेरी केमिस्ट्री टीचर बहुत अच्छी थीं। वह हमें परीक्षा की तैयारी में काफी मदद करती थीं। वह बहुत अच्छा पढ़ाती थीं और हमें समझाती थीं कि कैसे पढ़ना है और कैसे एग्जाम का सामना करना है। इसी वजह से मुझे वह बहुत पसंद थीं।” राहुल गांधी ने अपने बचपन और स्कूल जीवन से जुड़े किस्से भी सुनाए। उन्होंने कहा कि वह स्कूल में अक्सर शरारत किया करते थे। राहुल ने मुस्कुराते हुए कहा कि मैं स्कूल में हर दिन कुछ न कुछ शरारत करता था। जब मैं बोर्डिंग स्कूल में पढ़ता था, तो अपने माता-पिता को यह यकीन दिलाता था कि मैं खुश नहीं हूं, ताकि वे मुझसे मिलने आ जाएं। असल में मैं उदास नहीं रहता था, बल्कि स्कूल में बहुत खुश रहता था। उनकी इन बातों पर छात्र हंसते नजर आए और माहौल काफी सहज हो गया।AI से सॉफ्टवेयर इंडस्ट्री को खतरे की चेतावनी
छात्रों से संवाद के दौरान राहुल गांधी ने भविष्य की चुनौतियों पर भी बात की। उन्होंने कहा कि भारत ने आईटी और सॉफ्टवेयर सेक्टर में दुनिया में अपनी एक अलग पहचान बनाई है। राहुल ने कहा कि हमने आईटी सेक्टर में काफी अच्छा काम किया है। सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग में भारत की सफलता के बारे में पूरी दुनिया जानती है। हालांकि, उन्होंने चेतावनी दी कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के तेजी से बढ़ते प्रभाव के कारण सॉफ्टवेयर इंडस्ट्री आने वाले समय में मुश्किलों का सामना कर सकती है। उन्होंने कहा, AI के कारण सॉफ्टवेयर इंडस्ट्री में चुनौतियां बढ़ने वाली हैं। ऐसे में हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि हम सर्विस सेक्टर में पिछड़ न जाएं, जहां हम अब तक अच्छा प्रदर्शन करते आए हैं ।मैन्यूफैक्चरिंग सेक्टर पर जोर
शिक्षा महंगी नहीं होनी चाहिए
राहुल गांधी ने शिक्षा को लेकर अपनी सोच भी छात्रों के सामने रखी। उन्होंने कहा कि शिक्षा बहुत महंगी नहीं होनी चाहिए और इसका अत्यधिक निजीकरण भी नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा, मेरी सोच है कि शिक्षा सबके लिए सुलभ होनी चाहिए। प्राइवेट स्कूल और कॉलेज हो सकते हैं, लेकिन अच्छी और गुणवत्तापूर्ण सरकारी शिक्षा की भी अपनी अहम भूमिका है। उन्होंने जोर देकर कहा कि सरकार को शिक्षा के क्षेत्र में बजट बढ़ाना चाहिए। उन्होंने कहा, अगर हमें देश का भविष्य मजबूत बनाना है, तो सरकार को शिक्षा के बजट में पैसा लगाना होगा।रोजगार के अवसर और युवाओं का भविष्य
रोजगार को लेकर राहुल गांधी ने कहा कि देश में ऐसा माहौल बनना चाहिए, जहां युवाओं को पर्याप्त रोजगार के अवसर मिलें। उन्होंने कहा कि रोजगार सिर्फ सर्विस, इंडस्ट्री और आईटी सेक्टर तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि मैन्यूफैक्चरिंग सेक्टर में भी बड़े पैमाने पर रोजगार पैदा होने चाहिए। उन्होंने कहा, युवा लड़के और लड़कियां देश के विकास में योगदान देना चाहते हैं। उन्हें मौके मिलने चाहिए, ताकि वे आत्मनिर्भर बन सकें और देश को आगे बढ़ा सकें।छात्रों के बीच संवाद का संदेश
राहुल गांधी का यह संवाद केवल एक राजनीतिक भाषण नहीं था, बल्कि छात्रों को प्रेरित करने और उन्हें भविष्य के लिए तैयार करने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। स्कूल के दिनों की निजी यादों से लेकर देश की आर्थिक और तकनीकी चुनौतियों तक, राहुल गांधी ने कई अहम मुद्दों पर अपनी बात रखी। इस कार्यक्रम के जरिए राहुल गांधी ने यह संदेश देने की कोशिश की कि शिक्षा, रोजगार और मैन्यूफैक्चरिंग जैसे क्षेत्रों में मजबूत नीति और सोच के बिना देश आगे नहीं बढ़ सकता। छात्रों से सीधे संवाद कर उन्होंने यह भी दिखाया कि राजनीति केवल सत्ता की बात नहीं, बल्कि भविष्य की पीढ़ी को दिशा देने का माध्यम भी हो सकती है।Next Story


