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पीएम मोदी का बड़ा बयान: स्वच्छ ऊर्जा ही भारत की आर्थिक सुरक्षा की असली कुंजी, 2030 तक 500 गीगावाट हरित ऊर्जा लक्ष्य की ओर देश के कदम तेज

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को नई दिल्ली में आयोजित भारत नवीकरणीय ऊर्जा शिखर सम्मेलन और एक्सपो में हिस्सा लिया। इस दौरान उन्होंने सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि इस बार का समिट खास है, क्योंकि यह विशेष परिस्थितियों में हो रहा है। नवीकरणीय ऊर्जा का हमारी जिंदगी और विकास यात्रा में क्या महत्व है, यह इस साल और अधिक स्पष्ट हो गया है।

पीएम मोदी का बड़ा बयान: स्वच्छ ऊर्जा ही भारत की आर्थिक सुरक्षा की असली कुंजी, 2030 तक 500 गीगावाट हरित ऊर्जा लक्ष्य की ओर देश के कदम तेज
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नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को नई दिल्ली में आयोजित भारत नवीकरणीय ऊर्जा शिखर सम्मेलन और एक्सपो में हिस्सा लिया। इस दौरान उन्होंने सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि इस बार का समिट खास है, क्योंकि यह विशेष परिस्थितियों में हो रहा है। नवीकरणीय ऊर्जा का हमारी जिंदगी और विकास यात्रा में क्या महत्व है, यह इस साल और अधिक स्पष्ट हो गया है।

पीएम मोदी ने कहा कि यह भी एक संयोग है कि समिट में इंटरनेशनल सोलर एनर्जी की नौवीं असेम्बली भी हो रही है। ग्रीन हाइड्रोजन पर कॉन्फ्रेंस के प्रतिनिधि भी यहाँ हैं। इस साल के आयोजन का दायरा बड़ा है।

उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में वैश्विक अर्थव्यवस्था ने अभूतपूर्व संकट देखे हैं। कोरोना महामारी से लेकर पश्चिम एशिया के संकटों तक, दुनिया ने कई परेशानियों का सामना किया है, लेकिन 140 करोड़ भारतीयों पर गर्व है कि हमने इन संकटों को बेहतर तरीके से संभाला है। इन संकटों के बाद भी भारत की विकास दर ऊंची रही है। अगर भारत स्वच्छ ऊर्जा पर निवेश न करता और नई व्यवस्थाएं न बनाता, तो हमारा संकट अन्य देशों की तुलना में और भी गंभीर हो सकता था।

प्रधानमंत्री ने कहा कि इस संकट ने हर देश को स्पष्ट संदेश दिया है कि ऊर्जा सुरक्षा सीधे-सीधे आर्थिक सुरक्षा से जुड़ी हुई है। हम सभी जानते हैं कि ऊर्जा सुरक्षा का भविष्य स्वच्छ ऊर्जा में है। यदि हम आगे भी जीवाश्म ईंधन पर निर्भर रहे, तो वैश्विक अर्थव्यवस्था बार-बार बाधित होती रहेगी। जीवाश्म ईंधन के भंडार सीमित हैं और कुछ ही क्षेत्रों तक सीमित हैं, लेकिन नवीकरणीय ऊर्जा असीमित है। इसका लाभ हर देश ले सकता है।

उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में भारत की 12 वर्षों की यात्रा संकल्प, जुनून और प्रदर्शन की रही है। इसका प्रमाण कॉप-26 से जुड़ी हमारी प्रतिबद्धता है। 2021 के शिखर सम्मेलन में भारत ने 2030 तक 500 गीगावाट गैर-जीवाश्म ईंधन ऊर्जा क्षमता हासिल करने का संकल्प लिया था। हमने एक वादा किया था और हम उसे पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। पेरिस समझौते के तहत भारत ने अपनी स्थापित बिजली क्षमता का 50 प्रतिशत हिस्सा गैर-जीवाश्म ईंधन स्रोतों से प्राप्त करने का भी वादा किया था। हमने यह लक्ष्य 2025 में ही हासिल कर लिया, जो तय समय से 5 वर्ष पहले है। आज भारत की स्थापित बिजली क्षमता का 50 प्रतिशत से अधिक हिस्सा गैर-जीवाश्म ईंधन स्रोतों से आता है।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि 500 गीगावाट की गैर-जीवाश्म ईंधन ऊर्जा क्षमता हासिल करने की दिशा में हम तेजी से काम कर रहे हैं और 300 गीगावाट का लक्ष्य प्राप्त कर चुके हैं। सौर और नवीकरणीय ऊर्जा के मामले में भारत आज दुनिया के शीर्ष तीन देशों में शामिल है। आने वाले 10 से 11 वर्षों में हमारा प्रयास 500 गीगावाट नई गैर-जीवाश्म ईंधन ऊर्जा जोड़ने का है। यह लक्ष्य थोड़ा कठिन है, लेकिन मुझे अपने देश की क्षमता पर विश्वास है।

उन्होंने कहा कि भारत के नवाचार और भारत के अनुभव का लाभ पूरी मानवता को मिले, यह हमारी इच्छा है। ग्रीन एनर्जी को लेकर भी हमारी भावना यही है। इस क्षेत्र में भारत की सफलताएं दुनिया के अनेक देशों के काम आएंगी। हमने फरवरी 2024 में पीएम सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना शुरू की। इसके तहत एक करोड़ घरों में रूफटॉप सोलर पैनल लगाने का लक्ष्य है। बीते 24-25 महीनों में 65 लाख से अधिक घर इस अभियान से जुड़ चुके हैं। हमारे मंत्री ने बताया कि हर छह दिन में एक लाख घर इस मुहिम का हिस्सा बन रहे हैं।

पीएम मोदी ने कहा कि पीएम सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना का असर लोगों के बिजली बिल पर भी पड़ रहा है। एक अध्ययन के अनुसार, इन 65 लाख घरों के बिजली बिल 76 प्रतिशत तक कम हो गए हैं। कुछ घरों का बिल शून्य आता है और कई लोग बिजली बेचकर आय भी अर्जित कर रहे हैं। भारत की यह योजना कई देशों में ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत कर सकती है। भारत सौर ऊर्जा को अपने नागरिकों के जीवन का हिस्सा बना रहा है। बीते 12 वर्षों में हमने उद्योगों और खेतों को भी सौर ऊर्जा से जोड़ने का प्रयास किया है। भारत में 44 हजार से अधिक सरकारी भवन सौर ऊर्जा से जुड़ चुके हैं। इससे हर वर्ष 700 करोड़ रुपए की बचत हो रही है।

पीएम ने कहा कि कुसुम योजना से भी लोगों को लाभ मिल रहा है। इसके तहत 30 लाख से अधिक किसानों के लिए सौर ऊर्जा से सिंचाई की व्यवस्था हुई है। एक अनुमान के अनुसार, सौर ऊर्जा का लाभ लेने वाले किसानों को साल भर में एक लाख रुपए तक की बचत हो रही है। इसके साथ ही पीएम सूर्य सरोवर योजना के तहत सरोवरों, तालाबों और झीलों के ऊपर सोलर पैनल लगाकर बिजली पैदा करने का लक्ष्य है। इससे इन जलाशयों का बेहतर उपयोग हो रहा है और भूमि पर होने वाला खर्च भी कम हो रहा है।

उन्होंने आगे कहा कि हमारी स्वच्छ ऊर्जा व्यवस्था केवल जलविद्युत, सौर, पवन और परमाणु ऊर्जा तक सीमित नहीं है। भारत ग्रीन हाइड्रोजन के क्षेत्र में बड़ी छलांग लगाने के लिए मिशन मोड में आगे बढ़ रहा है। नेशनल ग्रीन हाइड्रोजन मिशन के तहत इस दशक के अंत तक 50 लाख टन ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है। हम अपने परिवहन तंत्र को भी ग्रीन हाइड्रोजन से जोड़ रहे हैं। कुछ महीने पहले ही भारत ने पहली ग्रीन हाइड्रोजन ट्रेन शुरू की है।

उन्होंने कहा कि केवल बिजली पैदा करना ही काफी नहीं है, बल्कि उसका सही उपयोग करना और उसे जरूरतमंद स्थानों तक पहुंचाना भी आवश्यक है। सौर और पवन ऊर्जा कुछ क्षेत्रों में अधिक मात्रा में उत्पादित होती है। जहां बिजली उत्पादन कम हो पाता है, वहां के लोगों तक भी इसका लाभ पहुंचे, यह सुनिश्चित किया जा रहा है। इसके लिए ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर बनाए जा रहे हैं।

पीएम मोदी ने कहा कि ग्रीन एनर्जी में हमारी सफलता के पीछे हमारी बढ़ती विनिर्माण क्षमता भी एक बड़ा कारण है। कुछ समय पहले तक हम सौर ऊर्जा से जुड़ी छोटी-छोटी चीजों के लिए भी आयात पर निर्भर थे। एक दशक पहले हमारी सोलर मॉड्यूल विनिर्माण क्षमता केवल 2 गीगावाट थी और आज यह 200 गीगावाट से अधिक हो चुकी है। सोलर सेल विनिर्माण क्षमता भी करीब 40 गीगावाट तक पहुंच गई है। अब हम अन्य घटकों के विनिर्माण का भी विस्तार कर रहे हैं। यह हमारी मेक इन इंडिया पहल की सफलता का भी प्रमाण है।

पीएम मोदी ने कहा कि हमने लाखों सोलर पंप वितरित किए हैं, लेकिन हमें इससे आगे बढ़ना है। मेरा विजन है कि अन्नदाता ऊर्जादाता बने। किसान अपनी खाली जमीन पर सोलर पैनल लगाएँ, यह हमें अधिक से अधिक गांवोंजहां में सुनिश्चित करना होगा। सौर क्रांति का यह नया दौर केवल अपनाने का नहीं, बल्कि नवाचार का भी है। इसलिए मैं स्टार्टअप्स, आईआईटी, नवाचारकर्ताओं और उद्यमियों से विशेष आग्रह करता हूँ कि वे आगे आएँ और ऐसे मॉडल विकसित करें, जिनसे एक परिवार की अधिकतम जरूरतें सौर ऊर्जा से पूरी हो सकें।

पीएम मोदी ने कहा कि हमें ऐसी व्यवस्था की ओर बढ़ना है, जहां परिवार अपनी ही छत पर उत्पन्न सौर ऊर्जा से खाना पका सके। हमें स्वच्छ खाना पकाने का आंदोलन चलाना है। आयातित गैस पर निर्भरता को न्यूनतम करना है। अधिक से अधिक परिवारों के पास इलेक्ट्रिक वाहन का विकल्प हो, जिसे सौर ऊर्जा से ही चार्ज किया जा सके। इससे परिवारों के हजारों रुपए बचेंगे। रोजमर्रा की जरूरतों और खेती से जुड़ी गतिविधियों को भी सौर ऊर्जा से जोड़ना है। इसके लिए काम करने का अवसर हम सभी के पास है। इस अवसर को जाने नहीं देना है। भारत में ऐसे समाधान तैयार करने हैं, जो पूरी दुनिया के काम आ सकें।

उन्होंने कहा कि स्वच्छ ऊर्जा के प्रयासों से रोजगार के अवसर भी पैदा हो रहे हैं। आज हजारों लोगों को रोजगार मिल रहा है। भविष्य में जैसे-जैसे सौर ऊर्जा क्षमता बढ़ेगी, रोजगार के अवसर भी बढ़ते जाएंगे।


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