पेट्रोल-डीजल फिर महंगा, पांच दिन में दूसरी बढ़ोतरी से बढ़ी आम आदमी की चिंता
नई कीमतें लागू होने के बाद राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में पेट्रोल 98.64 रुपये प्रति लीटर पहुंच गया है, जबकि डीजल की कीमत 91.58 रुपये प्रति लीटर हो गई है। इससे पहले दिल्ली में पेट्रोल 97.77 रुपये और डीजल 90.67 रुपये प्रति लीटर बिक रहा था।

नई दिल्ली: देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में एक बार फिर इजाफा कर दिया गया है। पिछले पांच दिनों में यह दूसरी बार है जब तेल कंपनियों ने ईंधनों के दाम बढ़ाए हैं। नई बढ़ोतरी के बाद आम लोगों की जेब पर अतिरिक्त बोझ बढ़ना तय माना जा रहा है। खासतौर पर रोजाना वाहन से सफर करने वाले नौकरीपेशा लोग, ऑटो-रिक्शा चालक और कैब ड्राइवर इससे सबसे ज्यादा प्रभावित होंगे।
पेट्रोल-डीजल के दाम में कितना इजाफा
ताजा बढ़ोतरी के तहत पेट्रोल की कीमत में 86 पैसे प्रति लीटर और डीजल में 83 पैसे प्रति लीटर की वृद्धि की गई है। इससे पहले 15 मई को भी दोनों ईंधनों की कीमतों में 3 रुपये प्रति लीटर का इजाफा किया गया था। यानी सिर्फ पांच दिनों में पेट्रोल और डीजल करीब 4 रुपये प्रति लीटर तक महंगे हो चुके हैं। नई कीमतें लागू होने के बाद राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में पेट्रोल 98.64 रुपये प्रति लीटर पहुंच गया है, जबकि डीजल की कीमत 91.58 रुपये प्रति लीटर हो गई है। इससे पहले दिल्ली में पेट्रोल 97.77 रुपये और डीजल 90.67 रुपये प्रति लीटर बिक रहा था।
सीएनजी उपभोक्ताओं को भी झटका
सिर्फ पेट्रोल और डीजल ही नहीं, सीएनजी उपभोक्ताओं को भी महंगाई का सामना करना पड़ रहा है। दिल्ली-एनसीआर में सीएनजी की कीमतों में 1 रुपये प्रति किलोग्राम की बढ़ोतरी की गई है। इससे पहले 15 मई को भी सीएनजी के दाम 2 रुपये प्रति किलो बढ़ाए गए थे। नई दरों के बाद दिल्ली में सीएनजी की कीमत पहली बार 80 रुपये प्रति किलो के पार पहुंच गई है। राजधानी में सीएनजी अब 80.09 रुपये प्रति किलो बिक रही है, जबकि नोएडा में इसकी कीमत 88.70 रुपये प्रति किलो हो गई है।
आम लोगों के बजट पर बढ़ेगा दबाव
ईंधनों की लगातार बढ़ती कीमतों का असर सीधे आम आदमी के मासिक बजट पर पड़ने वाला है। रोजाना ऑफिस आने-जाने वाले लोग अब अधिक खर्च करने को मजबूर होंगे। वहीं सार्वजनिक परिवहन और माल ढुलाई की लागत बढ़ने से आने वाले दिनों में सब्जियों, दूध, खाद्य सामग्री और अन्य जरूरी सामान भी महंगे हो सकते हैं। ऑटो और टैक्सी चालकों की कमाई पर भी इसका असर पड़ रहा है। उनका कहना है कि ईंधन महंगा होने से रोजाना की बचत घटती जा रही है। कई शहरों में किराया बढ़ाने की मांग भी तेज हो सकती है।
कच्चे तेल की कीमतों में उछाल बड़ी वजह
विशेषज्ञों के अनुसार पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी की सबसे बड़ी वजह अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें हैं। पश्चिम एशिया में जारी तनाव और ईरान से जुड़े हालात के कारण वैश्विक बाजार में अनिश्चितता बढ़ी हुई है। ईरान संघर्ष शुरू होने के बाद से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में 50 प्रतिशत से ज्यादा की वृद्धि देखी गई है। पिछले कुछ दिनों से कच्चा तेल लगातार 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर बना हुआ है। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए वैश्विक कीमतों में बढ़ोतरी का सीधा असर घरेलू बाजार पर पड़ता है।
रुपये में गिरावट ने बढ़ाई मुश्किल
तेल की कीमतों के साथ-साथ डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये की कमजोरी भी चिंता बढ़ा रही है। हाल ही में रुपया गिरकर 96.23 प्रति डॉलर के रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया। रुपये के कमजोर होने का मतलब है कि भारत को कच्चा तेल खरीदने के लिए ज्यादा विदेशी मुद्रा खर्च करनी पड़ेगी। विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ता है तथा रुपया और कमजोर होता है, तो आने वाले समय में पेट्रोल, डीजल और गैस की कीमतों में और बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।
बाजार और महंगाई पर असर
ऊंची ईंधन कीमतों का असर सिर्फ वाहन चालकों तक सीमित नहीं रहता। इसका प्रभाव शेयर बाजार, परिवहन लागत और रोजमर्रा की वस्तुओं की कीमतों पर भी पड़ता है। बढ़ती महंगाई से उपभोक्ताओं की क्रय क्षमता प्रभावित होती है और अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ता है। आर्थिक जानकारों का कहना है कि सरकार और तेल कंपनियों के सामने चुनौती यह है कि वे बढ़ती वैश्विक कीमतों और घरेलू महंगाई के बीच संतुलन कैसे बनाए रखें। फिलहाल आम जनता को राहत मिलने के आसार कम नजर आ रहे हैं।


