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नोएडा सीवर हादसे पर मानवाधिकार आयोग सख्त, स्वतः संज्ञान लेकर नोएडा प्राधिकरण और पुलिस आयुक्त से मांगी रिपोर्ट

गौतमबुद्ध नगर जिले में नोएडा प्राधिकरण द्वारा कराए जा रहे सीवर लाइन सफाई अभियान के दौरान जहरीली गैस की चपेट में आने से एक व्यक्ति की मौत के मामले को राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी), ने गंभीरता से लिया है। आयोग ने इस घटना का स्वतः संज्ञान लेते हुए इसे मानवाधिकारों से जुड़ा गंभीर मामला माना है।

नोएडा सीवर हादसे पर मानवाधिकार आयोग सख्त, स्वतः संज्ञान लेकर नोएडा प्राधिकरण और पुलिस आयुक्त से मांगी रिपोर्ट
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नोएडा। गौतमबुद्ध नगर जिले में नोएडा प्राधिकरण द्वारा कराए जा रहे सीवर लाइन सफाई अभियान के दौरान जहरीली गैस की चपेट में आने से एक व्यक्ति की मौत के मामले को राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी), ने गंभीरता से लिया है। आयोग ने इस घटना का स्वतः संज्ञान लेते हुए इसे मानवाधिकारों से जुड़ा गंभीर मामला माना है।

आयोग की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, उत्तर प्रदेश के गौतमबुद्ध नगर जिले में नोएडा प्राधिकरण की ओर से चलाए जा रहे सीवर सफाई अभियान के दौरान एक व्यक्ति ने सीवर लाइन में मौजूद जहरीली गैसों का संपर्क होने के कारण अपनी जान गंवा दी। इस घटना के बाद राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने स्वतः संज्ञान लेते हुए संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। एनएचआरसी ने इस मामले में नोएडा प्राधिकरण के अध्यक्ष तथा गौतमबुद्ध नगर के पुलिस आयुक्त (कमिश्नर ऑफ पुलिस) को नोटिस जारी किया है।

आयोग ने दोनों अधिकारियों से इस पूरे मामले पर दो सप्ताह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। आयोग ने अपने नोटिस में घटना के सभी पहलुओं की जानकारी मांगी है। इसमें यह स्पष्ट करने को कहा गया है कि सीवर की सफाई के दौरान निर्धारित सुरक्षा मानकों का पालन किया गया था या नहीं, सफाई कर्मियों को आवश्यक सुरक्षा उपकरण उपलब्ध कराए गए थे या नहीं, घटना किन परिस्थितियों में हुई तथा इसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों या एजेंसियों के विरुद्ध क्या कार्रवाई की गई है। इसके अलावा पीड़ित के परिवार को दी गई सहायता और मुआवजे की जानकारी भी रिपोर्ट में शामिल करने को कहा गया है।

सीवर और मैनहोल की सफाई के दौरान होने वाली दुर्घटनाओं को लेकर समय-समय पर सुरक्षा मानकों के पालन पर सवाल उठते रहे हैं। ऐसे मामलों में जहरीली गैसों के कारण कर्मचारियों की मौत की घटनाएं पहले भी सामने आती रही हैं। इसी को देखते हुए राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने इस घटना को अत्यंत गंभीर मानते हुए तत्काल हस्तक्षेप किया है।



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